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ढींगरा फैमिली फाउण्डेशन-हिन्दी चेतना अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह आयोजित

July 30, 2014

टोरेण्टो (कैनेडा) / ढींगरा फैमिली  फाउण्डेशन -हिन्दी चेतना अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह स्कारबरो सिविक सेण्टर,  काउन्सिल  चैम्बर्स, ओण्टेरियो कैनेडा 26 जुलाई,  2014 को आयोजित हुआ। इस समारोह में, समग्र साहित्य अवदान हेतु वरिष्ठ साहित्यकार प्रो हरिशंकर आदेश, कथा सम्मान (उपन्यास-कामिने काय कान्तारे) के लिए श्री महेश कटारे तथा कथा सम्मान (कहानी-संग्रह –उत्तरायण) हेतु सुदर्शन प्रियदर्शिनी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम  में  डॉ सुधा ओम ढींगरा के कविता संग्रह ( सरकती परछाइयाँ), कौन –सी ज़मीन अपनी (कहानी-संग्रह)  के  असमिया अनुवाद (कुनखन आपून भूमि)  का विमोचन किया  गया। इस अवसर पर हिन्दी चेतना के मुख्य सम्पादक श्री श्याम त्रिपाठी, ढींगरा फाउण्डेशन  की उपाध्यक्ष डॉ सुधा ओम ढींगरा  तथा हिन्दी चेतना के सह सम्पादक सर्वश्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’, पंकज सुबीर और अभिनव शुक्ल उपस्थित थे ।

स्कारबरो सिविक सेण्टर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में  वर्ष-2013 के सम्म्मान प्रदान किए गए। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथिगण  श्री बास बाल किशोर ( एम पी  पी), श्री  रेमण्ड चो ( काउन्सलर- टोरन्टो),   श्री जो ली (काउन्सलर- मार्ख़म), सुश्री मित्ज़ी हन्टर ( वित्त सहायक  राज्य मन्त्री)  उपस्थित थे। तीनों सम्मानित रचनाकारों को शाल , श्रीफल , सम्मान –पत्र, स्मृति-चिह्न एवं सम्मानराशि स्वरूप 500 डालर भेंट किए गए। इस अवसर पर  ऑण्टेरियो प्रशासन की ओर से भी तीनों सम्मानित रचनाकारों को प्रशस्ति-पत्र भेंट किए गए।

इस अवसर पर  उद्बोधन में  कौन्सुलेट श्री अखिलेश मिश्र ने हिन्दी-चेतना के द्वारा  हिन्दी-प्रचार-प्रसार –कार्य की सराहना की। श्री बास बाल किशोर  ने अपने पूर्वजों के द्वारा भाषा की अस्मिता के लिए किए गए संघर्षो  का बहुत भावुकता से उल्लेख किया ।श्री श्याम त्रिपाठी ने हिन्दी चेतना की विकास –यात्रा  का उल्लेख किया। फ़ाउण्डेशन के कार्य को डॉ सुधाओम ढींगरा ने हिन्दी को जन-जन तक पहुँचाने के  संकल्प का विनम्र प्रयास बताया। सम्मानित साहित्यकार श्री महेश कटारे ने कहा कि हिन्दी चेतना  एक सेतु का काम कर रही है जो समग्र भारतीय भाषाओं की सामासिक और समाहारी चेतना की प्रतीक है। सुदर्शन प्रियदर्शिनी ने कहा कि हिन्दी को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है कि आने वाली पीढ़ी को अपनी भाषा से दूर न किया जाए।

हिन्दी चेतना टीम के सदस्यों को भी स्मृति-चिह्न भेंट किए गए। इस आयोजन के अवसर पर बड़ी संख्या में हिन्दी –प्रेमी और साहित्यकार उपस्थित थे।

 

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