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साहित्य समाज परिवर्तन की विधा : जयकिशन शर्मा

July 14, 2014

पुस्तक 'देश कठपुतलियों के हाथ में’ के लिए राष्ट्रीय पत्र लेखक मंच ने लेखक लोकेन्द्र का किया सम्मान

ग्वालियर/ साहित्य समाज परिवर्तन की विधा है। इसलिए साहित्य का सृजन करते समय बड़ी सोच समझकर शब्दों का चयन करना चाहिए। लेखन सकारात्मक बदलाव के लिए होना चाहिए। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते समय भी मर्यादा का ख्याल रखना जरूरी है। ये विचार मध्यप्रदेश के सूचना आयुक्त जनकिशन शर्मा ने व्यक्त किए। वे राष्ट्रीय पत्र लेखक मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थे। इस मौके पर मंच की ओर से साहित्यकार और लेखक लोकेन्द्र सिंह को उनकी पुस्तक 'देश कठपुतलियों के हाथ में’ के लिए सम्मानित किया गया। लेखक श्री सिंह ने कहा कि राजनीति कोई बुरी बला नहीं है। इसे जानना और समझना प्रत्येक भारतीय के लिए जरूरी है। 

सूचना आयुक्त श्री शर्मा ने कहा कि लेखन समाज की दशा तय करता है। नकारात्मक लेखक होगा तो समाज में नकारात्मकता बढ़ेगी। इसीलिए लेखन में सावधानी बरतनी चाहिए। नए जमाने में सोशल मीडिया ने प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की आजादी उपलब्ध करा दी है। सोशल मीडिया अधिक लोकतंत्र है। प्रत्येक व्यक्ति समाज हित में सोशल मीडिया का अच्छा उपयोग कर सकता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक घनश्याम पिरोनिया ने कहा कि पत्र लेखक बड़ी महती जिम्मेदारी है। लेकिन, पत्र लेखकों को तय करना चाहिए कि पत्र लिखने के लिए उनका विषय क्या हो? अध्ययन के बाद ही गंभीर मसलों पर अपनी राय जाहिर करना चाहिए। कार्यक्रम के बतौर विशिष्ट अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सोलंकी ने कहा कि 'संपादक के नाम पत्र’ पर शासन ही नहीं आमजन और संपादक भी ध्यान देते हैं। राष्ट्रीय पत्र लेखक मंच की कार्यशाला सराहनीय प्रयास है, इससे कई लोग पत्र लिखने के लिए प्रेरित होंगे। इस मौके पर पत्र लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। इस मौके पर  मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के अध्यक्ष राजकिशोर वाजपेयी, मंच के प्रदेश अध्यक्ष रमेशचन्द्र सेन और संभागीय अध्यक्ष प्रवीण प्रजापति भी मौजूद थे।  

 

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