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हिंदी सदैव कमज़ोर मनुष्य का पक्षधर रही है

September 10, 2014

चीन में सम्पन्न नौवाँ अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन पर दिनेश माली की रिपोर्ट  

भुवनेश्वर । हिंदी संस्कार की भाषा है, विकार की नहीं । हिंदी स्वविस्तार नहीं, विश्वविस्तार की भाषा है । वह समूचे संसार में एकमात्र ऐसी भाषा है जो विश्वबंधुत्व, और विश्वकल्याण की वकालत करती रही है ।

हिंदी का मूल चरित्र में कमज़ोर से कमज़ोर मनुष्य की पक्षधरता के साथ उसका संघर्ष और वर्चस्ववादी ताक़तों का प्रतिरोध रहा है । यह लोक और भक्तिकाल से लेकर अधुनातन साहित्य में प्रतिबिंबित होता है। यह कहना था हिंदी के जाने-माने आलोचक डॉ. खगेन्द्र ठाकुर का, जो साहित्य, संस्कृति और भाषा की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका सृजनगाथा डॉट कॉम द्वारा 20 से 26 अगस्त तक चीन के बीजिंग स्थित होटल टानसुन बिजनेस में आयोजित नौवें  अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में मुख्य अतिथि के आसंदी से संबोधित कर रहे थे।

हिंदी का निवेश हिंदी को समृद्ध बनायेगा – डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अधीन संचालित हिन्दी चेयर के अंतर्गत गुयांगडोंग अंतर्राष्ट्रीय भाषा विश्वविद्यालय,गुयाङ्ग्जाऊ, चीन में पदस्थ हिन्दी के प्रोफेसर डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा ने अपने अध्यक्षीय भाषण में वेबपत्रिका सृजनगाथा डॉट कॉम के संपादक व अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन के समन्वयक डॉ. जयप्रकाश मानस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के उन्नयन, प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे सार्थक प्रयासों की खुले मन से सराहना की और कहा कि देश के साहित्यकारों द्वारा किया जा रहा यह निवेश एक दिन अवश्य हिन्दी को विश्व की सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा की श्रेणी में लाकर खड़ा करेगी ।

हिंदी चीन की दूसरी भाषा – पियोंग किपलिंग

बीजिंग विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका पियोंग किपलिंग ने हिन्दी को चीन की दूसरी भाषा कहकर भारत सरकार के केंद्रीय हिन्दी निदेशालय के इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रंजना अगरड़े (अहमदाबाद), वरिष्ठ कवि-कथाकार उद्भ्रात (दिल्ली), हिंदी अकादमी के पूर्व सदस्य गिरीश पंकज (रायपुर), वरिष्ठ हिंदी लेखिका डॉ. बी. वै. बललिताम्बा (कर्नाटक), अंगरेज़ी के सुपरिचित हस्ताक्षर डॉ. धरणीधर साहू (भुवनेश्वर), सुपिरिचत दलित कवि असंग घोष(जबलपुर),  वरिष्ठ लघुकथाकार डॉ. जसवीर चावला ( चंडीगढ़), उत्तरप्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ रचनाकार महेश चंद्र द्विवेदी ( लखनऊ) आदि वरिष्ठ रचनाकारों ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में भी सम्मेलन को संबोधित किया ।

समारोह के आरंभ में राजभाषा प्रचार समिति वर्धा के कार्यकारिणी सदस्य सेवाशंकर अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया और इस संस्थान द्वारा पूर्व में रायपुर, थाइलेंड, मारीशस, उज्बेकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और श्रीलंका में आयोजित आठ अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलनों की गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला । भोपाल के युवाछात्र निमिष श्रीवास्तव ने उद्घाटन अवसर पर सांगीतिक प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। डॉ. जे. आर. सोनी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ प्रथम सत्र समाप्त हुआ ।

7 साहित्यकारों का अलंकरण

अलंकरण सत्र में वेब पोर्टल सृजन गाथा डॉट कॉम द्वारा पिछले आठ  वर्षों से कला, साहित्य, संस्कृति और भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली युवा विभूतियों को सम्मानित करने के तारतम्य में कथा लेखन के लिए भिलाई के ख्यात कथाकार लोकबाबू को लाईफ टाईम अचीवमेंट सम्मान, भोपाल के युवा कथाकार राजेश श्रीवास्तव, साहित्यिक पत्रकारिता के लिए प्रवासी संसार के संपादक दिल्ली के राकेश पांडेय, शोधपरक आदिवासी साहित्य सृजन के लिए डिडौंरी, मध्यप्रदेश के डॉ. विजय चौरसिया, अनुवाद के लिए तालचेर, ओड़िशा के दिनेश कुमार माली व भुवनेश्वर की कनक मंजरी साहू तथा कविता लेखन के लिए दुर्गापुर की डॉ बीना क्षत्रिय को 11-11 हजार रुपए की नकद धनराशि, प्रशस्ति पत्र, शाल व श्रीफल प्रदान कर संस्था के सर्वोच्च सम्मान ‘सृजनगाथा सम्मान-2014’ से सम्मानित किया गया ।

प्रतिभागियों द्वारा डॉ॰जय प्रकाश मानस का सम्मान

डॉ जय प्रकाश मानस को अनवरत नौ अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन के सफल आयोजन, नवोदित रचनाकारों को लेखन कर्म आगे लाने के प्रोत्साहनस्वरूप किए जा रहे स्वैच्छिक सार्थक प्रयासों एवं हिन्दी साहित्य में अतुलनीय योगदान के लिए सभी प्रतिभागियों की ओर से श्रीमती झिमली पटनायक और श्री सेवा शंकर अग्रवाल ने शाल व श्रीफल प्रदान कर  सम्मानित किया। 

15 कृतियों का विमोचन

सम्मेलन के उद्घाटन एवं रचनाकारों के अंलकरण के पश्चात विमोचन समारोह में डॉ जसवीर चावला की लघुकथा संग्रह ‘शरीफ़ जसवीर’, डॉ विजय कुमार चौरसिया की शोधपरक पुस्तक ‘प्रकृतिपुत्र : बैगा’, उद्भ्रांत का आलोचना संग्रह ‘मुठभेड़’, डॉ. राजेश श्रीवास्तव का कहानी संग्रह ‘इच्छाधारी लड़की’, डॉ जे. आर. सोनी की पुस्तक ‘दीवारें बोलती हैं’, गिरीश पंकज का उपन्यास ‘गाय की आत्मकथा’, दुर्गापुर की बीना क्षत्रिय का कविता संग्रह ‘एहसास भरा गुलाल’, डॉ जय प्रकाश मानस का कविता संग्रह ‘विहंग’, दिनेश कुमार माली की अनूदित पुस्तक ‘ओड़िया भाषा की प्रतिनिधि कहानियाँ’मथुरा कलौनी की नाट्य कृति 'कब तक रहे कुँवारे', श्रीमती नीरजा द्विवेदी का बाल कथा संग्रह ‘आलसी गीदड़’ का विमोचन किया गया । इसके अतिरिक्त पत्रिकाओं में कृष्ण नागपाल द्वारा संपादित दैनिक ‘राष्ट्र (विशेषांक)’, डॉ सुधीर शर्मा द्वारा संपादित त्रैमासिक पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ मित्र’, गिरीश पंकज की पत्रिका ‘सद्भावना दर्पण’,राजेश मिश्रा की पुस्तिका ‘चुनौती: क्राइम रिपोर्टिंग की’, धनराज माली द्वारा संपादित सामाजिक पत्रिका ‘माली दर्शन’ के विमोचन के साथ-साथ डॉ. राजेश श्रीवास्तव/डॉ.सुधीर शर्मा द्वारा संपादित सम्मेलन स्मारिका ‘चीन में हिन्दी’ का भी लोकार्पण हुआ ।

हिंदी का बाज़ार : बाज़ार की हिंदी

9 वें अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘हिन्दी का बाजार : बाजार की हिन्दी’ विषय पर डॉ नैना डेलीवाला(अहमदाबाद), डॉ. सूरज बहादूर थापा (लखनऊ), राजेश मिश्रा (रायपुर), विजय कुमार चौरसिया (डिंडौरी), राजेश्वर आनदेव (छिंदवाड़ा), डॉ. धीरेन्द्र शुक्ल (भोपाल), राकेश अचल (ग्वालियर), डॉ. जे. आर. सोनी (रायपुर) ,निमिष श्रीवास्तव व सारांश शुक्ला (भोपाल) आदि ने अपने अपने शोध पत्रों का वाचन किया । संगोष्ठी के अध्यक्षा थीं डॉ. मीनाक्षी जोशी (भंडारा) और विशिष्ट अतिथि थे गिरीश पंकज, मेजर धीरेन्द्र शुक्ल, डॉ राजेश श्रीवास्तव और राकेश पाण्डेय । इस सत्र का संचालन मिजोरम के डॉ. संजय कुमार ने किया ।

एक मदारी भूखा प्यासा नाचे बंदर बाबूजी

दूसरे दिन आयोजित तीसरे सत्र  में कथा, लघुकथा, गीत, ग़ज़ल, कविता, अनुदित रचना पर आधारित अंतरराष्ट्रीय रचना पाठ की अध्यक्षता जबलपुर के वरिष्ठ कवि असंगघोष ने की , जिसमें मुख्य अतिथि श्री लोकबाबू तथा विशिष्ट अतिथि कृष्ण नागपाल व सुदर्शन पटनायक थे । कविता पाठ में जय प्रकाश मानस की मर्मस्पर्शी कविता ‘एक मदारी भूखा प्यासा नाचे बंदर ....’ तथा उनके ही मधुर स्वर में असंगघोष की कविता ‘अरे ओ कनखजूरे !.....’ ने सारे श्रोताओं की वाहवाही लूटी । अन्य कविताओं में सारांश शुक्ल की ‘हिन्दी है अभिमान हमारा’, राकेश पाण्डेय की ‘नोट से निकलो गांधी', डॉ सुधीर शर्मा की 'घड़ी', उद्भ्रांत की 'अधेड़ होती औरत', सीताकान्त महापात्र व रमाकान्त रथ की दिनेश कुमार माली द्वारा अनूदित कविता ‘ओड़िशा’, गिरीश पंकज की ‘माँ’, डॉ. खगेन्द्र ठाकुर की ‘काला हूँ मैं’, राजेश श्रीवास्तव की ‘चिड़िया’ रवीन्द्र उपाध्याय की ‘मन’’डॉ मीनाक्षी की कविता "आज के दौर में "  के साथ-साथ डॉ रंजना अरगड़े, महेशचन्द्र द्विवेदी, सुदर्शन पटनायक धीरेन्द्र शुक्ल की कविताओं ने उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों को भावों के कई आयामों से जोड़ा । इसके अलावा झिमली पटनायक का ''जगन्नाथ संस्कृति का महत्त्व', डॉ चौरसिया का ‘लक्ष्मण द्वारा रावण की बेटी का हरण’, मथुरा कलौनी का नाटयांश ‘तू नहीं और सही’ तथा कहानी पाठ में  डॉ. राजेश श्रीवास्तव की ‘इच्छाधारी लड़की’, लोकबाबू की कहानी ‘जश्न’और श्रीमती नीरजा द्विवेदी की अपनी कहानी का पाठ किया । सत्र का संचालन ख्यात शायर मुमताज़ ने किया । अंत में हिंदी सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों को गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, छत्तीसगढ़ की ओर से प्रशस्ति-पत्र व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया ।

लुशून के घर पहुँचे प्रेमचंद के अनुयायी

अपनी सात दिवसीय साहित्यिक यात्रा के दौरान सृजनगाथा डॉट कॉम की टीम ने चीन के बीजिंग व शंघाई शहर के मुख्य पर्यटक, ऐतिहासिक व उत्कृष्ट तकनीकी सम्पन्न स्थलों जैसे यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर चीन की दीवार, ओलंपिक नेशनल स्टेडियम, विश्व के सबसे बड़े चौक थ्येनमान स्क्वेयर, वर्ल्ड फानेंशियल हब, दुनिया की तीव्रतम ट्रेन मेगलेव, नेशनल म्यूजियम, एक्रोबेटिक शो, विश्वप्रसिद्ध चीनी कवि लुशून का शंघाई वाला घर व म्यूजियम, जेड बुद्ध मंदिर, हुयांगपू रिवर क्रूस, जिंटयांडी का रात्रिकालीन सांस्कृतिक प्रोग्रामों के अतिरिक्त नांजिंग रोड,किपू रोड, युआन गार्डन की दुकानों ,चीन सरकार द्वारा संचालित सिल्क फैक्टरी व बम्बू द्वारा निर्मित वस्त्रों के शोरूम का सांस्कृतिक और अकादमिक अध्ययन अवलोकन किया ।

नौवें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन को सफल बनाने में छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वैभव प्रकाशन, प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी सहित राजश्री झा, डॉ. किशोरी शुक्ला, श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव , प्रवति दास, आर्यकांत पटनायक, सुश्री स्मार्की पटनायक,नरेन्द्र दास, माया उपाध्याय, रिक्की मल्होत्रा की विशिष्ट भूमिका रही । इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों बिहार, उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओड़िशा,पंजाब, पश्चिमबंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व चीन से पधारे शताधिक हिंदी के आधिकारिक विद्वानों, अध्यापकों, लेखकों, भाषाविदों, पत्रकारों, टेक्नोक्रेटों एवं अनेक हिंदी प्रचारकों ने भाग लिया । 

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