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'किसलय' के बहाने संभावनाओं की तलाश

बगहा/ गोपाल सिंह नेपाली की काव्यभूमि और वाल्मीकि की तपोभूमि बगहा में नवोदित साहित्यकारों ने मिलकर एक साहित्यिक क्लब का गठन किया। इस क्लब के गठन के निमित्त साहित्यकार सौरभ के.स्वतंत्र के द्वारा नवोदित साहित्यकारों को बैठक के लिये आहूत किया गया।

बैठक में नवोदित साहित्यकार अविनाश कुमार पांडेय, देवीदत्त मालवीय, कामरान अजीज, राकेश सिंह, अब्दुल गफ्फार, चंद्रभूषण शांडिल्य, सौरभ सतर्ष, राजकिशोर यादव समेत साहित्यप्रेमी निरंजन, राशीद, रवीश कुमार आदि उपस्थित रहें। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बगहा में नवोदित साहित्यकारों के लिए एक क्लब बनाई जाए जिसका नाम 'किसलय' होगा। किसलय साहित्यिक क्लब को संभावनाओं की तलाश के लिए समर्पित किया गया।

इस क्लब के संयोजक के रूप में सौरभ के.स्वतंत्र को सर्वसम्मति से चुना गया, अविनाश कुमार पांडेय को सचिव, देवीदत्त मालवीय को कोषाध्यक्ष, सौरभ सतर्ष को सोशल मीडिया प्रभारी चुना गया।  सभी संस्थापक सदस्यों ने निर्णय लिया कि किसलय की हर माह एक गोष्ठी होगी जिसमें सभी नवोदित साहित्यकार अपनी नवीन रचना पढ़ेंगे और किसी एक साहित्यकार की रचना को पढ़कर आएंगे। वही हर वर्ष 23 अक्टूबर को स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। विदित हो कि किसलय नाम से नवोदितों की रचनाओं का एक संग्रह भी हर वर्ष प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से बगहा जहाँ एक तरफ साहित्यिक सन्नाटा टूटा है वही नवोदित साहित्यकारों में उम्मीद की किरण भी जगी है।

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