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अंतरिम स्थगन आदेश की अवहेलना करनेवाले बिहार सरकार के पदाधिकारियों के विरूद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की प्रार्थना

मन्टू शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से की प्रार्थना, सुनवाई की संभावित तारीख 01 जुलाई मुकर्रर

दो सौ करोड़ दैनिक हिन्दुस्तान सरकारी विज्ञापन घोटाला मामला

श्रीकृष्ण प्रसाद / नई दिल्ली। विश्वस्तरीय चर्चित  200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान सरकारी विज्ञापन घोटाले से जुड़े फौजदारी मुकदमे में प्रमुख अभियुक्त शोभना भरतीया की ओर से दर्ज ‘स्पेशल लीव पीटिशन ।क्रिमिनल। ‘संख्या- 1603 । 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की संभावित तारीख 01 जुलाई 2016 मुकर्रर की है । 08 जून, 2016 को सुप्रीम कोर्ट की वेवसाइट ने तारीख की तिथि अपडेट की है। इंडिया के बिहार के मुंगेर जिले के कोतवाली  थाना में दर्ज प्राथमिकी , जिसकी संख्या-445। 2011, दिनांक 18 नवंबर 2011है, धारा 8-बी।14।15 प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आव् बुक्स एक्ट्, 1867 और धारा 420।471 ।476 भारतीय दंड संहिता, में मेसर्स हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह । प्रधान कार्यालय- 18।20, कस्तुरवा गांधी मार्ग, नई दिल्ली है। की अध्यक्ष शोभना भरतीया, प्रधान संपादक शशि शेखर। नई दिल्ली।, कार्यकारी संपादक ।पटना संस्करण। अक्कू श्रीवास्ताव, स्थानीय संपादक ।भागलपुर संस्करण। बिनोद बन्धु और मुद्रक और प्रकाशक , मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया लिमिटेड, लोअर नाथनगर, परवत्ती, भागलपुर। अमित चोपड़ा नामजद अभियुक्त हैं ।

इस बीच, बिहार सरकार की ओर से मुंगेर जिला मुख्यालय के परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक कृष्ण मुरारी प्रसाद ने 06नवंबर, 2005 को ‘काउन्टर ऐफिडेविट‘ जमा कर दिया है । पीटिशनर शोभना भरतीया ने भी अपना ‘रिज्वाईंडर‘ भी दाखिल कर दिया है । 

 इस बीच, दो सौ करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान सरकारी विज्ञापन घोटाला कांड के सूचक मन्टू शर्मा ।मुंगेर,बिहार।, जो सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल  लीव पीटिशन ।क्रिमिनल। नं0-1603। 2013 मेंरिस्पान्डेन्ट नं0-02 हैं, की ओर से बिहार के मुंगेर के वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने 18 अप्रैल, 2016 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टी0एस0ठाकुर के समक्ष उपस्थित होकर ‘स्पेशल मेंशन‘ कर  बिहार सरकार के ‘काउन्टर- ऐफिडेविट‘ और पीटिशनर शोभना भरतीया के ‘ रिज्वाईंडर‘  का ‘ रिप्लाई‘ जमा करने की अनुमति देने की प्रार्थना कीं । मुख्य न्यायाधीश टी0एस0ठाकुर की अनुमति के बाद अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में रिस्पान्डेन्ट मन्टू शर्मा की ओर से   ‘रिप्लाई‘ जमा कर दिया ।

मुंगेर कोतवाली  थाना कांड संख्या- 445। 2011 के सूचक मन्टू शर्मा ने रिप्लाई -01 में सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि ‘‘  सुप्रीम कोर्ट ने 05 मार्च, 2013 को पीटिशनर शोभना भरतीया की ओर से दायर एस0एल0पी0।क्रिमिनल। नं0-1603। 2013 में निम्नलिखित स्थगन आदेश पारित किया था:-   ‘‘ अगले आदेश तक  प्राथमिकी संख्या- 445। 2011, दिनांक 18 नवंबर, 2011 , धारा 8-बी0।14।15 प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आव् बुक्स एक्ट, 1867 और धारा 420।471। 476 भारतीय दंड संहिता में आगे की कानूनी काररवाई पर अंतरिम स्थगन रहेगा ।‘‘

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम स्थगन आदेश के बावजूद बिहार सरकार । रिस्पान्डेन्ट नं0-01।  ने मुकदमे के पीटिशनर शोभना भरतीया को मदद करने के इरादे से पुलिस अनुसंधान पुनः शुरू कर दिया  और सुप्रीम कोर्ट के 05 मार्च, 2013 के अंतरिम स्थगन आदेश की न केवल अवहेलना की ,वरन् कलंकित करने का काम किया जबकि पीटिशनर शोभना भरतीया  मुंगेर के कोतवाली कांड संख्या- 445।2011, धारा 8-बी0।14।15 प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आव् बुक्स एक्ट, 1867 और धारा 420।471।476 भारतीय दंड संहिता में प्रमुख नामजद अभियुक्त हैं ।

रिस्पान्डेन्ट नं0-02  मन्टू शर्मा ने अपने रिप्लाई में सुप्रीम कोर्ट को  आगे बताया कि   ‘‘ मुंगेर के पूर्व पुलिस अधीक्षक वरूण कुमार सिन्हा ने वर्ष 2015 में 06 अगस्त को कासिम बाजार थाना के पुलिस इंस्पेक्टर के माध्यम से कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 के सूचक मन्टू शर्मा को ‘पुलिस  नोटिस‘ लिखित रूप में जारी किया और उसी दिन अर्थात 06 अगस्त , 2015 को पुलिस अधीक्षक।मुंगेर। के समक्ष 10 बजकर 45 मिनट दिन में उपस्थित होने और कोतवाली कांड संख्या-445। 2011 मेंअपना पक्ष रखने का आदेश जारी किया । ‘पुलिस नोटिस‘ में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि उपस्थित नहीं होते हैं, तो यह  समझा जायेगा कि आपको इस संबंध में कुछ भी नहीं कहना है ।‘‘

रिस्पान्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा ने अपने रिप्लाई मेंसुप्रीम कोर्ट को आगे बताया है कि ‘‘ पुलिस -नोटिस मिलने के बाद रिस्पान्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा अपने अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद के साथ 2015 में 06 अगस्त को 10 बजकर 45 मिनट में दिन में पूर्व पुलिस अधीक्षक वरूण कुमार सिन्हा के समक्ष उपस्थित हुए और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम  स्थगन आदेश को दिखाया और इस मुकदमे में तुरंत आगे के पुलिस अनुसंधान को रोकने का अनुरोध किया। परन्तु, प्रयास निष्फल रहा। ‘‘

तत्कालीक पुलिस अधीक्षक ।मुंगेर। वरूण कुमार सिन्हा ने सूचक मन्टू शर्मा के अनुरोध को ठुकरा दिया और इस मुकदमे में पुनः पुलिस अनुसंधान शुरू कर दिया  और पीटिशनर शोभना भरतीया को मदद करने के लिए काल्पनिक साक्ष्यों को एकत्रित किया जो मुंगेर के परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक ।मुख्यालय। के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में 06 नवंबर, 2015  को समर्पित ‘काउन्टर-ऐफिडेविट‘ में स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है । 

मुंगेर के तात्कालीक पुलिस अधीक्षक वरूण कुमार सिन्हा,जो प्रोन्नति पाकर वर्तमानमें मुंगेर प्रमंडल के कार्यकारी  आरक्षी उप-महानिरीक्षक हैं, के कार्य काफी अवज्ञापूर्ण हैं। कोई शंका  नहीं है कि पुलिस अधीक्षक स्तर के एक अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना  और निरादर का दुस्साहस  बिहार सरकार के मुख्य सचिव या गृह सचिव या पुलिस महानिदेशक के निर्देश के बिना नहीं कर सकते हैं।

रिस्पान्डेन्ट मन्टू शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में बिहार सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को मुकदमे की अगली तिथि को सशरीर उपस्थित होने और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम स्थगन आदेश की अवहेलना करने और  पीटिशनर शोभना भरतीय को मदद करने के लिए  कोतवाली ।मुंगेर। कांड संख्या- 445। 2011  में पुनः पुलिस अनुसंधान शुरू करने का दुस्साहस करने के लिए कारण-पृच्छा पूछने की प्रार्थना की है ।

रिस्पान्डेन्ट नं0-.2 मन्टू शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना की है कि ‘‘ सुप्रीम कोर्ट बिहार सरकार ।रिस्पान्डेन्ट नं0-01। की ओर से समर्पित ‘काउन्टर-ऐफिडेविट‘ के पैरा 06, 07,08,09,10 ,11 और 13 में आए नए तथ्यों और अनुरोधों को रद्द करने की कृपा करें क्योंकि नए तथ्य और अनुरोध नीचे की अदालत ।पटना उच्च न्यायालय। में उपस्थित नहीं किए गए थे । बिहार सरकार के काउन्टर-ऐफिडेविट  में जो तथ्य तोड़-मरोड़कर पेश किए गए हैं और मनगढ़ंत बातों को लाया गया है,वह सभी पुनः शुरू किए गए पुलिस अनुसंधान का परिणाम हैं जो मुंगेर के तात्कालीक पुलिस अधीक्षक वरूण कुमार सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम स्थगन आदेश की अवहेलना कर शुरू किया था । 

रिस्पान्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट सेसुप्रीम कोर्ट के अंतरिम स्थगन आदेश की अवहेलना और अनादर करनेवाले बिहार सरकारके  पदाधिकारियों के विरूद्ध समुचित कानूनी काररवाई करने और  सजा देने की भी प्रार्थना की है ।

मुकदमा क्या है? 

बिहार के मुंगेर के कोतवाली थाना  में सूचक  मन्टू शर्मा ने प्राथमिकी दर्ज की है जिसकी संख्या- 445। 2011 , दिनांक 18 नवंबर, 2011 है । इस प्राथमिकी में  ।1। हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह  की अध्यक्ष  शोभना भरतीया, । 2। दैनिक हिन्दुस्तान के प्रमुख संपादक शशि शेखर, । 3। दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण केकार्यकारी संपादक अक्कू श्रीवास्तव,।4। दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बिनोद बन्धु, ।5।  मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया लिमिटेड के मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा को भारतीय दंड संहिता की धारा 420।471।476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आव् बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8-बी0।14।15 के तहत नामजद अभियुक्त बनाया गया है । मुंगेर कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी में सूचक मन्टू श्र्मा ने आरोप लगाया है कि मेसर्स हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह ।नई दिल्ली। की अध्यक्ष शोभना भरतीया सहित सभी नामजद अभियुक्तोंने प्रेस रजिस्ट्र्ार।नई दिल्ली। से ‘रजिस्ट्र्ेशन‘-सर्टिफिकेट‘ और ‘रजिस्ट्र्ेशन-नम्बर‘ को प्राप्त किए बिना हीं  भागलपुर स्थित नए प्रिटिंग स्टेशन।प्रेस। से अवैध ढंग से दैनिक हिन्दुस्तान का भागलपुर संस्करण और विगत दो वर्षों से दैनिक हिन्दुस्तान का ‘मुंगेर संस्करण‘ मुद्रित, प्रकाशित और वितरित किया । अभियुक्तोंने कुल ग्यारह वर्षों तक भागलपुर स्थित  प्रिंटिंग प्रेस से  अवैध ढंग से दैनिक हिन्दुस्तान का भागलपुर और मुंगेर संस्करणों को मुद्रित, प्रकाशित और वितरित किया और केन्द्र और राज्य सरकारों के समक्ष ‘ वैध संस्करणों‘का दावा ठोक कर विगत 11 वर्षों मेंकेन्द्र और राज्य सरकारों का सरकारी विज्ञापन छापकर केन्द्र और राज्य सरकारों को लगभग दोसौ करोड़रूपए के राजस्व को चूना लगाया ।

सूचक मन्टू श्र्मा ने प्राथमिकी मेंयह भी आरोप लगाया है कि ‘‘अभियुक्तगण दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण का मुद्रण, प्रकाशन और वितरण विगत दो वर्षों से लगातार करते आ रहे हैं, परन्तु उन्होंने मुंगेर के जिला दंडाधिकारी के समक्ष ‘घोषणा-पत्र‘ समर्पित नहीं किया है । अभियुक्तोंने ‘मुंगेर संस्करण‘ का आज तक प्रेस -रजिस्ट्र्ार ।नई दिल्ली। से न तो ‘निबधन-प्रमाण-पत्र‘ और न ही  ‘ निबंधन-संख्या‘  ही प्राप्त किया है,परन्तु अवैध  मुंगेर संस्करण को सरकार के समक्ष ‘वैध संस्करण‘ घोषित कर सरकारी विज्ञापन प्राप्त करते और छापते आ रहे हैं और सरकारी खजाने को लूट रहे हैं ।

सूचक मन्टू शर्मा ने दर्ज प्राथमिकी में आगे आरोप लगाया है कि ‘‘ अभियुक्तोंने दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर और मुंगेर संस्करणों के फर्जीवाड़ा  पर पर्दा डालने के लिए समय-समय पर अखबार के तथ्योंऔर साक्ष्यों  में फेरबदल भी करने का काम किया है ।

अभियुक्तों ने वर्ष 2001  से वर्ष 2011 के 30 जून तक दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर और मुंगेर संस्करणों में अंतिम पृष्ट पर छपने वाले प्रिंट लाइन में जो रजिस्र्ट्ेशन नम्बर - आर0एन0आई0 -44348। 1986 प्रकाशित किया है, वह रजिस्ट्र्ेशन-नम्बर  दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण को प्रेस-रजिस्ट्र्ार।नई दिल्ली। ने वर्ष 1986 में आवंटित किया है । 

अभियुक्तोंने वर्ष 2011 में 01 जुलाई से दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर और मुंगेर संस्करणों के प्रिंट-लाइनों में रजिस्ट्र्ेशन नम्बर के स्थान पर  ‘आवेदित‘ छापना शुरू किया है । इस प्रकार, अभियुक्तोंने  खुद कागजी तौर पर प्रमाणित कर दिया हैकि अभियुक्तगण  वर्ष 2001 से वर्ष 2011के 30 जून तक भागलपुर के प्रिंटिंग प्रेस से जिस दैनिक  हिन्दुस्तान के भागलपुर और मुंगेर संस्करणों का मुद्रण, प्रकाशन और वितरण करते आ रहे हैं, दोनों संस्करण ‘अवैध‘ और ‘फर्जी‘ हैं।‘‘ 

सूचक मन्टू शर्मा ने प्राथमिकी में प्रेस रजिस्ट्र्ार।नई दिल्ली। के कार्यालय का सरकारी‘पत्र भी संलग्न किया है जिसमें पुष्टि की गई है कि  वर्ष 2006 तक प्रेस रजिस्ट्र्ार  कार्यालय।नई दिल्ली।  के पास दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण के अलावा बिहार के किसी भी संस्करण के निबंधन के कागजात  उपलब्ध नहीं हैं । साथ में, बिहार सरकार के वित्त विभाग के वित्त अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या- 195।2005-06 में भी भागलपुर के प्रिंटिंग प्रेस से दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध संस्करण के प्रकाशन को उजागर किया गया है । इस वित्त अंकेक्षण प्रतिवेदन को भी प्राथमिकी में साक्ष्य के रूपमें संलग्न किया गया है । 

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