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खुलेगा न्यूजरूम की गर्मा-गर्म डिबेट का सच

लखनवी अदा में निखरेगा दैनिक जागरण संवादी का पांचवां संस्करण

लखनऊ/ दैनिक जागरण ‘संवादी’ का पांचवां संस्करण संगीत नाटक अकादेमी, गोमती नगर में 30 नवंबर से 2 दिसम्बर को होने जा रहा है| तीन दिवसीय अभिव्यक्ति के इस उत्सव में सिर्फ साहित्य पर ही नहीं राजनीति, संगीत, खान-पान, न्यूजरूम ड्रामा, धर्म, देश-भक्ति, पर्यावरण इत्यादि के साथ #मीटू जैसे अहम् मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा होने वाली है|

इस वर्ष के प्रमुख वक्ताओं में मुजफ्फर अली, विलायत जाफरी, सोनल मानसिंह, शोभा डे, किश्वर देसाई, विश्वनाथ तिवारी, जे. नंदकुमार, शाजिया इल्मी, मैत्रयी पुष्पा, मालिनी अवस्थी, फरंगी महली, यतीन्द्र मिश्र, सूर्यबाला, पुष्पेश पन्त इत्यादि शामिल हैं|

पूरी तरह से निशुल्क इस आयोजन में श्रोताओं को अपने क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों को सुनने का मौका मिलेगा, साथ ही पुस्तक लोकार्पण, दास्तानगोई, मुशायरा और लखनवी लजीज व्यंजनों का भी लुत्फ़ उठा सकेंगे|

बीते वर्षों की ही तरह इस बार भी संवादी अपने बहुरंगी कार्यक्रमों के साथ उपस्थित है| जिसमें समाज में व्याप्त प्रत्येक समकालीन मुद्दे को उठाने और उस पर पक्ष और विपक्ष, दोनों ही तरह के नजरियों को समझने की कोशिश की जाएगी| “आप लड़ते क्यों हैं?”, “राष्ट्रवाद और देशभक्ति का चक्रव्यूह”, “समय के साथ संघ” जैसे सत्रों में आधुनिक युवाओं की नज़र में राजनीति, न्यूजरूम ड्रामा और विशेष रूप से बनाये जाने वाले ‘मुद्दों’ पर चर्चा की जाएगी|

समकालीन मुद्दों पर धारदार बना देने वाली लोकप्रिय लेखिका, शोभा डे “पोलिटिकली इन्करेक्ट” सत्र में अपनी बात रखेंगी|

साहित्य तो अभिव्यक्ति का सबसे दमदार माध्यम रहा ही है| संवादी में भी साहित्य पर कई महत्वपूर्ण सत्रों का आयोजन किया गया है, जिनमें से प्रमुख हैं “दलित साहित्य की चुनौतियाँ”, “इतिहास लेखन: कितना मिथक, कितना यथार्थ”, “भारतीय रोमांस”, “साहित्य में रिश्ते”, “जो बिकता है, वो छपता है, क्यों?” इत्यादि|

लखनऊ की नवाबी हवा को “दास्तानगोई”, “मुशायरा” और संगीत पर आधारित कुछ और दिलचस्प सत्रों के माध्यम से और भी ख़ास बनाया जायेगा| “दास्तानगोई” में चंद्रकांता के चिरयुवा किस्से को जबरदस्त अंदाज में पेश करेंगे हिमांशु बाजपेयी और रजनी चांदीवाल| “मुशायरा” में नवाज देवबंदी, शीन काफ निज़ाम, मंजर भोपाली, अना देहलवी जैसे मशहूर शायर कार्यक्रम में चार चाँद लगायेंगे|

“लखनऊ का खाना” सत्र में विशेष रूप से लखनऊ के लजीज व्यंजनों की बात की जाएगी| इसी के साथ पुस्तक-विमोचन, कविता पाठ, खेल, सिनेमा, कॉमेडी की भी भरमार होगी|

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