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दैनिक हिन्दुस्तान और प्रभात खबर में प्रतिदिन मालिक का नाम न छापने के मामलों में हुई सुनवाई

मुंगेर। जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी को दैनिक प्रभात खबर और दैनिक हिन्दुस्तान के मालिक एवं अन्य के विरूद्ध विधिमान्य कार्रवाई का आदेश जारी किया। लोक प्राधिकार ने न्यायालय का आदेश मामने से इन्कार किया।

बिहार के मुंगेर जिले के जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जैनेन्द्र कुमार ने 23 मार्च को अपने फैसले में लोक प्राधिकार सह जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी के. के. उपाध्याय को परिवादी श्रीकृष्ण प्रसाद ( अधिवक्ता) के परिवाद, जिसकी परिवाद संख्या -424110102011700303 और 424110107011700311 है, में 15 दिनों के अन्दर निवारण प्रतिवेदन प्रतिवादी को उपलब्ध कराते हुए इसकी सूचना न्यायालय को समर्पित करने का आदेश पारित किया । परिवाद का निवारण न होने की स्थिति में परिवादी श्रीकृष्ण प्रसाद इस अधिनियम अन्तर्गत प्रथम अपील दायर कर सकते हैं ।

न्यायालय ने अपने अलग- अलग आदेश में लिखा है कि ‘‘ यह परिवाद दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक प्रभात खबर के प्रकाशन से जुड़ा है । परिवादी श्रीकृष्ण प्रसाद का कहना है कि अखबारों के मालिक का नाम ‘‘ द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 5 (1)  के अन्तर्गत प्रतिदिन अखबार में प्रकाशित नहीं हो रहा है । परिवादी लोक प्राधिकार से अपेक्षा करता है कि  ‘‘ द प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 5(1) के उल्लंघन के आलोक में धारा 15 के तहत संबंधित अखबार के मालिक और अन्य संबंधितों पर विधिमान्य कार्रवाई  करें । ‘‘

परिवादी ने अपने परिवाद में अखबार के मालिक, प्रकाशक, मुद्रक, क्षेत्रीय संपादक और मुंगेर कार्यालय के प्रभारी के विरूद्ध पी. आर. बी.  एक्ट की धारा 15 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की थीं ।

लोक प्राधिकार ने बिहार सरकार के अधिनियम को मानने से किया इन्कार:  जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि ‘‘ लोक प्राधिकार सह जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी ने अपने अंतिम प्रतिवेदन में लिखा है कि यह परिवाद उनके कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत नहीं है जबकि यह परिवाद इस अधिनियम के अन्तर्गत सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग  की विषय-संख्या -07 में अंकित विषय के आलोक में कार्रवाई हेतु सूचीबद्ध है ।विभाग के स्तर से जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी ही लोक प्राधिकार बनाए गए हैं । इस आलोक में परिवाद में अंकित तथ्यों का निवारण प्रतिवेदन उनसे अप्राप्त है ।

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