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पटना पुस्तक मेला 4 फरवरी से

January 20, 2017

इस बार पुस्तक मेला का थीम है" कुशल युवा, सफल बिहार"  

साकिब ज़िया /पटना/  बिहार के पुस्तक प्रेमियों का पसंदीदा पटना पुस्तक मेला का जल्द ही शुभारंभ होने वाला है । राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में इस मेला का आयोजन 4फरवरी से 14फरवरी तक किया जाएगा। पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में संस्था, सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट, सीआरडी के अध्यक्ष रत्नेश्वर ने बताया कि इस बार के पुस्तक मेला का थीम है" कुशल युवा, सफल बिहार"। उन्होंने बताया कि इस बार पुस्तक मेला में लगभग दो सौ पचास प्रकाशकों के भाग लेने की संभावना है।                      

किताबों के इस मेला में अभिनव कार्यक्रमों का समावेश किया गया है। स्कूली बच्चों के लिए विविध प्रतियोगिताएं, कार्यशाला, निबंध लेखन,  पेंटिंग, वाग्मिता(इलॉक्यूशन)  और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। कार्यशाला में  गीतकार राजशेखर तथा कथाकार चिल्ड्रेन बुक ट्रस्ट की सुमन वाजपेयी अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस बार बच्चों के लिए कहानी पाठ की श्रृंखला में 'बच्चे जैसे कथा-कहानी' कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें अलग-अलग स्कूलों के शिक्षक कहानी सुनाएंगे।'नई किताब' कार्यक्रम में देश के लेखकों द्वारा लिखी पुस्तकों पर परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। इसमें चर्चित लेखक और पत्रकार शाज़ी ज़मा, यतींद्र मिश्र, कथाकार अवधेश प्रीत और शिवदयाल आदि भाग लेंगे। इसी तरह कवियत्रियों को समर्पित विशेष कार्यक्रम 'नई कलम' का आयोजन होगा। मेला के अन्य कार्यक्रमों यथा 'जनसंवाद'  और 'कॉफी हाउस' में प्रतिष्ठित लेखक, पत्रकार, कवि एवं कथाकारों को आमंत्रित किया गया है। जनसंवाद में चर्चित कथाकार उदय प्रकाश, नरेंद्र कोहली आदि भाग लेंगे। इसी प्रकार कॉफी हाउस के दौरान मशहूर लेखिका पद्मश्री उषा किरण खान से बातचीत का आयोजन किया जायेगा। बीते वर्ष पुस्तक मेला में  'मेक इंन इंडिया'  भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। इसी को ध्यान में रखते हुए  इस साल देश भर के 20 से भी अधिक लोक कलाकार अपनी खास कलाकृतियों के साथ मेला को और आकर्षक बनाएंगे। इसके अलावा साहित्य,  पत्रकारिता, रंग कर्म और कला के क्षेत्र में बेहतर योगदान देने वाले प्रदेश के लोगों को भी हर वर्ष की भांति विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही इस साल से साहित्य एवं संस्कृति में विशेष योगदान के लिए 'विशिष्ट कला संस्कृति सम्मान'  भी देने की शुरुआत की जायेगी। 

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