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पायरेसी से निपटने के लिए फोटो पत्रकारों को कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिएः न्यायमूर्ति सतशिवम

March 25, 2014

भारत के प्रधान न्यायाधीश ने तीसरे राष्ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्कार प्रदान किये, राजेश बेदी को लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार, 13 अन्य फोटो पत्रकार भी पुरस्कृत

नई दिल्ली। भारत के प्रधान न्यायाधीश श्री पी.सतशिवम ने कल नई दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया सेंटर में जाने माने फोटो पत्रकारों को तीसरे राष्ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्कार से सम्मानित किया। प्रधान न्यायाधीश ने जाने-माने छायाकार श्री राजेश बेदी को लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया। 13 अन्य फोटो पत्रकारों को भी पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर न्यायमूर्ति सतशिवम ने कहा कि फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में पायेरेसी को देखते हुए पेशेवर छायाकारों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉपी राइट सुरक्षा की व्यवस्था है लेकिन फोटो पत्रकारों के लिए यह आवश्यक है कि वे अतिक्रमण के मामलों में अपने अधिकारों को जताने के लिए कॉपी राइट का पंजीकरण करवायें। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इससे फोटो पत्रकारों को संभावित अतिक्रमण की जानकारी हासिल करने में आसानी होगी और वह अपने सृजनात्मक कार्यों को वैधता भी प्रदान कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि छायांकन अब मानव जीवन का अभिन्न अंग हो गया है और यह अब शानो-शोकत की आदत नहीं रही।

इससे पहले सूचना और प्रसारण सचिव श्री विमल जुल्का ने कहा कि मंत्रालय के फोटो प्रभाग के प्रयासों से छायांकन एक माध्य हो गया है। डिजीटलीकरण एक मान्य तौर-तरीका हो गया है और टेकनॉलाजी ने इस क्षेत्र में प्रेरक तत्व का रूप लिया है। उन्होंने कहा कि आजकल हर एक व्यक्ति के पास कैमरा होता है। लेकिन लेंस का इस्तेमाल करना एक कला है और यह कला कुछ लोगों के पास ही होता है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय का यह प्रयास है कि पुरस्कार के जरिए लोगों में फोटोग्राफी को एक पेशे के रूप में प्रोत्साहित किया जाए।

(PIB)

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