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बी0 पी0 मंडल जयंती समारोह- 2016

समाजिक न्याय के पक्ष में  वक्ताओं ने भरी  हुंकार 

सरस्वती चन्द्र/ कटिहार  गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी सामाजिक न्याय के योद्धा, द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष महामना बी0 पी0 मंडल जी की 99वीं जयंती दिनांक 28 अगस्त 2016 दिन रविवार को कटिहार नगर निगम के नगर भवन में 11 बजे दिन से समारोहपूर्वक मनायी गयी। इस समारोह का आयोजन श्रीकृष्ण आस्था मंच, कटिहार एवं ओ0बी0सी0 रेलवे इम्प्लाइज एसोसिएशन, एन0एफ0 रेलवे, कटिहार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इसमें देश के विभिन्न स्थान से पधारे सामाजिक न्याय के चिंतक, बुद्धिजीवी, मीडियाकर्मी और राजनीतिक मामलों के जानकार वक्ता तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
  

समारोह का उद्घाटन पूर्णिया के माननीय सांसद श्री संतोष कुशवाहा, दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार डाॅ0 उर्मिलेश जी, ज्योतिबा फुले विश्वविद्यालय पूना के प्रोफेसर डा0 हरि नरके, बिहार विधान सभा के पूर्व उपनेता श्री सूर्यनारायण सिंह यादव, कटिहार के पूर्व विधायक श्री सत्य नारायण प्रसाद एवं पटना के युवा पत्रकार श्री निखिल आनन्द जी ने संयुक्त रूप से महामना मंडल जी के चित्र पर माल्यार्पण कर तथा दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
 

समारोह में उपस्थित विद्वान वक्ताओं एवं हाल में उपस्थित ओ0बी0सी0 समर्थक एवं सामाजिक न्याय के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ओ0बी0सी0 रेलवे इम्प्लाइज एसोसिएशन के मंडल सचिव श्री सुबीत कुमार यादव ने प्रत्येक विद्वान का परिचय देते हुए आयोजकों की ओर से स्वागत किया एवं उन्हें माल्यार्पण किया गया। इन्होंने उपस्थित श्रोताओं से अनुरोध किया कि शान्त मन से वक्ताओं को सुने और उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का काम करें। श्रीकृष्ण आस्था मंच की ओर से एन0एफ0 रेलवे के पूर्व राजभाषा अधिकारी श्री लक्ष्मी प्रसाद यादव ने श्रीकृष्ण आस्था मंच की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सामाजिक न्याय के पुरोधा बी0पी0 मंडल जी ने अत्यन्त पिछड़े वर्गों की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाने के लिए जो अनुशंसाएँ की हैं उन्हें पालन करवाने के लिए या प्राप्त करने के लिए अभियान चलाना और सतत जागरूक रह कर संगठन को मजबूत करना है। वर्तमान परिस्थिति में मंच यह अनुभव कर रहा है कि मंच आदिवासी, दलित और पंसमादा मुस्लिम महाज के साथ संयुक्त अभियान चलाने की दिशा में काम करे। इसमें आप सभी लोगों की सहभागिता अपेक्षित है। बिहार मूल निवासी संघ के कोषाध्यक्ष इं0 गिरिजा सिंह ने इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए अपना प्रेरक वक्तव्य दिया; जिसमें उन्होंने अन्य पिछड़े वर्ग की सामाजिक स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि इस समुदाय के आरक्षण पर क्रिमीलेयर लगा कर पिछड़ों को बाँटने का काम किया गया है जो एक षड़यंत्र है, साथ ही, ओ0बी0सी0 की जनगणना नही करवा कर सरकार इनकी हकमारी कर रही है। एस0सी0/एस0टी0 की तर्ज पर ओ0बी0सी0 को प्रोन्नति में आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने ओ0बी0सी0 को सतर्क रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे जागरूक नहीं रहेंगे तो जो भी आरक्षण मिल रहा है वह भी मनुवादी साजिश के कारण अवरूद्ध हो जाएगा। समारोह का संचालन डाॅ0 महेश मंडल जी ने किया।
 

मंच की स्थापना एवं उद्देश्यों की चर्चा के बाद समारोह में विमर्श के लिए रखे गए दो विषयों (1) वर्तमान परिस्थितियाँ और सामाजिक न्याय आन्दोलन की दशा और दिशा तथा (2) शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक न्याय की स्थिति, पर बोलते हुए समारोह के उद्घाटनकर्ता माननीय सांसद श्री संतोष कुशवाहा ने कहा कि पिछड़े वर्ग के लोग लगनशील और काफी मेहनती होते हैं। सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण कार्य वे हजारों वर्षों से करते आ रहे हैं। इसके बावजूद भी आज वे हर क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं, जरूरत है, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की, संसद के अन्दर और बाहर मैं सामाजिक न्याय के मुद्दे को उठाता रहूँगा जिससे पिछड़े वर्गों के आरक्षण में तनिक भी आँच न आ पाये। उन्होंने आगे कहा कि मुझे यह कहने में जरा भी संकोच नहीं है कि मैं अभी नया-नया हूँ और यहाँ आये विद्वानों से कुछ जानकारी ले रहा हूँ, उसके अनुसार मैं आपको यह भरोसा दिला रहा हूँ कि मैं इस दिशा में काम करता रहूँगा, जिससे महामना मंडल जी की अनुशंसाएँ ठीक से लागू हो सकें।
 

इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए समारोह के मुख्य वक्ता भारत सरकार के योजना आयोग के पूर्व सदस्य प्रो0 हरि नरके ने मंडल आयोग की अनुशंसा के अनुसार भारत सरकार के कर्मचारियों के लिए नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि आज तक पिछड़े वर्ग को क्लास 1 नौकरी में मात्र 2.4 प्रतिशत ही आरक्षण मिल पाया है लेकिन भारत सरकार में सभी श्रेणी के 30,58,506 लोग कार्यरत हैं। जिसमें मात्र 4.5 प्रतिशत भागीदारी है। पचीस वर्ष पूर्व दिये गए वचन के अनुसार यदि मंडल कमीशन को शत प्रतिशत लागू किया गया होता तो अन्य पिछड़े वर्ग के बच्चों की सात लाख नौकरी एक दिन में मिली होती। उन्होंने कहा कि शत प्रतिशत मंडल की अनुशंसा को लागू करो और ओ0बी0सी0 के बैकलाग को भी भरो। आगे उन्होंने केन्द्र सरकार के वित्तमंत्री श्री अरूण जेटली जी द्वारा पेश किये गये बजट में साठ करोड़ ओ0बी0सी0 के लिए मात्र एक हजार साठ करोड़ रूपये दिये जाने की आलोचना करते हुए कहा कि साल में प्रति ओ0बी0सी0 को मात्र सोलह रूपये दिया गया है। अब आप सोच लीजिए साल में सोलह रूपये। किन्तु आश्चर्य इस बात पर है कि ओ0बो0सी नेताओं के द्वारा न तो सदन के अन्दर और न सदन के बाहर इस बात पर विरोध जताया गया। वहीं उन्होंने 27 प्रतिशत आरक्षण की माँग करते हुए कहा कि महामना मंडल साहब ने कहा था कि देश की कुल आबादी की 52 प्रतिशत आबादी ओ0बी0सी0 की है। लेकिन भारत सरकार की नेशनल सर्वे 41 प्रतिशत बता रही है। किस आँकड़े को सही माना जाए, जब तक जाति आधारित जनगणना नहीं हो जाती है, तब तक न तो पिछड़े वर्गों को अपनी संख्या का पता चलेगा और न ही उनकी प्रगति और विकास के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार के बजट मंे सही-सही हिस्सेदारी उनके लिए निर्धारित हो सकेगी, आगे उन्होंने कहा कि एस0सी/एस0टी0 को नौकरी मंे प्रोन्नति दिया जा सकता है तो ओ0बी0सी0 को क्यों नहीं ? अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होेंने कहा कि केन्द्र सरकार के अधिकांश मंत्रालयों में ओ0बी0सी0 की संख्या शून्य है जबकि सभी मंत्रालयों में ओ0बी0सी0 की सहभागिता होनी चाहिए। साथ ही, साथ उनका मानना है कि प्रतिवर्ष सरकार को यह रिपोर्ट प्रस्तुत करना चाहिए कि आरक्षण से ओ0बी0सी0 के कितने स्थान भरे गये, कितने खाली हैं। विश्व के दो प्रसिद्ध महाकाव्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने हिस्से के हक के लिए लड़ाई करनी चाहिए क्योंकि रामायण में भी हिस्से की ही लड़ाई थी। जिसके लिए राम को वन जाना पड़ा और कौरव-पाण्डव का युद्ध भी अपने हिस्से के लिए लड़ा गया। हमें भी अपने हिस्से के लिए लड़ाई करने के लिए तैयार होना चाहिए।
 

दिल्ली से आए राज्यसभा चैनेल के पूर्व एक्जीक्यूटिव एडीटर तथा वरिष्ठ पत्रकार डाॅ0 उर्मिलेश जी ने इस चर्चा को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशें दूरदर्शी है जो ओ0बी0सी0 को इतनी ताकत देती हैं कि पिछड़े वर्ग के लोग शिक्षा के क्षेत्र में और सरकारी नौकरियों में अपना हक लेकर सामाजिक रूप से समानता का अनुभाव कर सकते हैं और आर्थिक रूप से सम्पन्न हो सकते हैं किन्तु ब्राह्मणवादी सोच के लोग पिछड़े वर्गों के मार्ग के बाधक बने हुए हैं और आर्थिक आधार पर सवर्णों के लिए आरक्षण की माँग को जब-तब आगे बढ़ाते रहते हैं। आरक्षण लागू होने के इन पचीस वर्षों में भी पिछड़ो को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नही मिल पाया है जो शोचनीय विषय है। ऐसी स्थिति में अब एकमात्र उपाय यही है कि ओ0बी0सी0 के लोग दलित, आदिवासी और  पसमांदा मुसलमानों के साथ मिलकर एक सबल संगठन बनाये और नये सिरे से अभियान शुरू कर मंडल आयोग द्वारा प्रस्तावित सारी अनुशंसाओं को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ें। उनका मानना है कि दलित और पिछड़े वर्ग के लोग छह हजार वर्षों से शोषित रहे तो उन्हें कम-से-कम एक सौ वर्ष तक तो आरक्षण का पूरा लाभ लेने दों। उन्होंने स्मरण कराया कि अगर बाबा साहेब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर संविधान में अनुच्छेद 340 की व्यवस्था नहीं करते तो मंडल आयोग का गठन ही नहीं हो पाता। और अगर डाॅ0 अम्बेडकर नहीं होते तो आज सभी सरकारी कार्यालयों में मनु महाराज की तस्वीर लटकती रहती जैसा कि राजस्थान के उच्च न्यायालय में है। और यह भी कि अगर डाॅ0 अम्बेडकर अंग्रेजी की शिक्षा नहीं ग्रहण किये रहते तो ब्राह्मणवादी सोच के लोग उन्हें इतना आगे बढ़ने नहीं देते, तब प्रजातंत्र का स्वरूप अलग होता। श्री उर्मिलेश जी ने उपस्थित श्रोताओं को याद दिलाया कि समाजवादी चिंतक डाॅ0 लोहिया ने पिछड़ों के हित में बहुत काम किया और यह नारा लगाया कि प्रसोपा ने बाँधी गाँठ पिछड़े पाये सौ में साठ, पर वे भाषा के प्रश्न पर दिग्भ्रमित हो गये और हिन्दी के प्रसार-प्रचार पर जोर देकर पिछड़े को अंग्रेजी पठन-पाठन से विरत कर दिया। फलस्वरूप आज डिजिटल युग में हिन्दी भाषियों के बच्चे पिछड़ गये हैं और सवर्ण मानसिकता के लोग अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा लेकर आगे बढ़ गये। आगे उन्होंने बताया कि अगर हम अंग्रेजी पढ़े होते तो बहुत पहले बाबा साहेब और भगत सिंह को जान पाते तब हमारे विचारों में परिवर्तन हो जाता तथा हम इतने सालों तक उत्पीड़न के शिकार न बने रहते। उन्होंने जाति जनगणना का सवाल उठाते हुए कहा कि यदा-कदा ओ0बी0सी0 के नेता जातीय जनगणना की रिर्पोट सदन के पटल पर रखने या सार्वजनिक करने की माँग करते हैं जो घोर आश्चर्य है, क्योंकि सरकार ने सदन में 2011 की जनगणना के साथ जातीय गणना कराने की माँग को स्वीकार कर ली थी पर वह जनगणना के साथ जातीय जनगणना नहीं करा सकी और इस बात को छिपा रखी, फलतः जातीय जनगणना को सार्वजनिक करने की माँग पर टालमटोल करती है। तथ्य तो यह है कि 1931 के बाद अन्य पिछड़ी जातियों की जनगणना हुई ही नहीं। एस0सी0 और एस0टी0 की जनगणना होती है, गाय-बैल पशुओं और कुत्ता-बिल्ली जानवरों की जनगणना होती है पर पिछड़ी जातियों की ही जनगणना नहीं होती जो इन जातियों के प्रति अन्याय है। इतिहास को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवादी विचारधारा से मुक्त होने के बाद ही सम्राट अशोक अपने शासनकाल में सामाजिक न्याय की नीति को लागू कर सके थे अन्यथा वे पहले मारकाट और युद्ध में व्यस्त थे। तमाम जन कल्याणकारी कार्य उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद किया। आज सामाजिक न्याय के नेता केवल अपने परिवार को बनाने में व्यस्त हैं न कि समाज और देश को। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दुत्व की रट लगाने वाले समाज को टुकड़ों में बाँट देंगे। इनके झाँसे में नहीं आना चाहिए। हिन्दुत्ववाद का मुकाबला भारतवाद से करना चाहिए।
    डाॅ0 उर्मिलेश जी के दिशा बोधक वक्तव्य के बाद पटना के चर्चित युवा पत्रकार श्री निखिल आनन्द जी ने विमर्श को आगे बढ़ाते हुए, आरक्षण मंे ओ0बी0सी0 की, अबतक की स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा कि पचास केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से केवल दो के ही कुलपति ओ0बी0सी0 हैं। लेकिन समाज में समता तथा समानता लाने के लिए सत्ता में भागीदारी की जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि किसी नेता और मंत्री पर भरोसा किये बिना ओ0बी0सी0 अपना गैर राजनीतिक संगठन बनाकर अपना हक ले सकते हैं। चिन्ता का विषय है कि लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक ओ0बी0सी0 के दो सौ से अधिक सांसद हंै किन्तु जब जंतर-मंतर जैसे स्थलों पर ओ0बी0सी0 के हक में कोई कार्यक्रम होता है तो देश के मात्र दो ही सांसद वहाँ पहुँचते हैं। सच तो यह भी है कि नब्बे के बाद के सामाजिक न्याय के जनप्रतिनिधि न तो कुछ जानकारी रखते हैं, न सीखना चाहते हैं, न संगठित होना चाहते हैं। अपनी डफली अपना राग अलग-अलग अलापने में लगे रहते हैं न आवश्यकता यह है कि मंडल आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करवाने के लिए सारी पिछड़ी जातियों को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को छोड़कर, एक मंच पर आना पड़ेगा।
    श्री आनन्द जी ने शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर देते हुए ओ0बी0सी. के समर्थकों को आगाह करते हुए कहा कि 85 प्रतिशत बहुजनों की संख्या होने के बावजूद भी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के सभी संकायों में दलितों-पिछड़ों का केवल 1.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है। जबकि 15 प्रतिशत जनसंख्या वालों का प्रतिनिधित्व 97 प्रतिशत है। इतना बड़ा अन्तर कैसे? निश्चित रूप से यह अकारण नहीं हो सकता। अवश्य ही कहीं-न-कहीं कोई साजिश है। आगे उन्होंने कहा कि बहुजनों को अपनी वैचारिकी को विकसित करना होगा, अन्यथा वे मनुवादियों के पिछलग्गू बनकर रह जाएंगे और अपने समाज को सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं दिला पायेंगे। श्री निखिल आननद जी ने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय के सभी नेता अपने बुद्धिजीवियों, डाक्टरों, इंजीनियरों, प्राध्यापकों, साहित्यकारों और जमीन से जुड़े समाजसेवियों को महत्व नहीं देते हैं, वरन् सत्ता में आने पर मनुवादी प्रवृत्ति के लोगों से बुरी तरह घिर जाते हैं। यहाँ तक कि कन्हैया कुमार जैसे आरक्षण विरोधी तत्वों की प्रशंसा में लग जाते हैं।
    इसी क्रम में पूर्णिया नगर निगम की महापौर श्रीमती विभा कुमारी ने मंडल आयोग के अध्यक्ष महामना बी0पी0 मंडल जी के साहस और बुद्धिमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने पिछड़े वर्गो को राष्ट्र की मुख्य धारा में जोड़ने का काम किया है, हमें इस सुयोग का लाभ उठाना चाहिए। जिला परिषद कटिहार की अध्यक्षा श्रीमती गुड्डी कुमारी ने इनके स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा कि यदि मंडल जी की रिपोर्ट से पिछड़े वर्गो को आरक्षण का सहारा नहीं मिला होता तो आज जहाँ तक पिछड़े अपना हक माँगने का साहस कर रहे हैं वह भी नहीं कर पाते। इसलिए हमें मंडल जी द्वारा दिखाये गये मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। कटिहार जिला परिषद की पूर्व उपाध्यक्ष एवं वर्तमान सदस्य श्रीमती अंजना देवी ने भी सामाजिक न्याय के प्रणेता बी0पी0 मंडल जी के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि पिछड़े वर्गो में आगे बढ़ने की जो ललक पैदा हुई है वह मंडल जी की देन है। मैं भी जिला परिषद की सदस्यता प्राप्त करने का साहस ऐसे ही महापुरूषों के दिखाये रास्ते के कारण कर सकी हूँ। भागलपुर नगर निगम की पूर्व महापौर डा0 वीणा यादव ने कविताओं और शेरों के द्वारा उपस्थित जन समूह को आकर्षित और उत्साहित करते हुए कहा कि मंडल आयोग की सभी अनुशंसाओं को लागू करवाने के लिए पिछड़े समुदाय को एकजुट होना होगा नहीं ंतो आज, आधा-अधूरा ही सही, जो आरक्षण मिल रहा है, वह भी सवर्णो के आर्थिक पिछड़ेपन की भेंट चढ़ जाएगा और पिछड़े लोग मुँह ताकते रह जाएंगे। इसलिए भाई लोग होशियार हो जाइए। भारत सरकार के कृषि विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डाॅ0 पी0पी0 सिन्हा ने अपने वक्तव्य में कहा कि पिछड़ों के मसीहा बी0पी0 मंडल ने पिछड़ी जातियों का एक वर्ग बना कर एक मंच पर ला दिया है, जिसे हमलोग ओ0बी0सी0 कहते हैं, यह उनकी बहुत बड़ी देन है। हम अपनी लड़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं। भारतीय विकासशील लेखक मंच, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) के राष्ट्रीय महासचिव श्री आलोक सुन्दर सरकार ने भविष्यदर्शी महामना बी0पी0 मंडल जी के गुणों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण, सम्पूर्ण भारत में नजर दौड़ा कर देखने से मंडल जी जैसा कोई पिछड़ों का राजनेता नहीं दिखाई पड़ता है, जिसने जात-पाँत के अंधविश्वास में फँसे और विखंडित हो रहे पिछड़ों को एकता के मार्ग पर ला खड़ा कर दिया। कटिहार दर्शन साह महाविद्यालय के अंग्रेजी के प्राध्यापक और चर्चित कवि, लेखक एवं शिक्षाविद् डाॅ0 जगदीश चन्द्र ने मंडल आयोग की सिफारिशों की चर्चा की और कहा कि इन सिफारिशों का निहतार्थ है कि प्रत्येक नियुक्ति में ओ0बी0सी0 आरक्षण लागू होना चाहिए पर देखने में यह आता है कि विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति की नियुक्ति में आरक्षण का पालन नहीं किया जा रहा है जो मंडल आयोग की सिफारिशों की अवहेलना है। ओ0बी0सी0 संगठन की ओर से एक अभियान चला कर यह सरकार की दृष्टि में लाना उचित होगा। राजदीप इण्टर काॅलेज, बेलदौर, खगड़िया में जीव विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डाॅ0 नीतेश कुमार ने समय, समाज और समानता की चर्चा करते हुए कहा कि ओ0बी0सी0 को 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल रहा है जो हमारे लिए चिन्ता का विषय है और सामाजिक न्याय को हासिल करने के लिए आवश्यक हो गया है कि दलित समुदाय और ओ0बी0सी0 मिलकर एक मंच पर आवें, अन्यथा यह लड़ाई अधूरी रह जाएगी। बिहार विधान सभा में पूर्व उपनेता श्री सूर्य नारायण सिंह यादव, ने मंडल जी के विराट व्यक्तित्व की चर्चा की और कहा कि उन्होंने बहुत कुछ दिया है उसको संभालने और लेने की जरूरत है। आज ओ0बी0सी0 के नेता अपने स्वार्थ में लगे हैं वे समाज के प्रति अपने कत्र्तव्य को भूल गये हैं। उन्हें चाहिए की समाज के चप्पे-चप्पे में सम्पर्क कर उन्हें जागरूक करें और सामाजिक न्याय की लड़ाई को गतिशील करें। श्रीकृष्ण आस्था मंच कटिहार की ओर से महामना बी0पी0 मंडल की 99वीं जयंती समारोह के अवसर पर प्रकाशित 170 पृष्ठों की स्मारिका का विमोचन, बिहार सरकार के पूर्वमंत्री और आलमनगर के वर्तमान विधायक श्री नरेन्द्र नारायण यादव ने किया। इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछड़ों के हक की लड़ाई को सड़क से सदन तक ले जाने की जरूरत है। सच मायने में बी0पी0 मंडल जी ने अपने प्रतिवेदन के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि वे सच्चे अर्थो में पिछड़ों के हिमायती थे। इस संदर्भ में मैं आप लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि मैं सरकार के हर स्तर पर ओ0बी0सी0 के आरक्षण की बात उठाऊँगा।
केन्द्रीय विद्यालय, कटिहार के शिक्षक श्री बी0एल0 यादव ने परिचर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पिछड़े वर्ग का होना एक बात है, लेकिन पिछड़ेपन का अहसास करना मुख्य बात है, पिछड़ों में जबतक पिछड़ेपन का अहसास नहीं होगा तबतक वे ओ0बी0सी0 के मंच से नहीं जुड़ेंगे और न अपने हक की लड़ाई में मददगार हो सकेंगे।
कटिहार के चर्चित कवि एवं समाजसेवी श्री राम खेलावन प्रजापति ने श्रीकृष्ण आस्था मंच, कटिहार की ओर से समारोह में उपस्थित विद्वानों, वक्ताओं और श्रोताओं को महामना बी0पी0 मंडल जी की जयंती को सफल बनाने में उनके संदेश एवं सहयोग देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित करने से पूर्व कहा कि आपलोगों ने आज प्रो0 हरि नरके जैसे प्रकांड विद्वान आरक्षण से संबंधित विश्लेषण और सुझाव सुना और डाॅ0 उर्मिलेश जैसे प्रख्यात पत्रकार से वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक परिवेश की समीक्षा सुनी। वैसे यह कहना उचित होगा कि श्री उर्मिलेश जी समय, समाज और राजनीति की धमनियों की धड़कनों पर उँगली रखते हैं उसके विगत का विश्लेषण करते हैं, वर्तमान की गति की प्रवृति देखते हैं और भविष्य की परिकल्पना कर अपना निर्णय देते हैं। आज उन्होंने जो यह संदेश दिया है कि अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए दलितों, पसमांदा मुसलमानों और आदिवासियों को साथ लेकर एक निर्णायक आन्दोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। आप इससे अवश्य सहमत होंगे और आशा है कि इस दिशा में श्रीकृष्ण आस्था मंच को साथ देंगे। मैं गत वर्ष की याद आपको दिला देना चाहता हूँ जब बिहार से राज्यसभा सदस्य माननीय अली अनवर साहब ने ऐसा ही सुझाव दिया था कि पसमांदा मुसलमान ओ0बी0सी0 के ही समान हैं उन्हें हम अपने साथ लेकर चलें। मैं इससे भी और पीछे आपको ले जाना चाहता हूँ जब सन् 2008 में पहले-पहल महामना बी0पी0 मंडल जी की जयंती मनाने का निर्णय लिया गया था, उस समय कटिहार के सामाजिक कार्यकत्र्ता भारतीय दलित साहित्य अकादमी का शाखा कार्यालय खोल कर लगभग डेढ़ साल तक प्रत्येक महीनें विचार-विमर्श इसलिए करते रहे कि कटिहार जिला के किसी साहित्यकार, क्रान्तिकारी अथवा ऐसे सामाजिक व्यक्तित्व को सामनें लाएं जिसे लेकर समाज सेवा के प्रकल्प को आगे बढ़ाया जा सकें। संयोगवश उस समय स्मृतिशेष प्रोफेसर डाॅ0 रामचन्द्र प्रसाद यादव कटिहार में थे और उन्होंने ही यह सुझाव दिया कि हमारे पास न केवल कटिहार, राज्य वरन् देश का एक महान व्यक्तित्व है जो ओ0बी0सी0 को समता, समानता एवं सम्मान दिलाने का काम करके अमर अजर है, और वे हैं, पिछड़ों के मसीहा बी0पी0 मंडल। आपलोग उनकी जयंती प्रत्येक वर्ष मनायें और उनकी अनुशंसाओं को लागू करवाएँ, इसमें ही पिछड़ों का हित है। यही नहीं स्मारिका प्रकाशन भी उन्हीं की सोच है। मुझे जहाँ तक याद है कि 2010-11 के दिनों में बातचीत में उन्होंने कहा था कि दलितों का संगठन बहुत मजबूत है। उनसे प्रेरणा लेकर उन्हें मिलाकर और आदिवासियों को मिला कर एक महासंगठन बनाना चाहिए और दलित साहित्य की तरह ओ0बी0सी0 साहित्य होना चाहिए जो हमें बराबर प्रेरित करता रहेगा। मेरे यह पूछने पर की ओ0बी0सी0 साहित्य की क्या अवधारणा होगी ? उन्होंने कहा कि आज हमारे पास केवल ब्राह्मणवादी साहित्य है जो हमारे शोषण की बात करता है लेकिन दलितों का साहित्य उत्पीड़न का विरोध और दलितों के हित की बात करता है। इसी प्रकार ओ0बी0सी0 द्वारा रचित साहित्य ब्राह्मणवादी उत्पीड़न से बचाने और ओ0बी0सी0 के हित की बात करेगा। ओ0बी0सी0 की वैचारिकी होगी, सामाजिक समता, समानता और एकता की अवधारणा होगी जिससे सामाजिक न्याय की दिशा में हम मंडलजी की अनुशंसाओं को प्राप्त कर सकते हैं। मुझे लगता है कि आज से वर्षों पूर्व स्मृतिशेष प्रोफेसर यादव ने हमें जो सुझाव दिया था हमने उस पर ध्यान नहीं दिया। अब से ही सही, हम प्रो0 हरि नरके और डाॅ0 उर्मिलेश जी के सुझाव को आत्मसात कर उस पर अमल करें। शांतचित होकर विद्वानों को धैयपूर्वक सुनने और समारोह को सफल बनाने के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।
इस अवसर पर समाज सेवी राजराज राम, डाॅ0 सुशील कुमार सुमन, पूर्व महापौर श्रीमती पुष्पा देवी, इं0 सच्चिदानन्द अमर, डाॅ0 राम बिलास महतो, समाजसेवी सुनील कुमार, डाॅ0 राम सुन्दर मुखिया, प्रो0 नरेन्द्र कुमार निराला, मो0 जमील, जगदीश पटेल, मनोज राय, प्रो0 गोपाल कृष्ण यादव, इं0 प्रमोद कुमार, “केवल सच” के कटिहार प्रभारी पत्रकार श्री अरविन्द कुमार यादव, शम्भु प्रसाद यादव, संजय कुमार, पंकज किशोर, रेणु कुमारी, इं0 गोखला प्रसाद, इं0 मुकेश कुमार, दीनबंधु, इं0 डी0के0 मंडल, राजकमल, कन्हैया लाल केसरी, निगम पार्षद चाँदसी, सुनील कुमार, प्रो0 मणिकान्त यादव, अकाली प्रसाद, दिनेश कुमार दिनेश, मृत्युंजय कुमार, रमेश चन्द्रा, प्रो0 भवेश कुमार यादव, प्रियंका कुमारी, योगेन्द्र नारायण यादव, तारकेश्वर ठाकुर, रमेश राय, डाॅ0 विश्वनाथ राम कुशवाहा, नवल किशोर, धर्मेन्द्र कुमार, अजय शर्मा, हरेराम प्रसाद, ए0के0 चैधरी, सी0एल0 प्रसाद, प्रो0 मनोज कुमार, राकेश कुमार, अशोक कुमार, के0पी0 साह, डाॅ0 रामस्वरूप सिंह, मो0 नूर आलम, प्रमोद दास, आर0पी0 गुप्ता, विपिन कुमार, एन0के0 गुप्ता, पी0एन0 यादव, कृष्णा राउत, महेश पंडित, सहदेव प्रसाद, रामनाथ, सिंह, रघुनाथ यादव, राधेश्याम सिंह, प्रमोद दास, तपन कुमार मंडल, उदय कुमार, नगीना प्रसाद, मुखिया मिथिलेश यादव, सतीश ठाकुर (जद यू), हरेराम सिंह, दीप नारायण यादव, शैलेन्द्र कुमार यादव, उपेन्द्र नारायण सिंह, के0पी0 यादव, अजय पासवान, इं0 शिवकांत, संदीप कुमार, कुन्दन कुमार, सियाराम यादव मयंक, प्रो0 तार किशोर प्रसाद, रामानन्द यादव, रोहित कुमार राही, प्रो0 सुनील भारती, देवानन्द यादव आदि गण्यमान व्यक्ति उपस्थित थे।

संपर्क;  मो0- 9430884186
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