मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

लेखन से समाज को दिशा मिलती हैः प्रो. कुठियाला

डॉ. कलाम के नाम से स्थापित होगा पुस्तकालय

एम.सी.यू. में तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन

भोपाल । पाठक का दृष्टिकोण एवं समाज की रूचि, आवश्यकता एवं वास्तविकता को समझकर लेखन करना समाज को एक दिशा देना जैसा है। एक अच्छा लेखक जहां एक ओर समाज का नेतृत्व करता है वहीं दूसरी ओर समाज को सकारात्मक दिशा भी प्रदान करता है। उक्त वक्तव्य माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने रविवार को जनसंचार विभाग द्वारा लेखन कला के विविध आयाम  पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज की नब्ज के अनुसार कार्य करता है और समाज की रूचियों को समझ कर किया गया लेखन समाज को सही दिशा में ले जाने में सफल होता है। समाज के विभिन्न वर्गों में अलग-अलग खबरों को पसंद किया जाता है और यही वर्ग समाचार पत्र का पाठक होता है।

  कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए लाजपत आहूजा, कुलाधिसचिव ने कहा कि लिखने के लिए पढ़ना बहुत जरूरी है। पत्रकारिता वर्तमान में कठिन दौर से गुजर रही है। आगे आने वाली पीढ़ी को जहां एक ओर सोशल मीडिया से जागरूक रहने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी ओर उसे अपडेट रहना होगा। गंभीर लेखन, गंभीर पाठन नये पत्रकारों को करना होगा। इस मौके पर प्रो. कुठियाला ने जनसंचार विभाग में नवीन पुस्तकालय का नाम पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर रखने की घोषणा की।

   एंकरिंग जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्याख्यान देते हुए भास्कर डिजीटल संयुक्ता बैनर्जी ने छात्रों को कैमरा फेस करना एवं दर्शकों से हमेशा जुड़े रहने की कला को प्रतिपादित किया। उन्होंने कहा कि एंकरिंग के लिए फेस अच्छा होना ही सब कुछ नहीं होता है अपितु एंकर के अंदर आत्मविश्वास, उसका कन्टेन्ट और प्रस्तुतिकरण के साथ व्यक्तित्व का होना भी जरूरी होता हैं एंकर संस्थान का चेहरा होता है। वह जिस तरह प्रस्तुति देता है उसी के अनुसार संस्थान की छवि समाज में बनती है। उन्होंने कहा कि एंकर की भाषा पर पकड़ होनी चाहिए और उन्हें प्रस्तुत करने का सलीका भी होना चाहिए। सत्र की अध्यक्षता डॉ. अविनाश वाजपेयी ने की।

   वरिष्ठ पत्रकार एवं भास्कर डॉट कॉम के संपादकीय प्रमुख अनुज खरे ने वेब मीडिया के लिए लेखन पर अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि वेब मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां कम शब्दों में, कम समय में अधिक से अधिक संवाद होता है। यहां कन्टेन्ट और क्रियेटिविटी का महत्व है। वेब दुनिया का पाठक रूटीन स्टोरी नहीं चाहता वह डिफरेन्ट स्टोरी पसंद करता है। वेब की पहली शर्त होती है कि वह पाठक को अपनी ओर खींचकर प्रभावित कर सके। यह क्षेत्र प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया से पृथक है। यहां लेकल भाषा में भी अपनी बात को पहुंचाया जा सकता है। वेब मीडिया के क्षेत्र में फेसबुक, टवीटर, व्हास्टएप जैसे कई प्लेफार्म मौजूद हैं जहां पत्रकार कम शब्दों में पाठक से संवाद कर रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाओं को प्रतिपादित किया। सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामदीन त्यागी ने की।

   ट्विटर और फेसबुक पर लेखन के विविध आयामों को प्रतिपादित करते हुए यूनीसेफ के अनिल गुलाटी ने कहा कि संवाद करने का सबसे सशक्त एवं तेज माध्यम वर्तमान में सोशल मीडिया ही है। यह बात सच है के इनका उपयोग भारत समेत दुनिया के कई देशों में शहरी और पढ़े-लिखे लोग ही कर रहे हैं। परन्तु जिस तरीके से यह विधा आगे बढ़ी है, उससे लगता है कि भारत आगे आने वाले समय में सोशल मीडिया का प्रथम पंक्ति का उपभोक्ता बन जायेगा। इसमें चिंता की बात यह है कि भारत के ग्रामीण इलाके में रहने वाले 60 प्रतिशत से अधिक लोग आज भी इस प्लेटफार्म से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग अत्यन्त सावधानी गंभीरता और समझदारी से किया जाना चाहिए अन्यथा आपकी जानकारी का दुरूपयोग होने की प्रबल संभावनाएं हैं। सत्र की अध्यक्षता  आशीष जोशी ने की।

   फिल्म स्क्रिप्ट लेखन की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए युवा फिल्म कलाकार बालेन्द्र सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। युवा एक ओर जहां थियेटर में स्क्रिप्ट लिखकर आगे बढ़ सकते हैं वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित कर सकते हैं। उन्होंने फिल्मों में स्क्रिप्ट राइटिंग के महत्व को प्रतिपादित किया। सत्र की अध्यक्षता सुरेंद्र पॉल ने की।

 रिपोर्ट -  (संजय द्विवेदी) विभागाध्यक्षः जनसंचार

 

Go Back

Comment