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शब्द संशोधक भाषा के विकास की अहम कड़ीः राहुल देव

December 25, 2013

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रथम ओपन सोर्स स्पेल चैक सॉफ्टवेयर 'माला शब्द संशोधक'  (माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी शब्द शोधक) का लोकार्पण

भोपाल। आज किसी भी  भाषा के विकास में तकनीकी संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कंप्यूटर आधारित तकनीक भाषा के विकास में अहम होती जा रही है। इसलिए ही हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के शब्द संशोधक भाषा के विकास की अहम कड़ी होगें। यह विचार वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित हिंदी के प्रथम ओपन सोर्स स्पेल चेक साफ्टवेयर के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। इस साफ्टवेयर का नामकरण 'माला शब्द संशोधक' (माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी शब्द संशोधक) किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन पं.मदनमोहन मालवीय की जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी की जन्मतिथि के अवसर पर किया गया था।

    पत्रकारिता विश्वविद्यालय की एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कंप्यूटर पर हिंदी में काम करते समय हिंदी के शब्दों को लिखते समय होने वाली वर्तनी की त्रुटियों को दूर करने के लिए स्पेल चेक साफ्टवेयर परियोजना के अंतर्गत तैयार किया गए 'माला शब्द संशोधक साफ्टवेयर' का लोकार्पण करते हुए श्री राहुल देव ने कहा कि भारत भाषायी विविधता वाला देश है। भारतीय भाषाओं को विकास के लिए तकनीक आधारित विकास पर जोर देते हुए वर्तनी शोधक तैयार करना चाहिए। हिंदी में तैयार किया गया यह शब्दशोधक केवल पत्रकारिता के लिए ही नहीं बल्कि हिंदी के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेगा। इस अवसर पर साफ्टवेयर निर्माण दल के सदस्यों सर्वश्री अनुराग सीठा, रवि रतलामी, महेश परिमल एवं मनीष माहेश्वरी ने साफ्टवेयर सीडी का लोकार्पण करते हुए उसके अनुप्रयोग के बारे में प्रस्तुति दी।

   कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पूर्व सचिव उदय वर्मा ने कहा कि हिंदी कठिन किंतु वैज्ञानिक भाषा है। ऐसा माना जाता है कि विकसित एवं अविकसित भाषाओं में मुख्य अंतर यह होता है कि विकसित भाषा में कम अक्षर होते हैं हिंदी में अधिक अक्षर होने के बावजूद भी इसका वर्तनी शोधक तैयार कर लेना एक बड़ी उपलब्धि है। साथ ही इसे ओपन सोर्स के तहत जारी करना हिंदी के विकास में एक बड़ा कदम है।

  अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हिंदी के विकास एवं विस्तार में अब तकनीकी संसाधन अब महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं इसलिए विश्वविद्यालय ने यह साफ्टवेयर तैयार किया है।विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.mcu.ac.in पर यह साफ्टवेयर ओपनसोर्स के अंतर्गत उपलब्ध है। हिंदी प्रेमी इसमें आवश्यक सुधार-परिवर्तन करते हुए इसके नए संस्करण तैयार कर हिंदी के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।

    कार्यक्रम के दौरान डा. अनुराग सीठा ने इस संपूर्ण परियोजना की रूपरेखा रखी एवं इसके अनुप्रयोग के संबंध में बताया। कार्यक्रम का संचालन संजय द्विवेदी एवं आभार प्रदर्शन डा. चैतन्य पुरुषोत्तम अग्रवाल ने किया। इस अवसर हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मोहनलाल छीपा, वरिष्ठ पत्रकार सर्वश्री राजेंद्र शर्मा, गिरीश उपाध्याय, शिवअनुराग पटैरया, रामभुवन सिंह, कुशवाह, हरिमोहन शर्मा, बृजेश राजपूत, दीपक तिवारी, विजय दास, साहित्यकार श्री सुबोध श्रीवास्तव सहित विवि के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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   (डा.पवित्र श्रीवास्तव)

  निदेशकः जनसंपर्क प्रकोष्ठ

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