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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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साहित्य सम्मेलन में इसी सत्र से पत्रकारिता का पाठ्यक्रम

मौलाना मज़हरुल हक़ विश्वविद्यालय ने बनाया कई पाठ्यक्रमों के लिए अपना ज्ञान संसाधन केन्द्र

पटना। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन अब साहित्य सेवियों की हीं नहीं बल्कि छात्र-छात्राओं से भी गुलज़ार होगा। इसी सत्र से सम्मेलन विद्यापीठ में, बैचलर औफ़ लाईब्रेरी साइंस, जर्नलिज्म ऐंड मास कम्युनिकेशन, बैचलर औफ़ बिजिनेस मैनेजमेंट, बैचलर औफ़ कम्प्युटर ऐप्लिकेशन तथा अरबी-फ़ारसी सहित लगभग एक दर्जन रोजगार उन्मुखी पाठ्यक्रम आरंभ होने जा रहे है। मौलाना मज़हरुल हक अरबी फ़ारसी विश्वविद्यालय, पटना ने इसे अपना ‘ज्ञान संसाधन केन्द्र’ के रूप में स्वीकृति प्रदान किया है।

सम्मेलन सभागार में 21 अगस्त को संपन्न हुई सम्मेलन की पुनर्गठित कार्य समिति की प्रथम बैठक में, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने विश्वविद्यालय की स्वीकृति का उक्त पत्र पटल पर रखते हुए, यह जानकारी दी। सभी सदस्यों ने करतल ध्वनि से इस शुभ-समाचार के लिए, सम्मेलन अध्यक्ष को बधाई दी तथा हर्ष व्यक्त किया।

डॉ सुलभ ने बैठक में यह भी जानकारी दी कि, आगामी 1 सितम्बर से आरंभ हो रहे हिन्दी पखवारा के अंतर्गत 4 सितम्बर से लगाये जाने वाले ‘पुस्तक चौदस मेला’ का उद्घाटन गोवा की महामहिम राज्यपाल डा मृदुला सिन्हा करेंगी। उनकी स्वीकृति भी प्राप्त हो गयी है। उन्होंने बताया कि, छात्र-समुदाय को साहित्य और साहित्य सम्मेलन से जोड़ने के अनेक प्रयासों में, एक और महत्त्वपूर्ण कड़ी के रूप में विद्यापीठ का संचालन तो है ही, हिन्दी पखवारा में, प्रत्येक दिन विविध साहित्यिक विषयों में प्रतियोगिता के आयोजन किए जा रहे हैं। इनमें श्रुतिलेख-प्रतियोगिता, श्लोक-पाठ-प्रतियोगिता, निबंध-लेखन प्रतियोगिता, काव्य-पाठ-प्रतियोगिता, व्याख्यान प्रतियोगिता, काव्य-कार्यशाला, कथा-लेखन कार्यशाला आदि सम्मिलित हैं। सभी प्रतियोगिताओं के लिए प्रमाण-पत्र, पदक और पुरस्कार-राशि भी रखी गयी है।

बैठक में आगामी 19-20 अक्तूबर को होने वाले सम्मेलन के 98वाँ स्थापना-दिवस के आयोजन की तैयारियों की भी समीक्षा की गयी। सम्मेलन के नये साहित्यमंत्री और प्रसिद्ध समालोचक डा शिववंश पाण्डेय, पुनर्गठन में उपाध्यक्ष पद पर प्रतिष्ठित हुईं डा कल्याणी कुसुम सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार जियालाल आर्य, वरीय उपाध्यक्ष नृपेन्द्रनाथ गुप्त, पं शिवदत्त मिश्र, डा शंकर प्रसाद, मृत्यजय मिश्र ‘करुणेश’, बलभद्र कल्याण, कलामंत्री डा नगेन्द्र प्रसाद मोहिनी, लोकभाषा मंत्री डा लक्ष्मी सिंह, शायर आरपी घायल, राज कुमार प्रेमी, डा विनोद कुमार मंगलम, पुष्पा जमुआर, डा शांति जैन, डा अर्चना त्रिपाठी, शांति ओझा, राजकुमार प्रेमी, डा मेहता नगेन्द्र सिंह, आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, सागरिका राय, प्रो सुशील झा, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, शंकर शरण मधुकर, कृष्णरंजन सिंह, जगदीश प्रसाद राय, अंजुला कुमारी, विश्वमोहन चौधरी संत, रामनंदन पासवान समेत कार्यसमिति के लगभग सभी सदस्य उपस्थित थे।

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