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सैयद अहमद खां की 200वीं जयंती समारोह का आयोजन

October 18, 2017

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ओल्ड ब्वॉयज एसोशिएसन, बिहार चैप्टर द्वारा पटना में आयोजित किया गया कार्यक्रम

साकिब जिया /पटना/ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खां की 200वीं जयंती समारोहपूर्वक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ओल्ड ब्वॉयज एसोशिएसन, बिहार चैप्टर की ओर से मौलाना मजहरूल हक ऑडिटोरियम, पटना में 17 अक्तूबर को देर शाम आयोजित की गयी। मौके पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय  के छात्र रहे सांसद  चौधरी महबूब अली कैसर, डॉ. तलत हलीम, मो. सलाम और  पत्रकारिता विभाग से पत्रकारिता की पढाई कर चुके एवं लेखक -पत्रकार तथा  पत्र सूचना कार्यालय, पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया  

इस अवसर पर  मुख्य अतिथि सांसद चौधरी महबूब अली कैसर ने कहा कि सर सैयद अहमद खां की जयंती पर आज उन्हें हम याद कर रहे हैं। सर सैयद को शिक्षा का अलख जगाने के लिए पूरा विश्व याद कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अलख जगाने के लिए उन्होंने केवल मुसलमानों के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं की थी बल्कि सभी कौम के लोगों के लिए किया था। चौधरी कैसर ने कहा कि वे हिंदू और मुसलमान को अपनी आंखें मानते थे और सच है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ने वाले छात्र आज दुनिया भर में परचम लहरा रहे हैं। इसमें हिंदू भी है और मुसलमान भी।

मौके पर पारस अस्पताल के चर्चित डॉक्टर तलत हलीम ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा शिक्षा का प्रसार हो, यही सर सैयद चाहते थे। डॉ. हलीम ने कहा कि सर सैयद का सपना शिक्षा को अंतिम कतार तक पहुंचाना था, हर उस वर्ग तक शिक्षा को ले जाना था जिसकी पहुंच नहीं थी और इसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अहम भूमिका निभा रहा है। वहीं बिहार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद सलाम ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सर सैयद ने शिक्षा को लेकर जो पहल की वह सबके सामने है। उन्होंने ओल्ड ब्वॉयज एसोशिएसन से आग्रह किया कि संगठन को और मजबूत बनाने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पासआउट छात्रों को जोड़ें और सर सैयद के काम को आगे बढ़ाएं।

समारोह को संबोधित करते हुए अलीगढ़ के छात्र रहे और पत्र सूचना कार्यालय, पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक संस्कृति है जहां हिंदू-मुस्लिम या यों कहें हर जाति-धर्म के लोग शिक्षा पाकर सफलता की उंचाइयों को छू रहे हैं और इन सब के पीछे सर सैयद का ही हाथ है। 

अगर वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं करते तो शायद शिक्षा का यह स्वरूप देखने को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि शिक्षा को लेकर मुसलमानों के बीच सर सैयद अहमद खां एक ऑइकन के तौर पर हैं तो वहीं दलितों-वंचितों के ऑइकन हैं डॉ. भीमराव अंबेडकर। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को एक खास धर्म के शिक्षण संस्थान के तौर पर नहीं देखना चाहिए क्योंकि यह एक शिक्षा का मंदिर है जहां हर कोई शिक्षा पा रहा है। 

ओल्ड ब्वॉयज एसोशिएसन, बिहार चैप्टर के महासचिव डॉ. अरशद हक ने कहा कि सर सैयद के सपने को पूरा करने की कोशिश एसोशिएसन कर रहा है। उन्होंने बताया कि गरीब छात्रों को शिक्षित करने की पहल की जा रही है। डॉ. हक ने कहा कि सर सैयद ने शिक्षा को लेकर जो सपना देखा था उसे पूरा करने की पहल बिहार चैप्टर की ओर से तब तक जारी रहेगा जब तक सब को शिक्षा नहीं मिल जाती। मौके पर ओल्ड ब्वॉयज एसोशिएसन के अध्यक्ष इंजीनियर अमीर हसन सहित भारी संख्या में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र मौजूद थे। समारोह के दौरान अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन किया।  इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागियों और शिक्षा के क्षेत्र में मुकाम पाने वाले गणमान्य लोगों को प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. सेहर रहमान और धन्यवाद ज्ञापन अब्दुल मनान खान ने किया।

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