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पत्रकारों का प्रशिक्षण जरूरी : राज्यवर्धन सिंह राठौर

 नहीं होता है पत्रकारों के प्रशिक्षण में बहुत अधिक निवेश 

नई दिल्ली ।  सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने पत्रकारों के प्रशिक्षण पर बल दिया है। भारतीय उद्योग परिसंघ , सीआईआई के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि समाचारों की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान नहीं दिए जाने और न्यूज चैनलों के पास धन की कमी होने से पत्रकारों के प्रशिक्षण में बहुत अधिक निवेश नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश और हमें लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी  खबरों की जरूरत है जो हर मापदंड पर खरे उतरे। उन्होने पत्रकारों के प्रशिक्षण पर बल दिया । श्री राठौर ने निजी एफएम रेडियो पर समाचारों को अनुमति दिए जाने की मांग के संबंध में कहा कि बदलते समय के साथ नीतियां भी बदल रही हैं। उन्होंने कहा एक दौर था जब निजी रेडियो पर कोई समाचार नहीं होते थे लेकिन अब फेज 3 के विस्तार के साथ इसमें बदलाव आया है।

सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार न्यूज चैनलों में और अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने के मुद्दे पर विचार कर रही है।जैसा कि नियमों के तहत न्यूज और समसामयिक टीवी चैनलों के अपलिंकिंग की मंजूरी देने में 26 फीसदी एफडीआई की अनुमति है। इसके पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य- मंत्री कर्नल राज्य वर्द्धन राठौड़ ने नई दिल्ली के शास्त्री- भवन के कमेटी रूम में एफटीआईआई छात्र संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस अवसर पर मंत्रालय के अधिकारी भी उपस्थित थे। जीआरएएफटीआई की प्रतिनिधि सुश्री अरूणा राजे भी विचार-विमर्श का हिस्साए थीं। 

बातचीत के दौरान मंत्री महोदय ने एफटीआईआई को पर्याप्त बुनियादी ढांचे के साथ राष्ट्रीय उत्कृमष्टफता के एक केन्द्र् के रूप में एफटीआईआई की स्थापना के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंदने इस बात को भी दोहराया कि सरकार एफटीआईआई में शैक्षणिक और रचनात्माक स्वतन्त्रता सुनिश्चित करने के प्रति वचनबद्ध है और कहा कि इसे लेकर भयभीत होने की कोई आवश्यककता नहीं है। मंत्रालय पूर्व छात्रों/छात्र संगठन द्वारा प्रतिमान/अवधारणा नोट/खाका तथा दीर्घकालिक अवधि में एक उपर्युक्तं तरीके से इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए मुकेश शर्मा समिति की रिपोर्ट भी प्रस्तुात की जाने की उम्मी द करता है। मंत्रालय ने पाठ्यक्रम कार्यक्रम का अनुपालन न किये जाने पर चिंता जताई और समय का पालन करने के लिए रास्ते सुझाने के लिए प्रशासन एवं छात्रों के बीच आपसी सम्पपर्क बेहतर करने का आग्रह किया। इस बात पर सहमति जताई गई कि इन मुद्दों पर बाद में चर्चा की जायेगी।

 

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