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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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स्वरूप बदल गया है पत्रकारिता का

December 26, 2017

रजनीश रमण/ परिभाषाएं बिल्कुल सत्य हैं कि पत्रकारिता एक मिशन है,  लेकिन आज के दौर में यह कहना भी अनुचित नहीं होगा कि यह एक प्रोफेशन बन चुका है। इतिहास को याद करें तो, गाँधी जी की कही वो बात याद आती है कि पत्रकारिता केवल पत्रकारिता है जो हमें ब्रिटिश राज से देश को आजादी दिलाने की भावना को प्रेरित करती है।

बदलते वर्तमान के युग में, यह एक व्यवसाय बन चुकी है तो क्यों ना बने? जो लोग इस तरह के आरोप लगाते है कि पत्रकारिता एक मिशन नहीं रही है और यह अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है, तो वो यह भूल जाते हैं कि हर पत्रकार को भी एक बेहतर जिंदगी जीने का हक है उसे भी अपना पेट उचित तरीके से भरना है, उसका भी परिवार होता है।

असल में जिस चीज की जरूरत होती है वो तो उसका जुनून है। हाँ, जरूरत है इस जुनूनियत को कायम रखते हुए इस प्रोफेशन को पूरी ईमानदारी से निभाने की। तभी हमारे समाज का सकुशल निर्माण होगा और हमारा देश सुनहरे भविष्य का एक असीम सागर होगा।

हमारे देश में हर साल दर्जनों पत्रकार समाचार संकलन के दौरन मारे जाते हैं, इसके बावजूद भी पत्रकारों के जज्बों में कोई कमी नजर नहीं आती है, ऐसे में यह कहना ठीक नहीं होगा की पत्रकारिता एक मिशन नहीं है. यह आज भी एक मिशन है सिर्फ इसका स्वरूप बदल गया है।

रजनीश रमण कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र हैं।  

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