मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

बारूद के ढेर पर न्यूज़ रीडिंग!

ये समाचार नहीं बताते सीधा मतलब समझा देते हैं

सरस्वती रमेश/ आपने कभी बारूद के ढेर पर बैठकर न्यूज रीडिंग करते हुए न्यूज़ रीडरों को देखा है!  अगर नहीं,  तो रिपब्लिक भारत चैनल देखिए। उसके न्यूज़ रीडरों के समाचार पढ़ने का लहजा कुछ ऐसा ही है जैसे वे एटम बम पर बैठों हों। कई महान विभूति और विभूतिनियां है। नाम नहीं पता मुझे । उनके बोलने का लहजा ऐसा है जैसे दर्शकों को धमकियां रहे हैं।

अभी भारत और चीन के बीच तनातनी की स्थिति बनी हुई है। लेकिन इसमें  सबसे ज्यादा आक्रामक ये न्यूज़ रीडर और एंकर ही दिख रहे। खुदा न खास्ता अगर सीमा पर इनकी तैनाती का मौका मिल जाए तो भारतीय सेना के बेरोजगार होने का खतरा मंडराने लगेगा!

कभी-कभी मैं रसोई से इनकी आवाज सुन सहम जाती हूँ। खबर भली हो या बुरी, जिंदगी की हो या मौत की, प्रेम या नफरत की, ये गरजते हुए बरस रहे होते हैं। जैसे युद्ध मैदान में तोप लिए खड़े हों।

ये समाचार नहीं बताते सीधा मतलब समझा देते हैं या फिर नतीजे दिखा देते हैं। अभी भारत-चीन युद्ध शुरू भी नहीं हुआ और एंकरों ने कई- कई बार चीन को नेस्तनाबूद कर दिया है। कौन सा देश हमारा दुश्मन होगा और कौन सा मित्र यह न तो सरकार तय करती है और न ही पब्लिक। यह तो यही न्यूज़ रीडर तय कर देते हैं। वैसे रिपब्लिक भारत कोई अपवाद नहीं, अधिकतर चैनलों का यही हाल है।

Go Back

Comment