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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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रिपोर्टर नहीं, संपादक दोषी

प्रेमेंद्र मिश्र। एक आपत्तिजनक न्यूज़, वेब पोर्टल पर डालने को लेकर मेरे जिले के दो होनहार पत्रकार कानूनी पेंच झेल रहे हैं। पर क्या वाकई दोष उनका है ? क्या उनके न्यूज़ ग्रुप ने उन्हें वांछित ट्रेनिंग दी? उन्हें बताया गया कि क्या प्रकाशित करना है और क्या नही? और अगर उन्होंने गलती की भी तो संपादक क्या कर रहे थे ? उन्होंने इसे क्यों नहीं रोका ? एक अन्य बेहद प्रतिभाशाली युवा रिपोर्टर के खिलाफ एक गलत खबर लिखने पर उनके संपादक ने कार्रवाई का फरमान जारी कर दिया। पर ये खबर छपी क्यों ? अगर जिले से खबर आ भी गयी थी तो संपादक, उपसंपादक आदि के स्तर पर क्यों नहीं इसे रोका गया ? आप काहे की मोटी तनख्वाह ले रहे हो? क्या आपने कभी कानूनी पहलु पर जिले के पत्रकारों को ट्रेनिंग दी ? कुछ दिन पहले एक न्यूज़ समूह में जिला स्तर से एक खबर गयी। ऊपर बैठे संपादक स्तर के लोग भी ये नहीं समझ पाए कि इसमें एक कानून का उल्लंघन हो रहा है। उसे पटना से दिल्ली तक कैरी किया गया। जब मामला फंसा तो सबसे नीचे का रिपोर्टर दोषी। आखिर आप संपादक किस बात के? आपकी क्या जवाबदेही है ? आपको तो कानून का ज्ञान होना चाहिए, आप तो ट्रेंड हो, आप तो विद्वान हो, आप के पासपूरा अधिकार है कि किसी ख़बर को रोक दें। तो फिर कैसे छप जा रही गलत खबर ? जिला स्तर पर किसी को ट्रेनिंग दी आपने ? फिर दोषी केवल जिला स्तरीय पत्रकार क्यों ?

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