मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "फेसबुक से "

क्या सवर्णवादी-जातिवादी मीडिया से भी कैफ़ियत तलब की जा सकती है?

हेमन्त कुमार। संतोष झा और मुकेश पाठक! नाम के साथ चस्पा सरनेम से किसी को जानने में परेशानी नहीं होगी कि दोनों की जाति ब्राह्मण है! दोनों के नाम दरभंगा में सड़क निर्माण कार्य में लगी कंपनी चड्ढा एंड चड्ढा के दो इंजीनियरों की हत्या करने के कारण सुर्खियों में है. …

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क्या ऐसा ही होना चाहिए मीडिया का रवैया?

इर्शादुल हक। मैं बिहार के प्रति मीडिया की इसी बेशर्मी के इंतजार में था. इंतजार जरा लम्बा चला. दो महीने. आखिरकार मीडिया ने इसकी शुरूआत दरभंगा के दो इंजीनियरों की हत्या के साथ कर ही दी. कह रहे हैं 'रिटर्न्स ऑफ जंगल राज पार्ट-2'. इन दोनों इंजीनियरों को कथित रूप से संतोष झा गैंग के म…

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यह है देश के दैनिक समाचार पत्रों का असली चेहरा

के पी मौर्य।भारत सरकार के डीएवीपी द्वारा 6 दिसम्बर बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर दो दिन पूरे पृष्ठ का रंगीन विज्ञापन लगभग सभी दैनिक समाचार पत्रों को जारी किया, जिनमें से एक भी समाचार पत्र दलित व्यक्ति द्वारा संचालित नहीं हैं। लेकिन आज जब जनसत्ता समाचार पत्र को द…

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मीडिया भी अपने अपने एजेंडे के तहत चुनावी समर में?

संजय कुमार / बिहार चुनाव कवर करने आयी मीडिया की फ़ौज़ ....अलग अलग पोशाक में है। गन( लोगोयुक्त माइक) भी अलग अलग किसी को जंगलराज दिख रहा है तो किसी को रामराज। किसी को गरीबी भुखमरी अराजकता और न जाने क्या क्या। दलो की तरह मीडिया भी अपने अपने एजेंडे के तहत चुनावी समर में है। यहाँ भी स…

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मुद्राराक्षस अस्वस्थ

आज मुद्राराक्षस का जन सम्मान होना था . सारी तैयारिया पूरी हो चुकी थी. तभी पता चला कि उनकी तबीयत ख़राब हो गई है. हम भागते हुए हॉल के बहार आयें . मुद्रा जी गाड़ी में अचेत से पड़े थे. साँस लेने में उन्हें परेशानी हो रही थी . उन्हें तत्काल मेडिकल सहायता की जरूरत थी . उसी गाडी में उन्हें बलरामपुर अस्पता…

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बाहुबली' और 'बजरंगी भाईजान ' का ब्राह्मणवादी नजरिया

राजेश कुमार/ आजकल इन दोनों फिल्मो ने भारतीय दर्शको के बीच ग़दर काट रखा है। ये लोगो के जेब और दिमाग दोनों पर जमकर हाथ साफ़ कर रहे है।  मुन्नी के गोरे रंग को देखकर करिश्मा का पिता कहता है कि जरूर यह लड़की किसी ब्राह्मण की होगी और जब मुन्नी को गोश्त खाते देखता है तो कहता है कि यह ल…

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पत्रकारिता का अपराधीकरण

हेमंत कुमार। राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण इस देश में विमर्श का बड़ा मुद्दा रहा है. लेकिन पत्रकारिता के अपराधीकरण पर कभी कोई चर्चा नहीं होती. हां,शोर तब मचता है जब कोई पत्रकार वसूली या भयादोहन करते, अपराधियों या पुलिस के साथ मिलकर अपहरण,फिरौती या रंगदारी जैसे सं…

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शहीद पत्रकार जगेंद्र सिंह के बहाने

एम अफसर खान/ लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाने वाला मीडिया आज बेचैन है, मौन है! लोकतंत्र का पहरुवा आज खुद की पहरेदारी करने में असमर्थ नजर आ रहा है! आजादी के 60 साल से ज्यादा का अरसा बीत गया मगर असली आजादी मृग मरीचिका जैसी है। शाहजहाँपुर के स्वतंत्र (सोशल मीडिया) पत्रकार जगेंद्र सिंह…

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मेरी आत्मा रो उठी !

नवेन्दु / पहले नेता- मंत्री पत्रकारों से मिलने का समय मांगते थे। अब पत्रकार नेता मंत्री के आगे पीछे करते हैं।...

बड़ी फज़ीहत…

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क्या इंटरव्यू देने के पैसे मुझे लोकमत समाचार देगा?

स्वतंत्र मिश्रलगभग नौ-दस साल पुरानी बात है. मैं फ्रीलांसर था.लोकमत समाचार के लिए इयर-इंडर (साल की घटनाओं का लेखा जोखा ) के लिए कला-साहित्य पर टिपण्णी के लिए मैंने प्रयाग शुक्ल जी को फ़ोन किया. उन्होंने चार-पांच बार अपनी व्यस्तता बताई फिर बहुत कुछ फ़ोन पर पुछा. मतलब न-नुकु…

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21 वीं वर्षगाँठ पर आयोजित विशेष एपिसोड!

उदय प्रकाश / दोस्तो, क्या आप रजत शर्मा जी के चैनल इंडिया टीवी को इस समय देख रहे हैं ? इसके 21 वीं वर्षगाँठ पर आयोजित विशेष एपिसोड में। …

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मीडिया का दोहरा नजरिया

अरविंद शेष। बांसुरी और ढोल बजा कर "लोगों" का दिल जीतने वाले हमारे प्रधानमंत्री जी ने तो सचमुच "सबका" मन मोह लिया होगा! लेकिन जो मीडिया और लोग प्रधानमंत्री जी के बिल्कुल बेफिक्र और अनौपचारिक होकर बांसुरी और ढोल बजाने को उनके "महान" होने के बतौर पेश कर रहा है, उसी ने इस देश के कुछ …

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उर्मिला पँवार के साक्षात्कार पर कैलाश दहिया ने उठाया सवाल

कैलाश दहिया/ युद्धरत आम आदमी’ नामक पत्रिका के जुलाई 2014 अंक में उर्मिला पँवार का साक्षात्कार छपा है। यह साक्षात्कार ‘स्त्री काल’ नामक नेट पत्रिका पर भी देखा जा सकता है। इसमें एक सवाल आजीवक धर्म को लेकर पूछा गया है। जो यहाँ दिया जा रहा है। …

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ऐसे में मीडिया की बेशर्मी पर सवाल तो उठेंगे साहब!

मिशन बिहार टेन्योर ?

इर्शादुल हक़। एक पते की बात बताता हूं. कुछ लोग ऐतराज कर सकते हैं. पर यथार्थ से मुंह मोड़ने वालों को देर-सबेर यह बात समझ आयेगी.…

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पत्रकार बेरोजगार हो गये !

हरियाली दिखाने को मिल रही ट्रेनिंग, केन्द्र सरकार से जुड़ी खबरे मैंनेजमेन्ट तय़ करेगी !

संतोष सिंह। आज से हमलोग पूरी तौर पर बेरोजगार हो गये है…

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अब ठीकरा पत्रकारों के सर फोड़, उनकी कुर्सियां बदलने की तैयारी

धीरज भारद्वाज/ नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत में मीडिया के कुछ घरानों ने जमकर उनके खिलाफ मोर्चा खोला. अच्छा लगता अगर ये मोदी सरकार के गठन के बाद भी अपने तेवरों पर कायम रहते और सरकार के क्रियाकलापों पर 'लोकतंत्र के पहरेदार' की हैसियत से नजर रखते. विपक्ष के मटियामेट होने की स्थि…

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एक सवाल भी ढंग का 'फ्रेम' करना नहीं आता!

पत्रकारिता का यह कैसा दौर?

रामजी तिवारी। पत्रकारिता का यह कैसा दौर है, जिसमें आपको एक सवाल भी ढंग का 'फ्रेम' करने नहीं आता | जिसमें आपके पास इतना भी साहस नहीं है, कि सामने वाले की आँखों में आँखे डालकर उसके सामने आईना रख दे | जिसमें यह …

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न्यूज चैनलों का मानसिक पिछड़ापन

विनीत कुमार/ स्त्री-पुरूष संबंधों को लेकर चलनेवाली स्टोरी में न्यूज चैनलों का मानसिक पिछड़ापन साफ दिखाई देता है. दिग्विजय सिंह और अमृता राय को लेकर आजतक ने जिस तरह से स्टोरी प्रसारित की और "अमृता राय का पति कौन" शीर्षक से पैकेज चलाए, बेहद शर्मनाक है. इन्हीं मौके पर आपको अंदाजा लग…

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खबर का स्‍पेस सिर्फ भीड़ और बिकने की क्षमता पर निर्भर करना चाहिए?

साथी, भगाना की लड़कियां अब भी आपकी राह देख रहीं हैं!
प्रमोद रंजन / कल दोपहर में हरियाणा भवन, दिल्‍ली पर भगणा बलात्‍कार पीडितों के आंदोलन का बहिष्‍कार करने वाले इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया संस्‍थानों के दफ्तर से…

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पत्रकारों को ठगने में लालू और नीतीश एक........

प्रवीण बागी / पत्रकार मित्रों ,
याद है आपको पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना ! नीतीश सरकार ने जिसे बड़े धूम धड़ाके से शुरू किया था। सरकार की अन्य घोषणाओं की तरह यह भी एक छलावा ही साबित हुआ। बिना प्रक्रिया पूरी किये सरकार ने आनन- फानन में पत्रकारों से 1796 रू…

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