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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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आईबीएन 7 के एसो.एडिटर पद से बर्खास्त पंकज

पंकज श्रीवास्तव आईबीएन 7 के एसो.एडिटर पद से बर्खास्त कर दिये गए हैं। उनके अनुसार दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अरविंद केजरीवाल व किरण बेदी को चैनल पर कम- अधिक दिखाये जाने को लेकर सच बोलना उनका गुनाह बन गया।  

आज शाम चार बजे इस मसले पर दिल्ली प्रेस क्लब के दरवाजे पर उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस भी रखा है। इनसे संपर्क का नंबर रहेगा----09873014510

देखिये हकीकत बयान करती, आज सुबह 10 बजे के करीब फेसबुक पर पंकज जी का पोस्ट-  

और मैं आईबीएन 7 के एसो.एडिटर पद से बर्खास्त हुआ !!! सात साल बाद अचानक सच बोलना गुनाह हो गया !!!!

कल शाम आईबीएन 7 के डिप्टी मैनेजिंग एडिटर सुमित अवस्थी को दो मोबाइल संदेश भेजे। इरादा उन्हें बताना था कि चैनल केजरीवाल के खिलाफ पक्षपाती खबरें दिखा रहा है, जो पत्रकारिता के बुनियादी उसूलों के खिलाफ है। बतौर एसो.एडिटर संपादकीय बैठकों में भी यह बात उठाता रहता था, लेकिन हर तरफ से 'किरन का करिश्मा' दिखाने का निर्देश था।दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय पर बिजली मीटर लगाने को लेकर लगे आरोपों और उनकी कंपनी में उनके भाई उमेश उपाध्याय की भागीदारी के खुलासे के बाद हालात और खराब हो गये। उमेश उपाध्याय आईबीएन 7 के संपादकीय प्रमुख हैं। मेरी बेचैनी बढ़ रही थी। मैंने सुमित को यह सोचकर एसएमएस किया कि वे पहले इस कंपनी में रिपोर्टर बतौर काम कर चुके हैं, मेरी पीड़ा समझेंगे। लेकिन इसके डेढ़ घंटे मुझे तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। नियमत: ऐसे मामलों में एक महीने का नोटिस और 'शो काॅज़' देना जरूरी है।

पिछले साल मुकेश अंबानी की कंपनी के नेटवर्क 18 के मालिक बनने के बाद 7 जुलाई को 'टाउन हाॅल' आयोजित किया गया था (आईबीएन 7 और सीएनएन आईबीएन के सभी कर्मचरियों की आम सभा ) तो मैंने कामकाज में आजादी का सवाल उठाया था। तब सार्वजनिक आश्वासन दिया गया था कि पत्रकारिता के पेशेगत मूल्यों को बरकरार रखा जाएगा। दुर्भाग्य से मैने इस पर यकीन कर लिया था।

बहरहाल मेरे सामने इस्तीफा देकर चुपचाप निकल जाने का विकल्प भी रखा गया था।यह भी कहा गया कि दूसरी जगह नौकरी दिलाने में मदद की जाएगी। लेकिन मैंने कानूनी लड़ाई का मन बनाया ताकि तय हो जाये कि मीडिया कंपनियाँ मनमाने तरीके से पत्रकारों को नहीं निकाल सकतीं ।

इस लड़ाई में मुझे आप सबका साथ चाहिये। नैतिक भी और भौतिक भी।बहुत दिनों बाद 'मुक्ति' को महसूस कर रहा हूं। लग रहा है कि इलाहाबाद विश्वविदयालय की युनिवर्सिटी रोड पर फिर मुठ्ठी ताने खड़ा हूँ।

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