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शर्म करो न्यूज चैनलो !

July 29, 2013

चैनलों ने शिवानंद तिवारी के बयान के पहले चार शब्द यानी “ भाजपा की नजर में” एडिट कर दिया था... 

इर्शादुल हक / आपने कल पूरा दिन चैनलों पर जद यू प्रवक्ता शिवानंद तिवारी को यह कहते सुना होगा- “नरेंद्र मोदी बड़े लोकप्रिय नेता हैं’… “कभी बनारस तो कभी लखनऊ से भी इनके चुनाव लड़ने की बात होती है, लेकिन क्या गुजरात में उनकी जमीन उखड़ गई है, जो बाहर कहीं से चुनाव लड़ना चाहते हैं.….”

जबकि सच्चाई यह थी कि शिवानंद ने कहा था- “भाजपा की नजर में नरेंद्र मोदी बड़े लोकप्रिय नेता हैं”…. “कभी बनारस तो कभी लखनऊ से भी इनके चुनाव लड़ने की बात होती है, लेकिन क्या गुजरात में उनकी जमीन उखड़ गई है, जो बाहर कहीं से चुनाव लड़ना चाहते हैं”.

दैनिक जागरण के पटना संस्‍करण ने शिवानंद तिवारी के दोनों वक्‍तव्‍यों को  प्रथम पृष्ठ पर छापते हुए शीर्षक दिया है- “अधूरे बयान पर बवाल”.

खबर का आशय यह है कि न्यूज चैनलों ने शिवानंद तिवारी के बयान के पहले चार शब्द यानी “ भाजपा की नजर में” एडिट कर दिया था.

चैनलों की यह हरकत ठीक वैसे ही जैसे फेसफुक पर कुछ बिगड़ैल और गैरजवाबदेह लोग कटरीना कैफ की बिकनी वाली तस्वीर से सर को गायब करके सोनिया गांधी का चेहरा चस्पा कर देते हैं. सोशल मीडिया की विश्वसनीयता पर नहीं होने के कारण लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. लेकिन कुछ न्यूज चैनल भी सोशल मीडिया जैसी हरकतें करने लगें तो उनकी विश्वसनीयता भी सोशल मीडिया की तरह हो कर रह जायेगी.

इस मामले से खुद शिवानंद तिवारी भी आहत हैं. वह कहते हैं, कुछ चैनल तो पत्रकारिता धर्म का निर्वाह करते हैं पर सब ऐसे नहीं हैं. इलैक्‍ट्रानिक मीडिया में कुछ शब्दों को एडिट कर देने मात्र से उसका अर्थ बदल जाता है, प्रिंट मीडिया में ऐसा आम तौर पर नहीं किया जाता. तिवारी कहते हैं “मैंने व्यंग्यात्मक लहजे में मोदी को लोकप्रिय कहा था पर उसे कुछ चैनलों ने आधाअधूरा दिखा कर हमारे कथन को उलट-लपट दिया”

टीआरपी के चक्कर में खबरों को सनसनीखेज बनाने की यह प्रवृत्ति खुद चैनलों के लिए घातक है. माना कि कुछ उत्साही या विकृत मानसिकता के पत्रकार ऐसी हरकतें करते हों पर यह मामला चैनलों के आउटपुट और इनपुट एडिटरों की नजरों से तो गुजरती ही है. वे भी ऐसी हरकतों का हिस्सा बनने लगें तो इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है.

पिछले एक-डेढ़ दशक से भारत में न्यूज चैनलों की भीड़ इतनी बढ़ गयी है. एक दूसरे से आगे निकल जाने और ज्यादा दर्शक जुटाने के लिए वे ऐसी हरकतें करते हैं. आज की तारीख में दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा न्यूज चैनल भारत में हैं. लेकिन उनकी विश्वसनीयता अगर सोशल मीडिया की तरह हो जायेगी तो आखिरकार इसका खामियजा उन्हें ही भुगतना पड़ेगा.

लेखक - नौकरशाही डॉट इन के सम्पादक है 

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आज के इस आधुनिक दौर में लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं,घर परिवार टुटता जा रहा है। एक संयुक्त परिवार के पढे लिखे लोग भी कुछ तुछ्य स्वार्थ व अहंकार के वश में होकर अपनों से दुर होते जा रहे है। इसी संदर्भ में पेश है खोदावन्दपुर के रविश बेगुसराय की ये कविता…….
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बुलंदी को छू लेंगे हम …..
खुशहाली के हर एक द्वार ।।
हाथ सिर पर हों अगर आप के…
होंगे सारे सपने साकार ।।
पूरे समाज में सबसे आगे …..
रहेगा अपना घर परिवार !!!!!१!!
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लोग उदाहरण दिया करते थे ….
जब परिवार की बात करते थे ।।
इच्छा तो है हर दिल की ये…..
बना रहे सदा वही आधार ।।
सभ्यता शालीनता और संस्कार…
यही है अपना घर परिवार !!!!!२!!
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सम्मान वही है जज्बात वही है….
हर अपनो का अधिकार वही है ।।
उम्मीद आपसे मार्ग प्रशस्त करने का ..
खोते हैं हम सारे विकार ।।
एकजुटता में सबसे आगे …..
रहेगा अपना घर परिवार !!!!!३!!
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आज हकीकत ऐसी बनी है….
अपनों की ऐंठ अपनों को लगी है ।।
मत होने दो ऐसी गलतियां ….
करता है यह ‘रवि’ पुकार ।।
अभी समय है रोक लो देवा …..
बचा लो अपना घर परिवार !!!!!४!!
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हम तो कली हैं आपके बगिया के…
अभी समय है उसे खिलने में ।।
आप सुमन हो सुगंध फैलाओ….
प्रयास करो तुम नाना प्रकार ।।
बस उजरने से बच जाए …….
हरा भरा यह घर परिवार !!!!!५!!
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आज संकल्प हम करते हैं …..
सबको साथ ले चलते हैं ।।
इज्जत शोहरत और विद्वता ….
का होगा अब सपना साकार ।।
पूरे समाज में सबसे आगे …..
रहेगा अपना घर परिवार !!!!!६!!
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Ravish Begusarai khodawandpur

Sir mai aapko bahut samman karta hu tatha apke news channel se jud kr kaam karna chahta hu . Maine MJ bhi kiya huwa hai ,aapse judkar patrakarita me anubhav lene ka ichhuk hu aur aap ka aashirvad prapt karna chahta hu...

इस रविश का लक्ष्य यही है, नववर्ष में सब अच्छा हो....
हिन्दुस्तान के काव्य मंच पे खड़ा, बेगुसराय का ये बच्चा हो।

गलत हुआ जो उसको भूलें, अब न कभी दुहराएँगे....
अब तो चाहे जो हो जाये, हिन्दी काव्य साहित्य को अपनायेंगें।
नेक राह पर चलने वाला, दुनिया का हर बच्चा हो...
इस रविश का लक्ष्य यही है, नववर्ष में सब अच्छा हो।
हिन्दुस्तान के काव्य मंच पे खड़ा, बेगुसराय का ये बच्चा हो।

रहें प्रेम से सारे मानव, सब में भाई-चारा हो,
घर कोई अब रहे न भूखा, ऐसा विश्व हमारा हो।
प्यार-महब्बत पूँजी अपनी, लक्ष्य नहीं अब पैसा हो.
इस रविश का लक्ष्य यही है,नववर्ष में सब अच्छा हो।
हिन्दुस्तान के काव्य मंच पे खड़ा, बेगुसराय का ये बच्चा हो।

मज़हब प्रेम हमें सिखलाए, यही धर्म समझाता है,
ईश्वर-अल्ला में कुछ अंतर, मूरख ही बतलाता है।
सभी देवता यहाँ सभी के, ये समाज इक घर-सा हो,
इस रविश का लक्ष्य यही है, नववर्ष में सब अच्छा हो।
हिंदुस्तान के काव्य मंच पे खड़ा, बेगूसराय का ये बच्चा हो



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