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पत्रकारों को तीसमार होने का भ्रम

September 24, 2017

रिजवान चंचल / देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में आये दिन हो रही पत्रकारों की हत्याओं से जाहिर है की पत्रकार अब सुरक्षित नही है.पत्रकारों की हत्या और जान लेवा हमलों की घटनाएं कम होने के बजाय  बढ़ती जा रहीं हैं कहना न होगा सच्चाई लिखने और सच्चाई दिखाने वाले पत्रकार भ्रष्टाचारियो, अत्याचारियों, दबंगो, देशद्रोहियो, बलात्कारियों लुटेरों पर भारी पड़ रहे है इस लिए सच्चाई लिखने और सच्चाई दिखाने वाले पत्रकारों पर खुलकर हमले हो रहे है जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है. 

हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में हत्या के बाद त्रिपुरा में शांतनु भौमिक की रिपोर्टिंग के दौरान हत्या और सनिवार को  ट्रिब्यून और इंडियन एक्सप्रेस में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार के जे सिंह और उनकी माँ की गला रेतकर हत्या कर दी गयी मामले का खुलासा दोपहर में उस वक्त हुआ जब केजे सिंह के भतीजे अजय उनके आवास पर पहुंचे ! पुलिस का हाल यह है की वह पत्रकारों के हमलावरों हत्यारों तक नही पहुच पा रही है जाँच जारी रहती है .

जनजागरण मीडिया मंच पत्रकारों पर हो रहे हमलों की हमेसा कड़े शब्दों में निंदा करता रहा है तथा समय समय पर सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा के लिये कड़े कदम उठाये जाने व पत्रकार सुरक्षा हेतु विशेष कानून बनाये जाने व उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने की मांग भी करता रहा है किन्तु अभी तक किये गए प्रयास नक्कारखाने में तूती की आवाज़ वाली लोकोक्ति को ही चरित्रार्थ करते रहे हैं इसकी एक वजह यह भी रही है कि हर पत्रकार अपने को तीसमार होने का मिथ्या भ्रम पाले हुए है जिसके चलते तमाम हादसों के वावजूद कभी न तो पत्रकार संगठन एक जुटता के साथ इस पर विचार करने हेतु  बैठे न ही कोई ठोस पहल करने के लिए कभी एकत्रित हुए. आज भी दूसरे की झोपडी जलती हुई देख अपनी झोपडी सही सलामत देख ज्यादातर पत्रकार  चुप्पी ही साधे हैं. जब की इस बिरादरी में भीड़ ऐसी की पूछिए मत,पहुँच में मुख्यमंत्री और मंत्री के घर ऑफिस तक, खाने पीने में एकदम चौकस,लेकिन कुछ को छोड़ के ज्यादातर कलम के मामले में मासाअल्लाह ,शायद ही कोई प्रेस कांफ्रेंस हो जहाँ ये ना पाए जाएँ, डग्गा हो तब तो बिना बुलाये भी हाज़िर ,सवाल लेने में भी ये एकदम कड़क हैं किन्तु रहते प्रेस विज्ञप्ति के सहारे हैं. कई तो खामखाह वाले ही हैं जो कुछ लिखते ही नहीं हैं लेकिन हाज़िर हर जगह  रहते है मेरी इस तरह की पोस्ट से ऐसे खामखाह लोग नाराज़ ही नहीं होते बल्कि मुझे न जाने क्या क्या बताना शुरू कर देते  हैं जब की सच में मैं ऐसी किसी जगह भी दिखने वाला जीव नहीं हूँ. खैर भले ही मुझे कुछ समझो कुछ कहो लेकिन मैं फिर कह रहा हूँ की इतनी छितराई हुई किसी प्रोफेसन की कोई बिरादरी नहीं है जितनी की यह बिरादरी है.

मतभेद होना स्वाभाविक है लेकिन मनभेद होना ठीक नहीं. आइये एकजुट होइए संगठित करिए बिरादरी को और आवाज़ उठाइए एक साथ, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाये जाने की, पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने की, वरना आज किसी की झोपडी जलती देख आप चुप हैं कल जब आपकी झोपडी जल रही होगी तो वो चुप होगा...... लेकिन सच यह होगा कि झोपडियां दोनों की खाक हो चुकी होंगी उसकी भी और आपकी भी . कृपया इस पोस्ट को अन्यथा न लें लिखने में व्यक्त भावना को समझने का प्रयास करें साथ ही विचार अवश्य करें.

रिजवान चंचल जनजागरण मीडिया मंच, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय महासचिव हैं

मोबाइल-7080919199 

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