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ब्राज़ील से लेकर भारत तक

नेता, सेना, कारपोरेट, और ‘मीडिया कार्टेल’ की साँठगाँठ 

रवीश कुमार। भारत की मीडिया को शायद वक्त न मिले लेकिन अगर आप ब्राज़ील में हो रही घटना पर नज़र डालेंगे तो नेता, सेना, कारपोरेट, और ‘मीडिया कार्टेल’ की साँठगाँठ के ख़तरे को समझ पायेंगे । यह ज़रूर है कि ब्राज़ील की विस्थापित राष्ट्रपति दिल्मा रॉस्सेफ़ भी अपनी ग़लतियों से फँसी लेकिन उन्हें हटाने के जो तरीके अपनाये गए वो ख़तरनाक हैं । कम से कम वहाँ से आ रही ख़बरों से यही संकेत मिल रहे हैं ।

आपको पता ही है कि ब्राज़ील की राष्ट्रपति दिल्मा रॉस्सेफ़ पर महाभियोग चलाया गया था। दिल्मा नई नई राष्ट्रपति बनी थी मगर उनकी चुनी हुई सरकार पर तमाम आरोप मढ़ दिये गए । उन्होंने भी पेशेवर लोगों को सरकार में लाने के नाम पर ऐसे लोग लाए जिनके कारपोरेट से घनिष्ठ रिश्ते थे । दिल्मा भी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नीति लागू करने लगीं । इधर मीडिया उनके सामाजिक और भूमि सुधारों की धज्जियां उड़ाने लगा ।

द इंटरसेप्ट नाम की साइट से पता चलता है कि इसके लिए विपक्ष के नेताओं, सेना और मीडिया का एक गुट बन गया । दिल्मा भ्रष्टाचार के एक मामले में कदम उठा रही थीं । सबको लगा कि अगर वाक़ई ऐसा हुआ तो इसके तार हर किसी तक पहुँचेंगे । उनके हटने के बाद द इंटरसेप्ट ने लिखा है कि ब्राज़ील के एक बड़े अख़बार में निम्न सदन में महाभियोग के लिए हुए मतदान से पहले हुई बातचीत का विवरण छापा है । दिल्मा को विस्थापित कर बने नए योजना मंत्री रोमेरो जुका तेल कंपनी के एक पूर्व अधिकारी से फोन पर बात कर रहे हैं । दिल्मा ” कार वाश” भ्रष्टाचार की जाँच करा रही थीं जिनके निशाने पर ये दोनों थे । बातचीत में दोनों सहमत हैं कि बचने का एक ही रास्ता है कि दिल्मा को हटा दिया जाए ।

बातचीत के ब्यौरे से पता चलता है कि जुका के साथ सेना के बड़े अधिकारी और वहाँ की सुप्रीम कोर्ट के कई जज और मीडिया समूह भी तैयार हो गया है । जुका इसे “national pact” कहते हैं । इस खेल में दिल्मा को हटा कर राष्ट्रपति मिशेल तेमर भी शामिल हैं । तेमर खुद भ्रष्टाचार के कई मामलों में शामिल हैं । जुका तेमर की पार्टी के नेता हैं ।

द इंटरसेप्ट के मुताबिक़ ब्राज़ील सदमे में है । अभी और ख़ुलासे होने हैं लेकिन बातचीत किसने रिकार्ड की है और किसके इशारे पर हुई है यह साफ नहीं है । महाभियोग के दौरान दिल्मा ने उनकी सरकार को विस्थापित करने की साज़िश का आरोप लगाया था मगर मीडिया के नशे में चूर जनता ने ध्यान नहीं दिया । भारत का भी मीडिया ऐसा ही कुछ उन्माद पैदा करता है जिससे दूसरी बात या तथ्य प्रस्तुत करने की गुज़ाइश न रहे । इंटरसेप्ट लिखता है कि लोकतांत्रिक तरीके से दिल्मा के विरोधी कभी चुन कर नहीं आ सकते थे इसलिए दक्षिणपंथी गुटों के एजेंडा को थोपने के लिए बेदख़ल करना ज़रूरी था क्योंकि इस एजेंडा को ब्राज़ील की जनता कभी स्वीकार नहीं करती ।

अगर यह सही है तो आप देखिये कि किस तरह लोग मिलकर जनता का गला घोंटने के लिए खेल खेल सकते हैं । ब्राज़ील के नए राष्ट्रपति तेमर ने सत्ता में आते ही उन लोगों को पदों पर बिठाना शुरू कर दिया जिन पर आरोप लगे थे । राष्ट्रवाद के नशे में लोग इस खेल को समझ ही नहीं पाए । सुधार के नाम पर एयरपोर्ट से लेकर तमाम सरकारी संसाधन बेचे जा रहे हैं । बिना जनता की सहमति के । जुका ने माना है कि बातचीत सही है मगर ग़लत तरीके से समझा जा रहा है । कहा है कि हमारी बातचीत ” car wash ” भ्रष्टाचार को लेकर नहीं हो रही बल्कि ब्राज़ील को संकट से उबारने को लेकर हो रही है । तेमर का महिमामंडन करने वाला मीडिया कई दिनों तक इन तथ्यों को छापा ही नहीं कि सर्वेक्षणों में उन्हें कितने मत पड़े । ब्राज़ील में तेमर के ख़िलाफ़ रोज़ प्रदर्शन हो रहे हैं । आख़िरी जनमत सर्वेक्षण में तेमर को दो प्रतिशत मत मिला है । प्रदर्शनों से बौखला कर संस्कृति मंत्रालय बंद कर दिया गया है । अब आप समझे होंगे कि क्यों साहित्यकारों कलाकारों पर हमला होता है क्योंकि ये लोग सत्ता के ख़िलाफ़ होते हैं ।

इस लेख को भारत से क्यों शुरू किया क्योंकि यहाँ के मीडिया का चरित्र यही हो गया है । सेना और अदालत का सहारा लेकर मीडिया यहाँ भी कोरपोरेट हितों को बढ़ावा देना लगा है । कारपोरेट के राजनीतिक हित भी होते हैं इसलिए भी वे ख़तरनाक है । मीडिया का काम है धारा के ख़िलाफ़ जाकर अलग मंच से तथ्यों का पता करना  न कि धारा बनाना। ब्राज़ील का केस राजनीतिक पतन का भी उदाहरण है ।

भारत में भ्रष्टाचार को लेकर इतना बड़ा आंदेलन हुआ लेकिन लोकपाल पर सब चुप हो गए हैं । साठ साल से भ्रष्टाचार था तो दो तीन सौ नेता और उद्योगपति जेल में होने चाहिए थे । जाँच हुई न सजा मगर भ्रष्टाचार के ख़त्म होने का एकतरफा एलान कर दिया गया । बैंकों पर शिकंजा कसा जा रहा है कि वे क़र्ज़ वसूले । माल्या भाग गया मगर सारा फोकस माल्या पर है । दूसरे क़र्ज़दारों पर ध्यान नहीं जा रहा । पंजाब बैंक को भारतीय बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घाटा हुआ है । बैंकों की वसूली से कौन परेशान हो रहा है । कौन लोग हैं जो रघुराम राजन को निशाना बना रहे हैं । जब देश की अर्थव्यव्स्था के चल पड़ने के दावे किये जा रहे हैं तो राजन पर चौपट करने के आरोप कौन लगा रहा है । मेडिकल प्रवेश परीक्षा में आपने सर्वदलीय खेल देख ही लिया है ।

इस कार्टेल को समझिये और चीज़ों को इस तरह से देखिये कि आप असहाय जनता है और मीडिया आपका नहीं है । वर्ना अचानक ऐसा क्या हो गया है कि चैनलों पर आसाराम को छोड़े जाने को लेकर इंटरव्यू चलने लगे हैं । ब्राज़ील का मीडिया उद्योगपतियों और उनके चमचे नेताओं के इशारे पर शकिरा डाँस कर रही है । भारत ती मीडिया आपको राष्ट्रवाद पढ़ा रही है जैसे आप इस देश से प्यार ही नहीं करते थे । इसीलिए कहता हूँ टीवी कम देखिये ।

नोट: ब्राज़ील के मंत्री जुका को इस मामले के उजागर होने के बाद मंत्रीमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है ।

(रवीश कुमार जी के ब्लॉग कस्बा से साभार) 

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