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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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आजादी आंदोलन में विद्यार्थी जी का योगदान अविस्मरणीय

गणेश शंकर विद्यार्थी की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी का आयोजन 

हरदा। गणेश शंकर विद्यार्थीजी की 86वीं पुण्यतिथि पर हरिभूमि कार्यालय चौबे कालोनी में विचार गोष्ठी का आयोजन शनिवार को अपरान्ह 5 बजे से किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शिक्षाविद्  राघवेन्द्र पारे रहे और अध्यक्षता जिलाध्यक्ष  प्रमोद सोमानी ने की और विशेष अतिथि के रूप में टिममनी ब्लाक अध्यक्ष बृजेश रिछारिया, पत्रकार डीएस चौहान, दिनेश तिवारी, मुकेश दुबे, फैयाज खान, विनोद दुबे, राहुल जैन, कुमारी काजल विश्नोई, दीपा कौशल, पवन सुख जैन खंडवा, आरएस तिवारी बुरहानपुर, गणेश साहू खातेगांव, साहिद खान नसरूल्लागंज आदि उपस्थित रहे। श्री पारे ने विद्यार्थी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आजादी आंदोलन में विद्यार्थी जी का अविस्मरणीय योगदान कभी भूलाया नहीं जा सकता। उन्होंने प्रताप नामक पत्रिका में आंदोलनकारियों में नई स्फूर्ति फूंकने वाले लेखों के माध्यम से लोगों में जेहाद करने की अलख जगाई। जिसकी बदौलत देश आजाद हुआ। जिलाध्यक्ष प्रमोद सोमानी ने कहा कि विद्यार्थीजी का जीवन सादगी पूर्ण था। सादा जीवन उच्च विचार के मूलमंत्र को जीवन में अपनाया और उसे मूर्तरूप देने में तन्मयता से कर्तव्यों का निर्वहन किया। उनका योगदान सदैव याद किया जाता रहेगा।

पत्रकार डीएस चौहान अपने उद्बोधन में  कहा कि आज पत्रकारिता के उस पुरुष की पुण्यतिथि है जिसने अपनी जान देने में भी जरा सी हिचकिचाहट नहीं की जब हमारा देश गुलाम था तब ये महापुरुष दैनिक प्रताप नाम से समाचारपत्र का प्रकाशन करते थे लेकिन इनका मकसद था। देश के हिन्दू व मुसलमान को एक करना ओर अग्रेजों की चाल को नाकाम करना था इनका जीवन मे जितना लिखो कम है। जब अग्रेजों ने भगतसिंह सुखदेव राजगुरू को फांसी दे दी तो देश मे युवाओं का खून खौल उठा और अग्रेजों ने इस माहौल को बदलने के लिए जगह-जगह हिन्दू व मुस्लिम दंगे करवा दिये जब ये पत्रकारिता का योद्धा मुसलमान मोहल्ले जो लखनऊ के लोखंडेवाला में है पहुंच गया और मुस्लिम बन्धु को समझने लगा मगर समझते समय इस पर हमला हो गया और एकता कायम करने मे आपनी जान देनी पड़ी जबकि उनके दोस्तों ने रोका मगर वे नहीं माने। 25 मार्च 1931 को इनकी हत्या कर दी गयी आज देश मे कुछ पत्रकार स्वार्थ की आड़ में पत्रकारिता को बदनाम कर राजनीतिक दलालों की पत्रकारिता कर रहे ऐसे पत्रकारों को शर्म आनी चाहिए। फैयाज खान ने कहा कि विद्यार्थी जी मूर्धन्य पत्रकार थे। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से लोगों को जागरूक कर देश हित में जान न्यौछावर करने के लिए प्रेरित किया। पत्रकारिता हमारी मां-बहिन बेटी है। इसको समझे और सच्चाई का आज से ही दामन थामे, तब ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। गणेश शंकर विद्यार्थी की जिन्होंने अपना जीवन सच्चाई की कलम पर न्यौछावर कर दिया। जिले सहित देश के पत्रकारों को देशहित व समाजहित में काम करना चाहिए।

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