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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित लघु पुस्तिकाओं का दिल्ली में लोकार्पण

लोकार्पण कार्यक्रम के साथ धारा 370 पर परिसंवाद का आयोजन        

भोपाल। पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा धारा 370 के प्रभावों का विश्लेषण करती हिन्दी तथा अंग्रेजी की लघुपुस्तिका तथा 'जम्मू कश्मीर की वास्तविकता एवं प्रतिमाएँ: मीडिया की भूमिका' विषयक राष्ट्रीय संविमर्श के प्रतिवेदन का लोकार्पण दिल्ली के कॉस्टिट्यूशन क्लब में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर धारा 370 पर परिसंवाद का आयोजन भी किया गया। यह कार्यक्रम जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र, नई दिल्ली तथा पत्रकारिता विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र के निदेशक श्री जवाहरलाल कौल, श्री आशुतोष भटनागर, वरिष्ठ पत्रकार श्री एन.के.सिंह, उपस्थित थे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जम्मू कश्मीर एवं धारा 370 विषयों के विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता श्री अरूण कुमार थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की।

विश्वविद्यालय द्वारा धारा 370 के प्रभावों का विश्लेषण करते हुये एक शोध कार्य सम्पन्न कराया गया है। यह शोध कार्य वरिष्ठ पत्रकार श्री संत कुमार शर्मा द्वारा किया गया है। इस शोध कार्य के निष्कर्षों पर आधारित लघुपुस्तिका 'धारा 370 के प्रभावों का विश्लेषण' तथा इसका अंग्रेजी अनुवाद 'इम्पेक्ट एनालिसिस ऑफ आर्टिकल 370' का लोकार्पण किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा 24 से 26 जनवरी 2014 को सम्पन्न जम्मू कश्मीर की वास्तविकता एवं प्रतिमाएँ: मीडिया की भूमिका विषयक राष्ट्रीय संविमर्श की प्रकाशित रिपोर्ट का लोकार्पण भी इस कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर पर आयोजित परिसंवाद 'धारा 370 के प्रभाव' का विषय प्रवर्तन करते हुये श्री आशुतोष भटनागर ने कहा कि भारतीय संविधान में धारा 370 के प्रावधानों तथा इसे हटाये जाने संबंधी उल्लेख भी किया गया है, परंतु इसे लगातार बनाये रखने का भ्रम फैलाया जा रहा है। धारा 370 पर अधिकांश वे बाते होती हैं जो उसमें है ही नहीं। इसे बनाये रखने अथवा हटाये जाने पर आज तार्किक बहस की आवश्यकता है। तथ्य आधारित जानकारी लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य वक्ता श्री अरूण कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर के मुद्दों को लेकर सही जानकारी का अभाव है। आज इस विषय पर कानूनी प्रपत्रों के आधार पर चर्चा होने की आवश्यकता है। इस विषय पर तीन पक्ष महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं- शिक्षा जगत, कानूनविद एवं मीडिया। आज जम्मू कश्मीर के विषय में सही तथ्य एवं तार्किक विचारों से लोगों को शिक्षित करने की आवश्यकता है। कानूनविद सही तथ्य एवं विधिक आधार पर जम्मू कश्मीर के मुद्दे का विश्लेषण कर सकते हैं तथा मीडिया इस संबंध में सही तथ्यों के विश्लेषण से जनमानस तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. कुठियाला ने कहा कि जम्मू कश्मीर के विषय में गलत धारणाओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, निदेशक, जनसंपर्क द्वारा जारी

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