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मीडिया महफिले मुशायरा में छात्र-छात्राओं ने बांधा समां

August 13, 2017

स्वतंत्रता दिवस और अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर कार्यक्रम

पटना/ कम्युनिटी राइट्स एंड डेवलपमेंट फ़ाउंडेशन (सीआरडीएफ़) और स्नातकोत्तर उर्दू विभाग, पटना विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस और अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त) के अवसर पर विभाग के सभागार में शनिवार को मीडिया महफ़िले मुशायरा का आयोजन किया गया। इस मुशायरे में विभिन्न विश्वविद्यायों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को ही कविता पाठ का अवसर दिया गया। प्रतिभागी विद्यार्थियों ने हिन्दी और उर्दू में विभिन्न विषयों पर अपनी शायरी और काव्य रचनाओं से श्रोताओं को झूमने और ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। वहीं अनेक छात्र-छात्राओं ने अपनी गंभीर रचनाओें से अतिथि के रूप में उपस्थित कवियों और विद्वानों को अपनी ओर आकर्षित किया। कार्यक्रम में सौ से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 

मुशायरे का उद्घाटन बिहार उर्दू अकादमी के सचिव मुश्ताक़ अहमद नूरी ने किया। कार्यक्रम में विशेष रूप से भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और पत्र सूचना कार्यालय पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार, प्रो. जावेद हयात, डॉ. शहाब ज़फ़र आज़मी, डॉ. सरवर आलम नदवी, डॉ. खुर्शीद अनवर, सीआरडीएफ़ के सचिव सैयद जावेद हसन, नवाज़ शरीफ़, इमरान सग़ीर और साक़िब ज़िया के अलावा पटना महाविद्यालय के कई शिक्षक शामिल हुए।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि मुश्ताक़ अहमद नूरी और संजय कुमार ने इस प्रकार के मुशायरे के आयोजन की सराहना की और कहा कि ऐसा अवसर बहुत ही कम देखने को मिलता है जब केवल छात्र-छात्राओं को ही उनकी प्रतिभा सामने लाने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस प्रकार के आयोजन से भाषा एवं साहित्य को नई पीढ़ि के बीच में प्रसारित करने और इनमें साहित्यिक और काव्य रचनाओं के प्रति दिलचस्पी पैदा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने सीआरडीएफ़ और उर्दू विभाग, पटना विश्वविद्यालय की इस पहल को आयाम देने की बात कही।

वहीं सीआरडीएफ़ के सदस्य सचिव सैयद जावेद हसन ने कहा कि इस प्रकार के मुशायरे से न केवल नई पीढ़ी के माध्यम से हिन्दी-उर्दू का साझा विकास होगा बल्कि भारत की साझा संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही आपसी सौहार्द्र को सशक्त बनाने की दिशा में भी यह एक कारगर पहल साबित होगी।

डॉ. शहाब ज़फ़र आज़मी ने इस अवसर पर कहा कि यह एक अनोखी पहल है। उर्दू विभाग को जब भी इस प्रकार के आयोजन का प्रस्ताव मिलेगा छात्र हित में इसके आयोजन में हर संभव सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों को आज जो अवसर मिला है उसमें उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि उनमें क्षमता की कमी नहीं है। 

वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जावेद हयात ने कहा कि इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने  अपनी रचना से काफ़ी आकर्षित किया है। उन्हें विश्वास है कि भविष्य में वे शायरी के फलक पर खुद को स्थापित करने में कामयाब होंगे।

मुशायरे का संचालन रिसर्च स्कॉलर कामरान ग़नी सबा ने किया। उनकी शायरी ‘सच्चाई की राहों पे सदा साथ चलेंगे/हम एक थे, हम एक हैं, हम एक रहेंगे’ को श्रोताओं ने काफ़ी पसंद किया। इसके अलावा मनीष कुमार यादव की रचना ‘शहीदों के कटे शेष लिखूं/या टुकड़ों में बंटता देश लिखूं’, अफ़शां बानो के ‘ ऐसा कोई कहां जिसे तुझसा बताएं हम/दिल में बसा के जिसको ग़ज़ल गुनगुनाएं हम’, ऋचा शर्मा की शायरी ‘तुम याद तो आते हो, नज़र क्यों नहीं आते/रहते हो इसी शहर में, घर क्यों नहीं आते’ पर श्रोता झूम उठे’, मो. असलम की ‘रात जो चांद न निकला तो तेरी याद आई/किसी ने पास बिठाया तो तेरी याद आई’, तेजप्रताप कुमार तेजस्वी की ‘एक मां का स्तन सूखा, बच्चों के लिए लाचार है/एक ग्लास दूध की ख़ातिर मां, हर चरणों में लगाती दरबार है‘, बीना कुमार सिंह की ‘जीवन एक पहेली है/कभी दुश्मन कभी सहेली है’, फ़रह नाज़ की ‘तू फ़िक्रमंद क्यों है मेरे दिल को तोड़कर/मैं खुद ही जा रहा हूं तेरा शहर छोड़कर’ ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इनके अलावा जिन अन्य विद्यार्थियों ने कविता पाठ किया उनमें मो. ज़ियाउलअज़ीम, राजन कुमार राजन, आरिफ़ हुसैन नूरी, बिकास कुमार, विशांत कुमार पाण्डेय, रौशन वर्मा ‘रौशन’, ग़ौस-ए-आज़म, रवीन्द्र रस्तोगी, नेमत शमा, नेहाल ख़ान शामिल हैं।

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