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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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उर्दू के पत्रकार और समाजसेवी निसार अहमद आसी का इंतकाल

मुंगेर / बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के मुंगेर इकाई  के पूर्व अध्यक्ष,  उर्दू के पत्रकार और समाजसेवी निसार अहमद आसी का आज सुबह इंतकाल हो गया। तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित निसार अहमद आसी  छह दशको से पत्रकारिता और समाजसेवा  के क्षेत्र में सक्रिय थे।                                 

मुंगेर में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के गठन और उसके संचालन में इनकी अहम भूमिका रही। पत्रकारिता के लिए मुंगेर के तात्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त नवीन चंद्र झा ने इन्हें सम्मानित भी किया था। उनके निधन से पत्रकारिता, समाजसेवा के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है ।

जीवनयापन के लिए पकौड़े बेचने का काम करते रहे। इन्होंने अपने जीवन लाशों के लिए समर्पित कर दिया था।  आमतौर पर लोग सड़क पर पड़ी किसी लावारिस लाश से मुंह मोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन निसार साहब ऐसा नहीं करते, बल्कि वो शव को सुपुर्द-ए-खाक भी करते हैं। 1967-68 में शहर के सुतूरखाना में एक समारोह में भोजन में जहर मिले होने की वजह से 47 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें ज्यादातर बच्चे थे। इनका अंतिम संस्कार निसार साहब ने ही किया था। बता दें कि निसार अहमद ने 1972 में पूरबसराय में नेशनल उर्दू गर्ल्स कॉलेज की स्थापना की थी। निसार साहब  ने औरंगजेब द्वारा बनवाई गई जामा मस्जिद के एक कोने में बैठकखाना बना रखा था, जहां पर किसी और की नहीं, बल्कि लावारिस शवों की तस्वीरें लगी हैं। निसार  साहब की मानें तो एक शव के अंतिम संस्कार में दो से तीन हजार रुपये का खर्च आता था। इस राशि का इंतजाम वह चंदा और वृद्धा पेंशन से मिलने वाली रकम से यह काम करते थे। अब तक 2091 शवों का अंतिम संस्कार कर चुके थे ।

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