मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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मीडिया के सरोकारों की नई पत्रिका ‘जनसंचार विमर्श’

पत्रकारिता शिक्षा एवं शोध  की है यह पत्रिका

आज बाजार में मीडिया पर कई  तरह की पत्रिकाएं उपलब्ध हैं, लेकिन ये  शोधपरक लेखों या विचारों से पूर्ण नहीं दिखती हैं। हालांकि बहुत सी ऐसी पत्रिकाएं हैं जो इस पर निरंतर काम कर रही हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाने का एक और प्रयास है शोधपरक पत्रिका "जनसंचार विमर्श"। जो लोगों से जनसंवाद कर रही  है ।  पत्रिका का प्रथम अंक आ चुका है ।

"जनसंचार विमर्श" के संपादक  है युवा पत्रकार एवं सैम हिग्गिनबाट्म इंस्टीटयूट आफ एग्रीकल्चर,टेक्नोलाजी एण्ड साईंसेज़, नैनी, इलाहाबाद के स्कूल आफ फिल्म एण्ड मास कम्यूनिकेशन विभाग के अतिथि प्रवक्ता संदीप कुमार श्रीवास्तव ।

मीडिया एक ऐसा नाम जिससे शायद आज विश्व का कोई व्यक्ति अपरचित हो। पत्रकारिता का मूल उददेश्य है समाज को सूचना देना शिक्षित करना एवं मनोरंजन। लेकिन आज की पत्रकारिता शिक्षा शायद वह आदर्श स्थापित नहीं कर पा रहा है। इसके कारण आज की पत्रकारिता अपने मिशन से भटकती नजर आ रही है। शायद आजादी के पूर्व पत्रकारिता सिर्फ मिशन के लिए हुआ करती थी। परंतु आज पत्रकारिता किस दिशा की ओर जा रही है इस पर हम सभी लोगों को विचार करना होगा। इस भटकाव को आखिर किस तरह से बौद्धिक स्तर पर रोकने प्रयास किया जाए, इसके लिए जरुरी है शोध परक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। यह तभी संभव  है जब इस विषय पर स्तरीय शोध कार्य हों क्या आज पत्रकारिता की शिक्षा इस पर ध्यान दे पा रही है। आज पत्रकारिता शिक्षा में शोध का बड़ा अकाल देखा जा रहा है। विश्वस्तरीय शोध की आवश्यकता हर विद्यार्थी महसूस कर रहा है।पर वह अपनी बात आखिर किसके माध्यम से लोगों तक पहुंचाए यह आज की शिक्षा की बड़ी समस्या है।  इसी पर जनसंवाद कायम करने का एक प्रयास यह शोधपरक पत्रिका करेगी। आज पत्रकारिता के सरोकारों को सही गलत बताने के लिए बाजारमें अनेक तरह की पत्रिकायेँ दम भरती नज़र आती हैं। रोज नये-नये आयाम बताकर पत्रकारिता को नयी दिशा देने की बात की जा रही है। लेकिन क्या वाकई पत्रकारिता शिक्षा आज अपने मूल्यों को बचाती नज़र आती है। आज हर आदमी सबसे पहले यह पूछता है? कि आप राडिया से हो या मीडिया से। इसका जवाब आखिर क्यों नहीं मीडिया दे पा रहा है। इसके पीछे एक ही कारण समझ में आता है वह  है स्तरीय शोध कार्यों  एवं विश्वस्तरीय पत्रिकाओं का अभाव। इसका जवाब हम सभी को मिलकर खोजना होगा। इन्ही मुद्दों को लेकर "जनसंचार विमर्श" आया है । इसके पहले अंक ईएसए मीडिया के जाने माने जानकारों के आलेख है । इनमें ,वर्तिका नंदा ,सुभाष धूलिया ,संजय द्विवेदी,श्याम लाल यादव सहित कई शामिल है ।

पत्रिका - "जनसंचार विमर्श"

संपादक - संदीप कुमार श्रीवास्तव

अंक - जनवरी-जून 2012

मूल्य - रु.100/-

संपादकीय पता - ut -201,फेज -2,उत्कर्ष  अपार्टमेंट ,239/1, तुलाराम बाग, इलाहाबाद-211006

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