कुछ भी करो, हमारे इंसानियत वतन बचाने की कोई जुगत करो। कहीं किसी को खबर है नहीं। खबरनवीस भी कोई नहीं। चौबीसों घंटे खबरों का जो फतवा है, नफरत का जो तूफां है खड़ा, वह केसरिया मीडिया का आंखो देखा हाल है।
पलाश विश्वास / आज जिस शख्स को सबसे ज्यादा नापसंद करता रहा हूं और जिसके मुखातिब होने से हमेशा बचता…
















