लोकेन्द्र सिंह / स्वामी विवेकानंद सिद्ध संचारक थे। उनके विचारों को सुनने के लिए भारत से लेकर अमेरिका तक लोग लालायित रहते थे। लेकिन हिन्दू धर्म के सर्वसमावेशी विचार को लेकर स्वामीजी कहाँ तक जा सकते थे? मनुष्य देह की एक मर्यादा है। भारत का विचार अपने वास्तविक एवं उदात्त रूप में सर्वत्र पहुँचे, वह गूँज…
Blog posts : "feature"
दूरदर्शन: समाचार, संस्कार व संतुलन की पाठशाला
15 सितंबर 1959 को शुरू हुआ था दूरदर्शन
डॉ. पवन सिंह/ दूरदर्शन, इस एक शब्द के साथ न जाने कितने दिलों की धड़कन आज भी धड़कती है। आज भी दूरदर्शन के नाम से न जाने कितनी पुरानी खट्टी-मिट्ठी यादों का पिटारा हमारी आँखों के सामने आ जाता है। दूरदर्शन के आने के बाद न जाने कितनी पीढ़ियों ने इसके क्रमिक विकास…
हिन्दी बने राष्ट्र भाषा
“हिन्दी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है।“
डॉ. सौरभ मालवीय/ ये शब्द बहुभाषाविद और आधुनिक भारत में भाषाओं का सर्वेक्षण करने वाले पहले भाषा वैज्ञानिक जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन के हैं। नि:संदेह हिन्दी देश के एक बड़े भू-भाग की भाषा है। महात्मा गांधी ने हिन्दी को जनमानस की भाषा कहा था। वह …
गौरवशाली इतिहास को समेटे एक परिसर
आईआईएमसी के 58 वें स्थापना दिवस, 17 अगस्त पर विशेष
प्रो.संजय द्विवेदी/ भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) ने अपने गौरवशाली इतिहास के 58 वर्ष पूरे कर लिए हैं। किसी भी संस्था के लिए यह गर्व का क्षण भी है और विहंगावलोकन का भी। ऐसे में अपने अतीत को देखना और भविष्य के लिए लक्ष्य तय करना बहुत महत्वपूर्ण…
ज़िम्मेदारी व समय की मांग है 'सिटिज़न जर्नलिज़्म'
डॉ. पवन सिंह मलिक/ सिटिज़न जर्नलिज़्म शब्द जिसे हम नागरिक पत्रकारिता भी कहते है आज आम आदमी की आवाज़ बन गया है। यह समाज के प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुए, संबंधित विषय को कंटेंट के माध्यम से तकनीक का सहारा लेते हुए अपने लक्षित समूह तक पहुंचाने का एक ज़ज्बा है। वर्तमान में नागरिक पत्रकारिता कोई नया शब्द …
अभिव्यक्ति का शानदार मंच सिटिज़न जर्नलिज्म
अनिता गौतम/ सिटिज़न जर्नलिज़्म, यह सिर्फ शब्द भर नहीं बल्कि व्यक्ति समाज, देश और दुनिया की जरूरत है। इस अंग्रेजी शब्द का मूल अनुवाद संभवतः नागरिक पत्रकारिता हो परंतु अलग अलग आयाम में फिट बैठता यह शब्द आम अवाम की मजबूत आवाज बन चुका है। देश दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और भौगोलिक बदलाव क…
दीनदयाल उपाध्याय: भारतीय पत्रकारिता के पुरोधा
25 सितंबर, जयंती पर विशेष
पवन सिंह मलिक/ किसी ने सच ही कहा है कि कुछ लोग सिर्फ समाज बदलने के लिए जन्म लेते हैं और समाज का भला करते हुए ही खुशी से मौत को गले लगा लेते हैं। उन्हीं में से एक नाम है दीनदयाल उपाध्याय का। जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी समाज के लोगों को ही समर्पित कर दी। पंडित दीनदयाल उप…
दूरदर्शन: समाचार, संस्कार व संतुलन की पाठशाला
15 सितंबर दूरदर्शन दिवस पर विशेष
डॉ. पवन सिंह मलिक/ दूरदर्शन, इस एक शब्द के साथ न जाने कितने दिलों की धड़कन आज भी धड़कती है। आज भी दूरदर्शन के नाम से न जाने कितनी पुरानी खट्टी-मिट्ठी यादों का पिटारा हमारी आँखों के सामने आ जाता है। दूरदर्शन के आने के बाद न जाने कितनी पीढ़ियों ने इसके क्रमिक विकास …
याद किए जाएंगे उर्दू पत्रकार मौलवी बाकर अली
बिहार उर्दू मीडिया फोरम 16 सितंबर को उनकी शहादत दिवस मनायेगा
पटना/ इतिहास गवाह है कि पत्रकारिता ने दुनिया की बड़ी बड़ी क्रांत्रियों को जन्म दिया. कई शासकों का तख्ता पलट किया. जब देश में स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था उस वक्त भारतीय भाषाओं में उर्दू ही एकमात्र ऐसी थी जो देश के कोने-कोने में समझी और बोल…
डिजीटल अम्ब्रला के नीचे शासन और सरकार
हुई करोड़ों की बचत!
मनोज कुमार/ क्या आप इस बात पर यकीन कर सकते हैं कि पेपरलेस वर्क कर कोई विभाग कुछ महीनों में चार करोड़़ से अधिक की राशि बचा सकता है? सुनने में कुछ अतिशयोक्ति लग सकती है लेकिन यह सौफीसदी सच है कि ऐसा हुआ है. यह उपलब्धि जनसम्पर्क संचालनालय ने अपने हिस्से में ली है. हालांकि यहां स्म…
पत्रकारिता की उजली परंपरा के वाहक
स्वदेश समूह के प्रधान संपादक राजेंद्र शर्मा की हीरक जयंती पर (18 जून) पर विशेष
प्रो.संजय द्विवेदी/ उनका हमारे बीच होना उस उम्मीद और आत्मविश्वास का होना है कि सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। पत्रकारिता के छीजते आभामंडल, प्रश्नांकित हो रही विश्वसनीयता और बाजार की तेज हवाओं के बीच जब ‘विचार की पत्रकारिता’ …
कम्युनिटी रेडियो : सुन और सुना रहे हैं आदिवासी समुदाय
विश्व रेडियो दिवस 13 फरवरी पर विशेष
मनोज कुमार/ मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों में कम्युनिटी रेडियो की गूंज सुनाई दे रही है. राज्य के सुदूर आदिवासी अंचलों के आठ जिलों में कम्युनिटी रेडियो की स्थापना की गई है. इन रेडियो स्टेशनों के माध्यम से ग्रामीण एवं आदिवासी समुदाय में सूचना, शिक्षा एवं मनोरंजन क…
कैलेंडर के साथ जिंदगी भी बदल जाए तो बेहतर
प्रो. संजय द्विवेदी/ यह साल जा रहा है, बहुत सी कड़वी यादें देकर। कोरोना और उससे उपजे संकटों से बने बिंब और प्रतिबिंब आज भी आंखों में तैर रहे हैं और डरा रहे हैं। यह पहला साल है, जिसने न जाने कितने जानने वालों की मौत की सूचनाएं दी हैं। पहले भी बीमारियां आईं, आपदाएं आईं किंतु उनका एक वृत्त है, भूगोल है…
‘प्रताप बाबा’
गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती 26 अक्टूबर पर विशेष
ज़िया हसन। कलम की ताकत हमेशा से ही तलवार से अधिक रही है और ऐसे कई पत्रकार हैं, जिन्होंने अपनी कलम से सत्ता तक की राह बदल दी। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने महात्मा गांधी के अहिंसा का समर्थक और सक्रिय सहयोग देने वाला, जिसने पत्रकारिता को नयी बुलंदी दी- …
कुलपति नहीं, मैं मीडिया शिक्षक रहना चाहता हूं: प्रोफेसर सुरेश
मनोज कुमार/ माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर केजी सुरेश मध्यप्रदेश की पत्रकारिता, खासकर मध्यप्रदेश की पत्रकारिता शिक्षा में भले ही अनचीन्हा नाम हो सकता है लेकिन देश और दुनिया की पत्रकारिता और पत्रकारिता शिक्षा में सुप्रतिष्ठित नाम है. प्रोफेसर केजी सु…
पत्रकारिता में शुचिता, नैतिकता और आदर्श के हामी दीनदयाल
पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती 25 सितम्बर पर विशेष
लोकेन्द्र सिंह / पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजनीतिज्ञ, चिंतक और विचारक के साथ ही कुशल संचारक और पत्रकार भी थे। उनके पत्रकार-व्यक्तित्व पर उतना प्रकाश नहीं डाला गया है, जितना कि आदर्श पत्रकारिता में उनका योगदान है। उनको सही मायनों में राष्ट्रीय पत्रकार…
61 साल का हुआ दूरदर्शन
15 सितंबर 1959 को प्रारंभ, पहले ‘टेलीविजन इंडिया’ नाम था
डॉ. पवन सिंह मलिक/ दूरदर्शन, इस एक शब्द के साथ न जाने कितने दिलों की धड़कन आज भी धड़कती है। आज भी दूरदर्शन के नाम से न जाने कितनी पुरानी खट्टी-मिट्ठी यादों का पिटारा हमारी आँखों के सामने आ जाता है। दूरदर्शन के आने के बाद पिछले साठ वर्षों म…
सौ साल का हुआ "आज"
1920 में 5 सितंबर को शुरू हुआ “आज” समाचार पत्र सौ साल बाद भी निरंतर प्रकाशित हो रहा है, पटना से भी 41 वर्षों से निकल रहा है
डॉ. ध्रुव कुमार/ भारत की पत्रकारिता के इतिहास में 1920 ईस्वी का एक विशेष महत्त्व है। इस वर्ष कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गांधी जी के आह्वान पर एक नहीं, दो नहीं, बल्कि हि…
गौरवशाली इतिहास को समेटे एक परिसर
आईआईएमसी के 56 वें स्थापना दिवस (17 अगस्त) पर विशेष
प्रो. संजय द्विवेदी/ भारतीय जनसंचार संस्थान(आईआईएमसी) ने अपने गौरवशाली इतिहास के 56 वर्ष पूरे कर लिए हैं। किसी भी संस्था के लिए यह गर्व का क्षण भी है और विहंगावलोकन का भी। ऐसे में अपने अतीत को देखना और भविष्य के लिए लक्ष्य तय करना बहुत महत्वपूर्…
पत्रकारिता को कलंकित करते ये आधुनिक टी वी एंकर्स
अतिथियों के साथ भी इस लहजे से बात करते हैं, गोया उसे बुलाया ही अपमानित करने के लिए है
तनवीर जाफ़री/ प्रतिष्ठित रेमन मैगसेसे सम्मान विजेता तथा देश के जाने माने पत्रकार व टी वी एंकर रवीश कुमार विभिन्न स्थानों पर अपने संबोधनों में कई बार यह कह चुके हैं कि जनता को टी वी देखना बंद कर देना चाहिए। रवीश क…
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- ये आकाशवाणी का उज्जैन केन्द्र है..
- सबसे 'तेज़' बनने के चक्कर में 'श्रद्धांजलि' का पात्र बना मीडिया
- क्लास से ग्राउंड तक..
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- डब्ल्यूजेएआई के स्थापना दिवस समारोह पर वेब मीडिया समागम होगाआयोजित
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
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पंकज चौधरीDecember 17, 2024
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Anurag yadavJanuary 11, 2024
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सुरेश जगन्नाथ पाटीलSeptember 16, 2023
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Dr kishre kumar singhAugust 20, 2023
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Manjeet SinghJune 23, 2023
सम्पादक
डॉ. लीना
