मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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हमें तय करना है, सोशल मीडिया देश की वास्तविक आवाज बने

श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’/ सोशल मीडिया बाकी परम्परागत मीडिया से एक जुदा साधन है। इसके द्वारा अपने मोबाइल और कम्प्यूटर पर एकांत में बैठा व्यक्ति पूरी दुनिया से जुडा रह सकता है। फेसबुक, वाॅट्सअप, लिंकडइन, इन्स्टाग्राम आदि आदि सोशल मीडिया के बहुत सषक्त और आसान उपलब्ध साधन है। वर्तमान में जिंदगी का अहम् हिस्सा बन चुका यह मीडिया सूचना, संचार, षिक्षा,…

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हिन्दी पत्रकारिता: कहां से चले थे, कहां पहुंचे?

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष  

मनोज कुमार/ अपने इतिहास का स्मरण करना भला-भला सा लगता है. और बात जब हिन्दी पत्रकारिता की हो तो वह रोमांच से भर देता है. वह दिन और वह परिस्थिति कैसी होगी जब पंडित जुगलकिशोर शुक्ल ने हिन्दी अखबार आरंभ करने का दुस्साहस किया. तमाम संकटों के बाद भी वे आखिरी दम तक अखबार का प्रकाशन जारी रखा. अंतत…

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पत्रकारिता की प्राथमिकता को टटोलने का समय

हिंदी पत्रकारिता दिवस, 30 मई पर विशेष 

लोकेन्द्र सिंह/ 'हिंदुस्थानियों के हित के हेत' इस उद्देश्य के साथ 30 मई, 1826 को भारत में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी जाती है। पत्रकारिता के अधिष्ठाता देवर्षि नारद के जयंती प्रसंग (वैशाख कृष्ण पक्ष द्वितीया) पर हिंदी के पहले समाचार-पत्र 'उदंत मार्तंड' का प्रकाशन होता है। सु…

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मोदी की जीत और अखबारों के शब्द

मीडिया आपको किन शब्दों में उलझाकर पटकना चाहता है जरा उसकी बानगी देखिए

राजकुमार सोनी/ जब मैं अखबार की दुनिया में था तब हर दूसरे- तीसरे दिन मालिक और मूर्धन्य संपादक यही ज्ञान बघारा करते थे कि समाचार की भाषा बेहद सरल होनी चाहिए क्योंकि अखबार रिक्शा चलाने वाला भी…

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भारतीय पत्रकारिता में इंदौर शहर का योगदान

डॉ.अर्पण जैन 'अविचल'/ जब धरती के गहन, गंभीर और रत्नगर्भा होने के प्रमाण को सत्यापित किया जाएगा और उसमें जब भी मालवा या कहें इंदौर का जिक्र आएगा निश्चित तौर पर यह शहर अपने सौंदर्य और ज्ञान के तेज से बखूबी स्वयं को साबित करेगा। हिंदी या कहें अन्य भाषाओँ में इंदौर के पत्रकार और साहित्यकारों का एक अलग ही स्थान है। जिस शहर को मध्यप्रांत की पत्रकारिता का केंद्र या कहें नर्स…

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बीच-बीच में आर्थिक ख़बरों को पढ़ते-समझते रहिए

यही असली खेल हो रहा है, न कि वहां जहां आप लगे हैं

रवीश कुमार / इंडियन एक्सप्रेस के संदीप सिंह की ख़बर ध्यान से पढ़ें। ख़बर की हेडिंग है कि एस्सल ग्रुप की दो कंपनियां घाटे में थीं फिर भी देश के चोटी के म्यूचुअल फंड कंपनियों ने 960 करोड़ का निवेश किया। इन कंपनियों का बहीखाता पढ़कर संदीप ने लिखा है कि एस्सल …

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विपक्ष और पाठकों की हो रही है हत्या

दैनिक जागरण के महासमर 2019 के चार पन्नों की समीक्षा

रवीश कुमार/ तारीख़ 25 मार्च। पन्ना नंबर दो। महासमर 2019। इस पन्ने पर छोटी-बड़ी 14 ख़बरें हैं। 7 ख़बरें भाजपा नेताओं के बयान पर बनाई गईं हैं। मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जे पी नड्डा, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी प्राची, भाजपा …

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वर्तमान सियासत और भारतीय मीडिया ..?

रिजवान चंचल/ लगातार बार बार हर बार लाशों पर सियासत करने के आदी हो चुके सियासतदानों की सोच और भारतीय मीडिया की कारस्तानी एक बार फिर विश्वपटल पर शर्मसार होती नजर आयी एक बार फिर सवालों के बीच घिरी मीडिया से लोग जानना चाहते हैं कि पुलवामा आतंकी हमला है या  सियासत के षड्यंत्र का एक हिस्सा ? यदि इसमे भी सियासत का षड्यंत्र है तो लानत है ऐसी सियासत पर और मीडिया के प्रोपेगंडा पर जो ये भ…

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क्या आप ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते?

रवीश कुमार/ अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में भूमिका निभाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप अपने बच्चों को सांप्रदायिकता से बचाना से बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप भारत में पत्रकारिता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद …

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औसत होते हिन्दी के अख़बारों में ग़ायब होते पत्रकारों के नाम

हिन्दुस्तान की समीक्षा, (हिन्दुस्तान अख़बार को सैंपल के तौर पर लिया है। दूसरे हिन्दी अख़बारों की भी समीक्षा करूंगा।)

रवीश कुमार/ प्रमुख संवाददाता, मुख्य संवाददाता, विशेष संवाददाता, वरिष्ठ स…

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और भी मुद्दे --

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