मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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बीच-बीच में आर्थिक ख़बरों को पढ़ते-समझते रहिए

यही असली खेल हो रहा है, न कि वहां जहां आप लगे हैं

रवीश कुमार / इंडियन एक्सप्रेस के संदीप सिंह की ख़बर ध्यान से पढ़ें। ख़बर की हेडिंग है कि एस्सल ग्रुप की दो कंपनियां घाटे में थीं फिर भी देश के चोटी के म्यूचुअल फंड कंपनियों ने 960 करोड़ का निवेश किया। इन कंपनियों का बहीखाता पढ़कर संदीप ने लिखा है कि एस्सल …

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विपक्ष और पाठकों की हो रही है हत्या

दैनिक जागरण के महासमर 2019 के चार पन्नों की समीक्षा

रवीश कुमार/ तारीख़ 25 मार्च। पन्ना नंबर दो। महासमर 2019। इस पन्ने पर छोटी-बड़ी 14 ख़बरें हैं। 7 ख़बरें भाजपा नेताओं के बयान पर बनाई गईं हैं। मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जे पी नड्डा, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी प्राची, भाजपा …

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वर्तमान सियासत और भारतीय मीडिया ..?

रिजवान चंचल/ लगातार बार बार हर बार लाशों पर सियासत करने के आदी हो चुके सियासतदानों की सोच और भारतीय मीडिया की कारस्तानी एक बार फिर विश्वपटल पर शर्मसार होती नजर आयी एक बार फिर सवालों के बीच घिरी मीडिया से लोग जानना चाहते हैं कि पुलवामा आतंकी हमला है या  सियासत के षड्यंत्र का एक हिस्सा ? यदि इसमे भी सियासत का षड्यंत्र है तो लानत है ऐसी सियासत पर और मीडिया के प्रोपेगंडा पर जो ये भ…

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क्या आप ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते?

रवीश कुमार/ अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में भूमिका निभाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप अपने बच्चों को सांप्रदायिकता से बचाना से बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप भारत में पत्रकारिता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद …

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औसत होते हिन्दी के अख़बारों में ग़ायब होते पत्रकारों के नाम

हिन्दुस्तान की समीक्षा, (हिन्दुस्तान अख़बार को सैंपल के तौर पर लिया है। दूसरे हिन्दी अख़बारों की भी समीक्षा करूंगा।)

रवीश कुमार/ प्रमुख संवाददाता, मुख्य संवाददाता, विशेष संवाददाता, वरिष्ठ स…

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रफाल पर ख़बर तो पढ़ी लेकिन क्या हिन्दुस्तान के पाठकों को सूचनाएँ मिलीं

रवीश कुमार/ हिन्दुस्तान अख़बार ने रफाल मामले को लेकर पहली ख़बर बनाई है। ख़बर को जगह भी काफी दी है। क्या आप इस पहली ख़बर को पढ़ते हुए विवाद के बारे में ठीक-ठीक जान पाते हैं? मैं चाहता हूं कि आप भी क्लिपिंग को देखें और अपने स्तर पर विश्लेषण करें। ठीक उसी तरह से जैसे आप हम एंकरों के कार्यक्रमों और भावों का विश्लेषण करते हैं। हिन्दी प्रदेश ख़ासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में पढ़…

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बिहार डायरी 2019 में हटाये गए लगभग सभी न्यूज पोर्टल के प्रतिनिधियों के नाम

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग बिहार सरकार न्यू मीडिया के पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानता

डॉ. लीना /पटना। बिहार सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग बिहार के न्यू मीडिया यानी वेब पोर्टल (न्यूज पोर्टल) के पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानता। उसने बि…

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क्या आपका हिन्दी अख़बार या चैनल मामले की ख़ुद से पड़ताल कर रहा है?

आलोक वर्मा के घर किसी सिफ़ारिश करने गए थे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी ?

रवीश कुमार/ हिन्दी अख़बारों के संपादकों ने अपने पाठकों की हत्या का प्लान बना लिया है। अख़बार कूड़े के ढेर में बदलते जा रहे हैं। अख़बार अब साल या महीने में दो चार अपवाद स्वरूप बेहतरीन ख़बर…

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इलेक्ट्रानिक मीडिया ने निर्वाचन में बढ़ाया कोलाहल

मूल सवालों को किया नजरअंदाज

संजय कुमार / इलेक्ट्रानिक मीडिया आज एक मस्त हाथी की तरह हो चुका है। वह अपनी ताकत के आगे किसी को कुछ नहीं समझता है। नेता, अफसर, शासन-प्रशासन, खास एवं आम जनता सब इसके प्रभाव में आ चुके हैं। समाज और लोकतंत्र का प्रहरी मीडिया का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। कलम और कागज से आगे कैमरा, लोगो और टी.वी. स्क्र…

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युवा पत्रकारों से निवेदन

 लिखना तो पड़ेगा। ये रोज़ का अभ्यास है।

रवीश कुमार / चुनाव आते ही कुछ युवा पत्रकार व्हाट्स एप करने लगते हैं कि मुझे चुनाव यात्रा पर ले चलिए। आपसे सीखना है। लड़का और लड़की दोनों। दोनों को मेरा जवाब ना है। यह संभव नहीं है। कुछ लोगों ने सीमा पार कर दी है। मना करने पर समझ जाना चाहिए। पर कई लोग नहीं मानते हैं। बार बार …

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और भी मुद्दे --

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