मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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​“हिंदी अखबारों का ये कैसा दौर”

आइए देखें हिन्दी के कुछ अखबारों ने कल के अविश्वास प्रस्ताव को कैसा ट्रीटमेंट दिया है...

संजय कुमार सिंह/ मैं कोलकाता के अंग्रेजी दैनिक दि टेलीग्राफ का फैन हूं। शुरू से। भाजपा सांसद एमजे अकबर इसके संस्थापक संपादक हैं और मैं स्थापना के…

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खबरों का मुंह विज्ञापन से ढका है ....

रामजी तिवारी/ समाचार पत्रों को सुबह हाथ में लेते समय हमारे मन में क्या चल रहा होता है ....? रात को टी वी समाचार चैनलों के सामने बैठकर हमारे जेहन में किस बात की उत्सुकता बनी रहती है ...? सोशल मीडिया को स्क्रॉल करते समय देश दुनिया को लेकर हम क्या सोच रहे होते हैं ....? …

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सस्ता डाटा, सोशल मीडिया और हमारा संकट

संजीव परसाई/ आग फैलेगी तो आएंगे कई घर जद में, यहाँ सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है...आग लगाने वाले अक्सर भूल जाते हैं कि वे या उनका कोई इस समाज में शामिल है। आप समाज को जाहिल और जहरीला बनाएंगे तो सुरक्षित भविष्य की कल्पना कैसे की जा सकती है। आज मंदसौर में  हुए भयानकतम अत्याचार को लगभग 15-20 दिन हो चुके हैं, सुना है लाडली अब मुस्कुराई। इस दौरान लोगों को, मीडिया को, नेताओं को, लोगों को …

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‘उदन्त मार्तण्ड’ की परम्परा निभाता हिन्दी पत्रकारिता

30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष 

मनोज कुमार/ कथाकार अशोक गुजराती की लिखी चार पंक्तियां सहज ही स्मरण हो आती हैं कि 

राजा ने कहा रात है

मंत्री ने कहा रात है…

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क्या दुनियाभर में टीवी की बहस में भी संभव है- फिक्सिंग?

प्रदीप द्विवेदी/ टीवी पर खबरों को लेकर प्रसिद्ध पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी के हवाले से जो कुछ कहा गया है, यदि वह अर्धसत्य है तो भी एक बड़ा सवाल फिर गहरा रहा है कि... क्या दुनियाभर में टीवी की बहस में भी संभव है- फिक्सिंग?…

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क्या सोशल मीडिया पर नियंत्रण की है जरूरत ?

हालिया दो भारत बंद से उपजे कई सवाल

नई दिल्ली/कुमोद कुमार/ दलित आंदोलन फिर उसके बाद आरक्षण विरोधी आंदोलन में ये रोज-रोज के भारत बंद आंदोलन कहां से पैदा हो रहे हैं? इसमें शामिल होने वाले लोग कहां से आ रहे हैं।…

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क्या सिर्फ अभिव्यक्ति की आज़ादी का मामला या पत्रकारिता की आड़ में राजनीति

नवीन पटनायक सरकार का ओ टीवी चैनल का बहिष्कार…ग़लत या सही..

रवीश कुमार/ ओ टी वी ओडिशा का पहला प्राइवेट टीवी चैनल है। इसकी किसी स्टोरी से नाराज़ बीजेडी सरकार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि इस टीवी के बहस वाले कार्यक्रम में नहीं जाएंगे। मुझसे प्रतिक्रिया मांगी गई। देर लगाई क्योंकि स्टोरी की जा…

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मुख्यधारा की मीडिया ने क्या दिखाया?

किसान आंदोलन और मीडिया की भूमिका

तनवीर जाफरी / किसानों, खेतीहर मज़दूरों तथा आदिवासियों द्वारा पिछले दिनों नासिक से शुरु हुआ पैदल किसान मार्च लगभग 180 किलोमीटर की यात्रा तय कर 12 मार्च को मुंबई पहुंचा। सूत्रों के अनुसार इस मार्च में लगभग 60 हज़ार आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर मुंबई स्थित विधानसभा भवन का घेराव करने के इराद…

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गोरखपुर के नतीजे से 2019 का रिज़ल्ट निकाल दे रहे हैं!

राजनीतिक पत्रकार 

रवीश कुमार/ राजनीतिक पत्रकारों को कभी ठीक से समझ नहीं पाया। गोरखपुर में योगी की हार बड़ी घटना तो है लेकिन इस घटना में क्या इतना कुछ है कि चार चार दिनों तक सैंकड़ों पत्रकार लोग लिखने में लगे हैं। राजनीतिक पत्रकारों को ही सिस्टम को करीब से देखने का मौका मिलता है। मगर भीतर की बातों को कम ही पत्रकार लिख पाते हैं या लिखते हैं। उसकी व…

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मोबाइल मीडिया : प्रिंट मीडिया के लिए सवालिया निशान?

अभिमनोज/ प्रिंट मीडिया के हाथ से मीडिया की सत्ता की डोर छुटती जा रही है... पीएम नरेन्द्र मोदी की मोबाइल को लेकर भाजपाइयों को दी गई सलाह का भावार्थ तलाशेंगे तो यह बात साफ हो जाएगी कि मोबाइल मीडिया सारे मीडिया पर लगातार भारी पड़ता जा रहा है!…

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