मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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औसत होते हिन्दी के अख़बारों में ग़ायब होते पत्रकारों के नाम

हिन्दुस्तान की समीक्षा, (हिन्दुस्तान अख़बार को सैंपल के तौर पर लिया है। दूसरे हिन्दी अख़बारों की भी समीक्षा करूंगा।)

रवीश कुमार/ प्रमुख संवाददाता, मुख्य संवाददाता, विशेष संवाददाता, वरिष्ठ स…

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रफाल पर ख़बर तो पढ़ी लेकिन क्या हिन्दुस्तान के पाठकों को सूचनाएँ मिलीं

रवीश कुमार/ हिन्दुस्तान अख़बार ने रफाल मामले को लेकर पहली ख़बर बनाई है। ख़बर को जगह भी काफी दी है। क्या आप इस पहली ख़बर को पढ़ते हुए विवाद के बारे में ठीक-ठीक जान पाते हैं? मैं चाहता हूं कि आप भी क्लिपिंग को देखें और अपने स्तर पर विश्लेषण करें। ठीक उसी तरह से जैसे आप हम एंकरों के कार्यक्रमों और भावों का विश्लेषण करते हैं। हिन्दी प्रदेश ख़ासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में पढ़…

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बिहार डायरी 2019 में हटाये गए लगभग सभी न्यूज पोर्टल के प्रतिनिधियों के नाम

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग बिहार सरकार न्यू मीडिया के पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानता

डॉ. लीना /पटना। बिहार सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग बिहार के न्यू मीडिया यानी वेब पोर्टल (न्यूज पोर्टल) के पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानता। उसने बि…

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क्या आपका हिन्दी अख़बार या चैनल मामले की ख़ुद से पड़ताल कर रहा है?

आलोक वर्मा के घर किसी सिफ़ारिश करने गए थे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी ?

रवीश कुमार/ हिन्दी अख़बारों के संपादकों ने अपने पाठकों की हत्या का प्लान बना लिया है। अख़बार कूड़े के ढेर में बदलते जा रहे हैं। अख़बार अब साल या महीने में दो चार अपवाद स्वरूप बेहतरीन ख़बर…

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इलेक्ट्रानिक मीडिया ने निर्वाचन में बढ़ाया कोलाहल

मूल सवालों को किया नजरअंदाज

संजय कुमार / इलेक्ट्रानिक मीडिया आज एक मस्त हाथी की तरह हो चुका है। वह अपनी ताकत के आगे किसी को कुछ नहीं समझता है। नेता, अफसर, शासन-प्रशासन, खास एवं आम जनता सब इसके प्रभाव में आ चुके हैं। समाज और लोकतंत्र का प्रहरी मीडिया का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। कलम और कागज से आगे कैमरा, लोगो और टी.वी. स्क्र…

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युवा पत्रकारों से निवेदन

 लिखना तो पड़ेगा। ये रोज़ का अभ्यास है।

रवीश कुमार / चुनाव आते ही कुछ युवा पत्रकार व्हाट्स एप करने लगते हैं कि मुझे चुनाव यात्रा पर ले चलिए। आपसे सीखना है। लड़का और लड़की दोनों। दोनों को मेरा जवाब ना है। यह संभव नहीं है। कुछ लोगों ने सीमा पार कर दी है। मना करने पर समझ जाना चाहिए। पर कई लोग नहीं मानते हैं। बार बार …

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ठीकरा मीडिया के ऊपर फोड़ दीजिए!

गिरीराज सिंह ने  एंकर  को कहा, आप लोगों ने पार्टी के एजेंडे को लोगों तक पहुंचाने में काफी खराब भूमिका निभाई है

साकिब जिया / यह अच्छा तरीका है कि चुनाव में जनता से वायदा राजनीतिक पार्टियां करें और जब सरकार …

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क्या राजनीतिक सत्ता ने वर्चस्व के लिये मीडिया को ही खत्म करना शुरू कर दिया है?

जरा सोचिये जब मेनस्ट्रीम मीडिया को कोई देखने-सुनने पढ़ने वाला नहीं होगा !

पुण्य प्रसून बाजपेयी / क्या पत्रकारिता की धार भोथरी हो चली है । क्या मीडिया - सत्ता गठजोड़ ने पत्रकारिता को कुंद कर दिया है । क्या मेनस्ट्रीम मीडिया की चमक खत्म हो चली है । …

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ख़बरें मैनेज होती हैं, मरती नहीं हैं

अमित शाह का पीछा करती फ़र्ज़ी एनकाउंटर की ख़बरें और ख़बरों से भागता मीडिया

रवीश कुमार/ नहीं छपने से ख़बर मर नहीं जाती है। छप जाने से अमर भी नहीं हो जाती है। मरी हुई ख़बरें ज़िंदा हो जाती हैं। क्योंकि ख़बरें मैनेज होती हैं, मरती नहीं हैं। बस ऐसी ख़बरों को ज़…

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वीआईपी कवरेज के दौरान पत्रकारों के मोबाइल प्रयोग पर रोक?

(राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर विशेष)

संजय कुमार/ राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पत्रकार मित्रों को बधाई! लेकिन कहीं सम्मान तो कहीं बेरूखी का समाना करना पड़ता है। खासकर वीआईपी एवं वीवीआईपी कवरेज में। …

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और भी मुद्दे --

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