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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटेरिया नहीं रहे

आईआईएमसी के महानिदेशक ने जताया दुख, कहा- ‘जनमुद्दों के लिए जूझते रहे पटेरिया’

नई दिल्ली/ इंदौर । वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और लेखक श्री शिवअनुराग…

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सोशल मीडिया से --

चौथा खम्भा आजकल इसी तरह से झूल रहा

रामजी तिवारी । अखबार का पहला पन्ना बता रहा है कि कोरोना-समय में सरकार चुस्त दुरुस्त है. अस्पताल की व्यवस्था चाक-चौबंद है. आक्सीजन की कोई कमी नहीं. टेस्ट और वैक्सिनेशन जोर-शोर से चल रहा है. दवाएं और परीक्षण सब जनता के लिए सुलभ है. …

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पत्रकारों के लिए होगा बड़े पैमाने पर टीकाकरण

चंडीगढ़/ हरियाणा सरकार ने कोरोना संकटकाल में राज्य में मीडियाकर्मियों द्वारा समर्पित रूप से दी जा रही सेवाओं को देखते हुए इन्हें कोरोना से बचाव के लिये बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू…

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डॉ. तारिक़ फातमी उर्दू के विभागाध्यक्ष बनाए गए

पटना/ डॉ. तारिक़ फातमी को कालेज आफॅ कामर्स आर्ट्स एण्ड साइंस के उर्दू विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया गया है। कालेज द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार डॉ. फातमी को चक्रानुक्रम योजना के तहत विभागाध्यक्…

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सम्पादक

डॉ. लीना


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सूचना की अधिकता से आमजन असमंजस में: डॉ सच्चिदानंद जोशी

जे.सी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 'मीडिया की बात आपके साथ' साप्ताहिक श्रृंखला के उद्घाटन सत्र में वेबिनार का आयोजन

फ़रीदाबाद/…

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रचना, सृजन और संघर्ष से बनी थी पटैरया की शख्सियत

प्रो. संजय द्विवेदी/ वे ही थे जो खिलखिलाकर मुक्त हंसी हंस सकते थे, खुद पर भी, दूसरों पर भी। भोपाल में उनका होना एक भरोसे और आश्वासन का होना था। ठेठ बुंदेलखंडी अंदाज उनसे कभी बिसराया नहीं गया। वे अपनी हनक, आवाज की ठसक, भरपूर दोस्ताने अंदाज और प्रेम को बांटकर राजपुत्रों के शहर भोपाल में भी एक नई दुनिया बना चुके थे, जो उनके चाहने वालों से भरी थी। 12 मई,2021 की सुबह जब वरिष्ठ पत्रकार श्री शिवअनुराग पटैरया ने अपनी कर्मभूमि रहे इंदौर शहर में आखिरी सांसें लीं तो भोपाल ब…

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डिजीटल ट्रांसफार्मेशन के लिए तैयार हों नए पत्रकार

नए समय में मीडिया शिक्षा की चुनौतियां

प्रो. संजय द्विवेदी/ एक समय था जब माना जाता है कि पत्रकार पैदा होते हैं और पत्रकारिता पढ़ा कर सिखाई नहीं जा सकती। अब वक्त बदल गया है। जनसंचार का क्षेत्र आज शिक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। वर्ष 2020 को लोग चाहे कोरोना महामारी की वजह से याद करेंगे, लेकिन एक मीडिया शिक्षक होने के नाते मेरे लिए ये बेहद महत्वपूर्ण है कि पिछले वर्ष भारत में मीडिया शिक्ष…

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मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी नहीं होनी चाहिए: निर्वाचन आयोग

दिल्ली/ भारत निर्वाचन आयोग ने  मीडिया से संबंधित अपनी स्थिति पर हाल के बयानों का संज्ञान लिया है। आयोग ने इस संबंध में कुछ निश्चित प्रेस रिपोंर्टों का भी संज्ञान लिया है। आयोग ने हमेशा कोई निर्णय लेने से पहले उचित विचार-विमर्श किया है। …

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दैनिक भास्कर का फर्जीवाड़ा!

अनिल सिंह / क्या यह प्रायोजित खबर नहीं है? क्या प्रेस को ऐसी स्वंतंत्रता मिलनी चाहिए? 

अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर भास्कर के अलग-अलग शहरों के 03 मई 2021 के एडिशन में एक ही तरह का बयान अलग-अलग डॉक्टर्स के नाम से उनकी (अलग-अलग) तस्वीर के साथ छपा है। क्या यह फर्जीवाड़ा नहीं है? कई सवाल हैं। आप भी भास्कर के अलग-अलग शहरों के 03 मई 2021 के एडिशन देखिये …

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बेमिसाल शिक्षक और जनसरोकारों के लिए जूझने वाली योद्धा थीं वे

दविंदर कौर उप्पल होने के मायने

प्रो. संजय द्विवेदी / माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग की अध्यक्ष रहीं प्रो. दविंदर कौर उप्पल का जाना एक ऐसा शून्य रच रहा है, जिसे भर पाना कठिन है। वे एक बेमिसाल अध्यापक थीं, बेहद अनुशासित और अपने विद्यार्थियों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखने वालीं। उन्होंने पढ़ने- पढ़ाने, फिल्में देखने, संवाद करने और सामाजिक सरोकारों के लिए सजग र…

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बेमानी है प्रेस फ्रीडम की बातें

पूरी दुनिया में पत्रकार बेहाल हैं और प्रेस बंधक होता चला जा रहा है

मनोज कुमार/ तीन दशक पहले संयुक्त राष्ट्र संघ ने 3 मई को विश्व प्रेस फ्रीडम डे मनाने का ऐलान किया था. तब से लेकर आज तक हम इसे पत्थर की लकीर मानकर चल रहे हैं. इन तीन दशकों में क्या कुछ हुआ, इसकी मीमांसा हमने नहीं की. पूरी दुनिया में पत्रकार बेहाल हैं और प्रेस बंधक होता चला जा रहा है. खासतौर पर जब भारत की चर…

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मध्यप्रदेश में अधिमान्य पत्रकार फ्रंट लाइन वर्कर की श्रेणी में

बिहार में टीकाकरण के लिए पत्रकार फ्रंट लाइन वर्कर घोषित, दिल्ली और झारखंड सरकार से पत्रकारों को कोरोना वारियर्स का दर्जा देने की मांग

भोपाल/ पटना/ दिल्ली/ रांची/ मध्यप्रदेश में प्रदेश के अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार को फ्रंट लाइन वर्कर की श्…

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पत्रकारों को मिले कोरोना योद्धा का दर्जा

कोरोना से दो सौ पत्रकारों की जान जाने का समाचार, एनयूजेआई, एडिटर्स गिल्ड ने मांग की- इलाज की हो व्यवस्था

नयी दिल्ली/ पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मीडियाकर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा देने तथा उनके त्वरित टीकाकरण किय…

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'ग़ुलाम मीडिया ' जनता की बदहाली का सबसे बड़ा ज़िम्मेदार

निर्मल रानी/  हमारा देश इस समय संकट के किस भयानक दौर से  गुज़र रहा है इसे दोहराने की ज़रुरत नहीं। संक्षेप में यही कि जब देश प्यास से मर रहा है उस समय सरकारें कुंवे खोदने में लगी हैं। और इन कुंओं को खोदते खोदते कितनी और जानें काल के मुंह में समा जाएंगी इसका कोई अंदाज़ा नहीं है। सत्ता के शीर्ष पर बैठे चंद लोग भले ही अपने अहंकारवश अपनी नाकामियों और ग़ैर ज़िम्मेदाराना फ़ैसलों पर पर्दा डालने की लिए कभी 'सिस्टम ' पर तो कभी राज्य सरकारों पर दोषारोपण करने की कोशिश क्यों न करें परन्तु हक़ीक़त…

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भारतीय मीडिया ने झूठ बोलने को आसान बनाया

जन मीडिया का अप्रैल अंक

डॉ लीना / जन मीडिया का अप्रैल (109 वां) अंक अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण इसलिए कि अप्रैल का जो महीना होता है वह अपने आप में महत्वपूर्ण होता है।  सामाजिक क्रांति का बीज बोने वाले प्रबुद्ध राष्ट्र निर्माता एवं भारतरत्न बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर, जो भारत के संविधन निर्माता के रूप में विख्यात है उनकी जयंती 14 अप्रैल को पूरा विश्व मानता है। बाबा साहब ने संविधान की रचना की थी। संविधान के जनक थे बल्कि ए…

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उमाकांत लखेड़ा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के नए अध्यक्ष

नई दिल्ली/ उमाकांत लखेड़ा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के नए अध्यक्ष चुने गए हैं। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुए चुनावों के परिणाम रविवार शाम को जारी हो गए। हिंदुस्तान के राष्ट्रीय ब्यरो प्रमुख रहे उमाकांत लखेड़ा प्रतिद्वंदी द एशियन एज के ब्यूरो हेड संजय बसक को हरा अध्यक्ष निर्वाचित हुए।…

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आलेख- ख़बरें और भी हैं

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आपकी उपस्थिती

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पुरालेख--

बहस--

समाजवाद की आड़ में जारकर्म समर्थक का चेहरा

कैलाश दहिया/ आर.डी. आनंद ने दिनांक 25 मार्च, 2021को अपनी फेसबुक वॉल पर 'आम्बेडकरवादी और आजीवक' शीर्षक से अपना लेख लगाया है। सर्वप्रथम तो, इन के लेख का शीर्षक ही गलत है। आजीवक एक कं…

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पत्रिकाएँ--

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पत्रकारिता : एक नजर

वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य

अर्पण जैन "अविचल"/  सूचना और संचार क्रांति के दौर में आज प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बीच वेब पत्रकारिता का चलन तेजी से बढ़ा है और अपनी पहचान बना ली है. अखबारों की तरह बेव पत्र और पत्रिकाओं का जाल, अंतरजाल पर पूरी तरह बिछ चुका है. छोटे-बड़े हर शहर से अमूमन बेव पत्रकारिता संचालित हो रही है. छोटे-बड़े सभी शहरों के प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया भी वेब पर हैं. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में थोड़े ही समय मे…

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राष्ट्रीय सुर्खियां--

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