देश की वैश्विक पहचान बनाने और जड़ों से जोड़ने में मिली है कामयाबी
प्रो.संजय द्विवेदी/ इन दिनों भारत की मीडिया में बंदिशों और लोकतंत्र के सिकुड़ते जाने की कथाएं हवा में तैर रही हैं। लोकतंत्र बचाने में वे सब आगे हैं जिनके शासन की कथाएं उन्हें खुद मुंह चिढ़ा रही हैं। मीडिया को दबाने, नियंत्रित करने की कहानियां आज की नहीं हैं। लेकिन मीडिया की हिम्मत भी आज की नहीं है। हमारे देश में पत्रकारिता की शुरुआत ही जेम्स आगस्टस हिकी की क्रांतिकारी लेखनी से प्रारंभ होती है, जिसने अंग्रेज लाट साहबों की बैंड …




















