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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कहानी, पटकथा एवं संवाद लेखन पर कार्यशाला

 

भोपाल। अच्छी कहानी एवं पटकथा लिखने के लिए रिसर्च जरूरी है। आज फिल्म इंडस्ट्री में बहुत सारे लेखक लेखन कर रहे हैं, मगर लेखन में रिसर्च की कमी साफ झलक रही है। इसलिए हमें अच्छी कहानियाँ नहीं मिल पा रही हैं। यह विचार 15 फरवरी को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित कहानी, पटकथा एवं संवाद लेखन कार्यशाला में प्रख्यात कहानी एवं पटकथा लेखक  अशोक मिश्रा ने व्यक्त किए।

      उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में महिला लेखकों की जरूरत बहुत है। आज पुरुष लेखक महिलाओं के विषयों पर लिख रहे हैं, इसलिए गंभीरता नहीं आती है। उन्होंने बताया कि किस तरह से एक साधारण-सी कहानी को स्क्रीन प्ले के रूप में तैयार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हम लेखन के दौरान बहुत सारे शब्दों का प्रयोग करते हैं, जिससे हमें बचना चाहिए। सिनेमा चलचित्र का माध्यम है इसलिए शब्दों का महत्व सीमित होता है। स्क्रीन प्ले को अधिकतम 120 पेजों में लिखने का प्रयास करना चाहिए।

      सिनेमा में होने वाले नवीन प्रयोगों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग नए प्रयोग करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं वे सफल होते हैं। पटकथा लेखन के सामान्य नियमों को तोड़ते हुए लेखन करने का प्रयोग भी करना चाहिए। आजकल तकनीक का प्रयोग बहुत ज्यादा हो रहा है। इसलिए फिल्में भावनात्मक रूप से कमजोर होती जा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अच्छा लिखने के लिए पढ़ना बहुत जरूरी है। इसलिए अधिक से अधिक साहित्य पढ़ना चाहिए। कार्यशाला में विज्ञापन एवं जनसंपर्क पाठ्यक्रम एवं फिल्म प्रोडक्शन पाठ्यक्रम के विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यशाला के दौरान श्री मिश्र द्वारा विद्यार्थियों को कुछ शोर्ट फिल्में भी दिखाई गई।

 

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना