Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

परिवर्तन रैली में पत्रकार पर पुलिस का हमला

पुलिस की इस कार्रवाई को पत्रकारों ने स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करार दिया है

पटना। गांधी मैदान में परिवर्तन रैली में पुलिस ने पत्रकार प्रणय प्रियंवद को रोका, घसीटा और फिर हमला भी बोला। 15 मई को राजद की परिवर्तन रैली थी। आर्यन टीवी के लिए काम कर रहे पत्रकार प्रणय प्रियंवद ने मीडियामोरचा को बताया कि रैली के दौरान जब वे कैसेट देने के लिए उधर से जा रहे थे तो एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें आयोजन के बीच में टोका - कहां इधर से उधर जा रहे हैं। जब जवाब दिया कि  कैसेट देने जाना है…खबर चलेगी। मैं प्रेस से हूं। आर्यन टीवी से। कहां है आई कार्ड ये सवाल किया पुलिस अधिकारी ने। लीजिए देख लीजिए मैने जवाब दिया। कार्ड देखने के बाद पुलिस अधिकारी ने कहा आप तो जनसंपर्क विभाग में काम करते हैं। आप पत्रकार नहीं हैं। पत्रकार ने कहा-सरकार का विभाग है सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, वही पत्रकारों के लिए परिचय पत्र जारी करता है।

इसे एग्रीडेशन कार्ड कहते हैं। ये वही है। पर वे मानने को तैयार ही नहीं… पुलिस अधिकारी ने कहा- हटाओ इसे यहां से। चार-पांच डंटाधारी पुलिस वालों ने भी घेर लिया झट से जैसे अपराधी को घेरती है पुलिस। पुलिस अधिकारी मुझे पकड़े रहते हैं। फिर कहते हैं- मारो…. मारो….। मै पत्रकार चिल्लाता हूँ- प्रेस पर पुलिस का हमला है ये….। पुलिस वालों ने हाथापाई शुरू कर दी।
रैली में पहुंचे कई लोग ये सब देख रहे थे। लोगों को पुलिसिया बर्बरता देख गुस्सा आ गया। बैरिकेटिंग के अंदर से रैली में पहुंचे लोग मेरी तरफ लपकते हैं बचाने के लिए । बाकी कई लोग नीतीश कुमार मुर्दाबाद के नारे लगाते हैं। तभी एक दूसरा पुलिस अधिकारी पहुंचता है स्थिति संभालने। बीच बचाव करने।

प्रणय प्रियंवद आरोप लगते हैं कि पुलिस नहीं चाहती रही कि रैली की खबर का सही करवेज हो। मेरे बार-बार पूछने पर भी कि- ये बताएं कि सरकार की ओर से कौन सा विभाग पत्रकारों के लिए कार्ड जारी करता है ? पर रंगदार पुलिस अधिकारी नहीं दे पाते हैं इसका जवाब। मतलब तो यही हुआ ना। प्रेस का दो आई कार्ड जैसे बेमानी हो गया। एक पीआरडी का और दूसरा आर्यन टीवी का।

चश्मदीद डेहरी आन सोन के चंद्रशेखर आजाद  ने बताया कि प्रणय प्रिंबद ने आई कार्ड दिखाया. उसके बाद पुलिस ने बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया. उनको धक्का दे बाहर निकाल रहे थे. यहां तक कि मारपीट पर उतारू हो गए. हमलोगों ने काफी हो हल्ला किया। दानापुर रोड के कमलेश कुमार ने कहा कि  प्रणय जी अपने आई कार्ड को दिखा रहे थे इतने में उन पर पुलिस वाले ने थप्पड़ चला दिया एक प्रेस वाले पर पुलिस दल-बल के साथ आक्रमण करने की कोशिश की…हम कार्यकर्ता अगर उनका सपोर्ट नहीं करते तो वह यहां गांधी मैदान में नहीं बल्कि हॉस्पीटल में नजर आते।  

इस घटना के बाद राज्य सरकार के मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि सरकार इस मामले की जांच करा रही है. दोषी पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. इस बीच पुलिस के इस व्यवहार के खिलाफ आईएएनएस न्यूज एजेंसी के पत्रकार इमारन खान ने स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करार देते हुए कहा है कि यह एक गंभीर मामला है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार के इशारे पर यह सब किया गया है तो यह और भी खतरनाक है. उन्होंने पुलिस के इस व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है. इस बीच बिहार प्रेस फ्रीडम मूवमेंट ने भी सरकार से मांग की है कि दोषी पुलिस वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

प्रणय प्रियंवद 1992 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कई सालों तक बतौर फ्रीलांसर और फिर दैनिक जागरण भागलपुर और गोड्डा में लगभग साढ़े चार वर्षों तक कार्य किया। प्रभात खबर धनबाद और पटना में कार्य किया। फोकस टीवी और हमार टीवी के लिए दो वर्षों तक पटना में रिपोर्टिंग की। पिछले लगभग तीन वर्षों से पटना में पत्रकारिता कर रहे हैं। वह कवि भी हैं और प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े हैं।

Go Back



Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;f5d815536b63996797d6b8e383b02fd9aa6e4c70175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;1549d7fbbceaf71116c7510fe348f01b25b8e746175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना