डॉ. प्रदीप डहेरिया/ कोई भी व्याख्यान समय की रेत पर मिट जाने वाली आवाज़ हो सकते हैं, लेकिन जब वे लिपिबद्ध होकर पुस्तक का आकार लेते हैं, तो वे इतिहास के अमर दस्तावेज़ बन जाते हैं। किसी भी समाज, राष्ट्र या संगठन को सही दिशा देने में उसके नेतृत्वकर्ता के विचारों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जब उन सशक्त व…
Blog posts : "पुस्तक समीक्षा"
शब्दों का सामर्थ्य और विचारों की धरोहर है 'संजय उवाच'
कैमरे में दर्ज एक दौर की जीवंत गाथा
रोहित कांत द्वारा संपादित 'द फोटो जर्नलिस्ट: अ मेमॉयर ऑफ लेट राजीव कांत' तथा 'बिहार के छायाकार : स्व. राजीव कांत की छाया स्मृति' बिहार की दृश्य-संस्कृति और पत्रकारिता के इतिहास को संरक्षित करने का गंभीर और दीर्घकालिक प्रयास
कुमार कृष्णन/ इतिहास केवल सरकारी अभिलेखों, पुस्तकों और संस्मरणों में ही स…
अपने समय से संवाद का नाम है ‘संजय उवाच’
डॉ. लोकेन्द्र सिंह/ मीडिया प्राध्यापक एवं लेखक प्रो. संजय द्विवेदी की नई पुस्तक ‘संजय उवाच’ उनके चुनिंदा और सारगर्भित भाषणों का उत्कृष्ट संग्रह है। अकादमिक जगत से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्होंने जो व्याख्यान दिए, उनको पाठकों के लिए संपादित कर पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया है। ज्यादातर व्या…
भारतीय विचार के मजबूत स्तंभ ‘11 महानायक’
डॉ. लोकेन्द्र सिंह / भारत में महापुरुषों की एक लंबी शृंखला है। भारत के सुदीर्घ इतिहास के प्रत्येक कालखंड में हमें ऐसे नायक दिखाई देते हैं, जिन्होंने भारतीय समाज का मार्ग प्रशस्त किया। ऐसे में कुछ नायकों को चुनना और उनके व्यक्तित्व पर लिखना, अत्यंत कठिन कार्य है। अपने लेखन के दौरान प्रो. संजय द्विवेद…
पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का दस्तावेज है – ‘...लोगों का काम है कहना’
सुदर्शन व्यास/ ‘लोगों का काम है कहना...’ पुस्तक का आखिरी पन्ना पलटते समय संयोग से महात्मा गांधी का एक ध्येय वाक्य मन–मस्तिष्क में गूंज उठा – ‘कर्म ही पूजा है’। जब मैं इस किताब को पढ़ रहा था तो बार–बार महात्मा गांधी का ये वाक्य सहसा अंतर्गन में सफर कर रहा था। ये कहूँ तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ब…
शिवाजी के किलों की कहानी बताती है ‘हिन्दवी स्वराज्य दर्शन’
प्रो. (डॉ) संजय द्विवेदी/ लेखक लोकेन्द्र सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। कवि, कहानीकार, स्तम्भलेखक होने के साथ ही यात्रा लेखन में भी उनका दखल है। घुमक्कड़ी उनका स्वभाव है। वे जहाँ भी जाते हैं, उस स्थान के अपने अनुभवों के साथ ही उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से सबको परिचित कराने का प्रयत्न भी वे…
लोकहृदय के प्रतिष्ठापक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
बी. एल. आच्छा/ कहते हैं कि आलोचकों की मूर्तियां नहीं बनती। पर दौलतपुर (रायबरेली) के आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी तो अपवाद हैं ही। और साहित्य में लोकहृदय के प्रतिष्ठापक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का व्यक्तित्व तो हिन्दी के हर पाठक में मूर्तिमान है। यह क्या कम है कि ग्राम अगौना जनपद बस्ती (उ.प्र) में सन …
कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना
डॉ. विनीत उत्पल/ संजय द्विवेदी महज एक नाम है। वह नाम नहीं, जिसके आगे प्रोफेसर या डॉक्टर लगा हो। वह नाम नहीं, जिसके बाद महानिदेशक या कुलपति लगा हो। यह नाम है ऐसे शख्स का, जो समाज के एक तबके से लेकर किसी संस्थान या फिर राष्ट्र की तकदीर बदलनी की क्षमता रखता है। वह राख की एक छोटी-सी चिंगारी को भी विराट …
‘मीडिया को जो लोग चला रहे हैं, वे दरअसल मीडिया के लोग नहीं हैं’
संत समीर/ आजकल आमतौर पर जिस तरह के साक्षात्कार हमें पढ़ने को मिलते हैं, यदि उनके भीतर की परतों को पहचानने की कोशिश करें तो कम ही साक्षात्कार मिलेंगे जो सही मायने में सच का साक्षात् करा पाते हों। आत्मश्लाघा इस दौर के साक्षात्कारों की आम बात है। असुविधाजनक प्रश्नों से बचकर निकल लेना या गोलमोल उत्तरों …
पत्रकारिता से साहित्य में चली आई ‘न हन्यते’
इंदिरा दांगी/ आचार्य संजय द्विवेदी की नई किताब 'न हन्यते' को खोलने से पहले मन पर एक छाप थी कि पत्रकारिता के आचार्य की पुस्तक है और दिवंगत प्रख्यातों के नाम लिखे स्मृति-लेख हैं, जैसे समाचार पत्रों में संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ करते ही हैं; लेकिन पुस्तक का पहला ही शब्द-चित्र मेरी इस धारणा को तोड़त…
पत्रकारिता की शक्ति को बताने वाली दस्तावेजी पुस्तक है ‘रतौना आन्दोलन : हिन्दू-मुस्लिम एकता का सेतुबंध’
लाजपत आहूजा के संपादन में इस पुस्तक को लिखा है, लेखक लोकेन्द्र सिंह, दीपक चौकसे और परेश उपाध्याय ने
डॉ. गजेन्द्र सिंह अवास्या/ भारत में पत्रकारिता का एक गौरवशाली इतिहास है। समाज जागरण से लेकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता की चेतना जगाने में पत्रकारों एवं समाचारपत्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका का …
आत्मीयता से ओत-प्रोत स्मृतियां
पुस्तक समीक्षा/ प्रो. कृपाशंकर चौबे/ प्रो. संजय द्विवेदी की उदार लोकतांत्रिक चेतना का प्रमाण उनकी सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘न हन्यते’ है। ‘न हन्यते' पुस्तक में दिवंगत हुए परिचितों, महापुरुषों के प्रति आत्मीयता से ओत-प्रोत संस्मरण और स्मृति लेख हैं। ये स्मृति लेख नई पीढ़ी के लिए दृष्टांत हैं कि अपने समय …
समकालीन भारत को समझने की कुंजी है ‘भारतबोध का नया समय’
आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी की नई पुस्तक
प्रो. कृपाशंकर चौबे/ जनसंचार के गंभीर अध्येता प्रो. संजय द्विवेदी की नई पुस्तक ‘भारतबोध का नया समय’ का पहला ही निबंध इसी शीर्षक से है। भारतबोध की समझ को स्पष्ट करने के लिए लेखक ने गांधी, धर्मपाल, लोहिया, वासुदेव शरण अग्रवाल, निर्मल वर्मा से …
राजनीति का संदर्भ ग्रंथ है “लोकतंत्र का स्पंदन”
पत्रकार अभिमनोज की अभिनव पहल है उनकी यह पुस्तक
प्रदीप द्विवेदी / आधुनिक पत्रकारिता में समाचार विश्लेषक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है. प्रमुख राष्ट्रीय समाचार विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार- अभिमनोज, पत्रकारिता में नए प्रयोगों के लिए प्रसिद्ध हैं. अभिमनोज की अभिनव पहल है उनकी पुस्तक.... लोकतंत्र…
‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ पर स्पष्ट दृष्टिकोण पैदा करती पुस्तक
सुरेश हिंदुस्थानी/ राष्ट्रवाद सदैव से चर्चा एवं आकर्षण का विषय रहा है। आज के परिदृश्य में तो यह और अधिक चर्चित है। सब जानना चाहते हैं कि आखिर राष्ट्रवाद क्या है? राष्ट्रवाद पर इतनी बहस क्यों होती है? क्यों कुछ लोग राष्ट्रवाद का विरोध करते हैं? राष्ट्रवाद और मीडिया के बीच क्या संबंध है? राष्ट्रवाद क…
"पैसा ही पैसा" जीवन की सच्चाई के करीब
संजय कुमार /पुस्तक चर्चा/ पैसा ही पैसा माधुरी सिन्हा की सद्यः प्रकाशित पुस्तक है जिसे पटना के प्रकाशक नोवेल्टी एंड कंपनी में प्रकाशित किया है. जैसा कि पुस्तक का शीर्षक है ‘पैसा ही पैसा’ तो यह एक ऐसे गरीब बच्चे की कहानी है इसका जीवन गरीबी में व्यतीत हुआ. माधुरी सिन्हा ने अब तक कई उपन्यास लिखे हैं थाम…
अच्छी तरह से जानते हैं हत्यारे
अरविंद भारती की किताब “वे लुटेरे हैं
शहंशाह आलम/ यह विदा कहने का वक़्त है।
इसलिए हे राजन, आप चौंके अथवा चीहुँकें अथवा विस्मय में न पड़ें।
इसलिए हे राजन, यह वक़्त कवि अरविंद भारती को विदा कहने का वक़्त नहीं है। न इनकी कविता की विदाई की घोषणा अभी की जानी है। विदाई तो अच्छे मूल्यों …
ढाई हजार वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध ने पर्यावरण सुरक्षा का मर्म समझा
लेखक-पत्रकार डॉ ध्रुव कुमार की पुस्तक "बौद्ध धर्म और पर्यावरण "
संजय कुमार/ वर्तमान दौर में पर्यावरण के समक्ष संकट और ग्लोबल वार्मिंग से पूरी दुनिया चिंतित है । अनेक देशों में बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या विस्फोट के कारण भूमंडलीय तापमान में वृद्धि हो रही है। रही सही कसर मानव की आधुनिक…
एक पत्रकार के रिपोर्ताजों का कोलाज
जीवन की सच्चाई से रूबरू कराती है डॉ. दीनानाथ साहनी की पुस्तक ‘तीसरी बस्ती’
संजय कुमार/ पुस्तक समीक्षा/ डॉ. दीनानाथ साहनी लम्बे समय से पत्रकारिता से जुड़े है। पत्रकारिता के साथ साथ साहित्य के विभिन्न विद्याओं पर कलम चलायी है। कविता, कहानी, उपन्यास पर खूब लिखा है। उनकी पुस्तक तीसरी बस्ती उनके पत्र…
दलित साहित्य आंदोलन का दस्तावेज
कैलाश दहिया / पुस्तक समीक्षा / 'समकालीन हिंदी दलित साहित्य : एक विचार-विमर्श' नाम से वरिष्ठ लेखक सूरजपाल चौहान के समय- समय पर पत्र-पत्रिकाओं में छपे लेखों- आलेखों का संग्रह है। किताब की भूमिका में लेखक ने लिखा है, 'इनका महत्त्व मुझे तब ज्ञात हुआ जब देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से दलित लेखन पर शोध…
नवीनतम ---
- हमें ए आई का सकारात्मक प्रयोग करना चाहिए: राणा यशवंत
- न्यूजरूम के यथार्थ से जोड़ती संपादन-कला
- पत्रकारों से कथित मारपीट के मामले पर प्रेस संगठनों की कड़ी निंदा
- आईआईएस शासन और नागरिक आकांक्षाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी: सूचना-प्रसारण सचिव
- डॉ. शोभित सुमन बने पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में सहायक प्राध्यापक
- प्रो. अरुण कुमार भगत बने मीडिया अध्ययन के विभागाध्यक्ष
- हमें अपनी भाषा, जड़ और पृष्ठभूमि पर गर्व होना चाहिए: दुर्गेश सिंह
- पत्रकारिता की कक्षा में परस्पर संवाद आवश्यक
- डॉ० अमित रंजन के ‘मौसिकी’ का लोकार्पण
- शहला निगार को मिला लिपि यूरोप मीडिया अवार्ड 26
- बीबीसी की पंक्तियां चोरी करके आजतक बनेगा भरोसेमंद चैनल !
- इन्हीं हरकतों से आपसे हम दर्शकों का भरोसा टूटा है
- शब्दों का सामर्थ्य और विचारों की धरोहर है 'संजय उवाच'
- छात्र आंदोलन की आड़ में पत्रकारों पर हमले की डब्ल्यूजेएआई ने की कड़ी निंदा
- डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार
- स्टूडियो नैरेटिव और ग्राउंड रिपोर्टर के बीच बड़ा गैप है
- स्टूडियो तानाशाह हो गया है और पत्रकार निरीह
- पास रद्द किए जाने पर पत्रकारों ने कवरेज का किया बहिष्कार
वर्गवार--
- feature (51)
- General (179)
- twitter (2)
- whatsapp (3)
- अपील (8)
- अभियान (10)
- अख़बारों से (5)
- आयोजन (104)
- इंडिया टुडे (3)
- खबर (1753)
- जानकारी (5)
- टिप्पणी (1)
- टीवी (3)
- नई कलम (1)
- निंदा (4)
- पत्र (2)
- पत्रकारिता : एक नज़र में (2)
- पत्रकारों की हो निम्नतम योग्यता ? (6)
- पत्रिका (45)
- पुस्तक समीक्षा (51)
- पुस्तिका (1)
- फेसबुक से (246)
- बहस (17)
- मई दिवस (2)
- मीडिया पुस्तक समीक्षा (24)
- मुद्दा (528)
- लोग (10)
- विरोधस्वरूप पुरस्कार वापसी (6)
- विविध खबरें (623)
- वेकेंसी (14)
- व्यंग्य (31)
- शिकायत (17)
- शिक्षा (11)
- श्रद्धांजलि (120)
- संगीत (1)
- संस्कृति (1)
- संस्मरण (33)
- सम्मान (17)
- साहित्य (104)
- सिनेमा (16)
- हिन्दी (5)
पुरालेख--
- September 2026 (4)
- August 2026 (8)
- July 2026 (12)
- June 2026 (11)
- May 2026 (14)
- April 2026 (7)
- March 2026 (4)
- February 2026 (9)
- January 2026 (7)
- December 2025 (8)
- November 2025 (5)
- October 2025 (5)
- September 2025 (8)
- August 2025 (12)
- July 2025 (11)
टिप्पणी--
-
Dhanendera Kumar MishraAugust 17, 2026
-
सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
-
कैलाश दहियाJuly 3, 2026
-
Kailash DahiyaJuly 3, 2026
-
Omprakash KashyapJune 30, 2026
-
foo barMarch 2, 2025
-
रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
सम्पादक
डॉ. लीना
