लोकेन्द्र सिंह/ भारत में सूचना का अधिकार, अधिनियम-2005 (आरटीआई) लंबे संघर्ष के बाद जरूर लागू हुआ है, किंतु आज यह अधिकार शासन-प्रशासन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जहाँ सूचनाओं को फाइल पर लालफीता बांध कर दबाने की प्रवृत्ति रही हो, वहाँ अब साधारण नागरिक भी सामान्य प्रक्…
Blog posts : "पुस्तक समीक्षा"
‘आरटीआई से पत्रकारिता' की विधि सिखाती एक पुस्तक
स्त्री चेतना को जगाती कविताएं
एम अफसर खान 'सागर'/ सुहैल मेरे दोस्त उषा राय की पहली कविता संग्रह है। कुल चौव्वालीस (44) कविताओं का यह संग्रह स्त्री जीवन के विभिन्न रूपों को दर्शाती है, जिसमें करुणा, आक्रोश, ममता, दया और यथार्थ शामिल है। इसके साथ इस संग्रह में सामाजिक, पारिवारिक विद्रूपताओं के सरोकार भी परिलक्षित हैं। आजकल कविताएं…
समाज से सवाल करता ‘बीमार मानस का गेह’
संजय कुमार/ अपने तेवर को लेकर चर्चित कवि-आलोचक मुसाफिर बैठा अपनी सद्यः प्रकाशित काव्य संग्रह ‘बीमार मानस का गेह’ से चर्चे में है। रश्मि प्रकाशन, लखनऊ से प्रकाशित ‘बीमार मानस का गेह’ में 38 बेहतरीन कविताओं को चार खंडों में बांटा गया है। प्रसिद्ध हिंदी आलोचक खगेन्द्र ठाकुर ने भूमिका में मुसाफिर बैठा …
राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती एक किताब
पुस्तक के संपादक हैं पत्रकार प्रो. संजय द्विवेदी
लोकेन्द्र सिंह/ देश में राष्ट्रवाद से जुड़ी बहस इन दिनों चरम पर है। राष्ट्रवाद की स्वीकार्यता बढ़ी है। उसके प्रति लोगों की समझ बढ़ी है। राष्ट्रवाद के प्रति बनाई गई नकारात्मक धारणा टूट रही है। भारत में बुद्धिजीवियों का एक वर्ग ऐसा है, जो हर विषय को …
सजग पत्रकार की दृष्टि में मोदी-युग
रमेश नैयर/ पुस्तक ‘मोदी युग’ का शीर्षक देखकर प्रथम दृष्टया लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्तुति में धड़ाधड़ प्रकाशित हो रही पुस्तकों में एक कड़ी और जुड़ गई। अल्पजीवी पत्र-पत्रिकाओं के लेखों के साथ ही एक के बाद एक सामने आ रही पुस्तकों में मोदी सरकार की जो अखंड वंदना चल रही है, वो अब उबाऊ लगने लगी ह…
सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक
एम. एम. चन्द्रा/ अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ है. अब पाठक अपनी स्वतंत…
इतिहासबोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार
सागर मंथन चालू है
समीक्षक: एम् एम् चन्द्रा/ व्यंग्य की दुनिया में चार पीढ़ी एक साथ सक्रिय है. यह व्यंग्य क्षेत्र के लिए शुभ संकेत है. मैं व्यक्तिगत तौर पर इस बात का खंडन करता हूँ कि व्यंग्य के लिए यह समय अन्धकार का समय है या चरणवंदन का समय है या भक्तिकाल है. इतिहास में कभी ऐसा दौर नहीं रहा जहां सि…
कल्लू मामा जिंदाबाद

समीक्षक - आरिफा एविस / सोशल मीडिया पर एक चरित्र “कल्लू मामा” रोज आता है बिंदास किसी की परवाह किये बिना लिखता है तब मैंने इस कल्लू मामा को समझने की कोशिश की .... हालाँकि मैंने आज तक इनको न देखा है न सुना बस फेसबुक पर ही पढ़ा है.....तब मैंने व्यंग्यकार सुभास चंदर का व्यंग्य संग्रह ‘कल्लू मामा जिंदा…
बिहारी राजनीति की सेक्स यात्रा
रमणिका गुप्ता की आत्मकथा “आपहुदरी” पटना के पत्रकार वीरेंद्र कुमार यादव की नजर से
हिन्दी की लेखिका और बिहार विधान मंडल की पूर्व सदस्य रमणिका गुप्ता की अपनी संघर्ष यात्रा रही है। देह यात्रा रही है। सत्ता यात्रा रही है। कभी हारीं, कभी जीतीं। यौन आनंद और यौन प्रताड़ना की सीमा रेखा। सुरक्षा का अहस…
समय की निराशा को दूर करने और मनुष्य की शून्यता को भरने की ज़िद

'रेत पर लिखी इबारतें (जाबिर हुसेन का रचना-कर्म) और 'कोलाहल में शब्दों की लय' (जाबिर हुसेन की क़लम) पुस्तकों की समीक्षा
शहंशाह आलम। 'रेत पर लिखी इबारतें' और 'कोलाहल में शब्दों की लय' समकालीन भारतीय साहित्य के सर्वाधिक चर्चित साहित्यकारों में एक जाबिर हुसेन के रचना-कर्म का, दो खंडों में समाहित,…
जहाँ शब्द कभी बासी नहीं होते
कविता संग्रह- 'राजधानी में एक उज़बेक लड़की' की समीक्षा
समीक्षक- शहंशाह आलम/ कविता सड़ रहे समय के सबसे अधिक विरुद्ध रहती है। यह किसी भी कवि-समय के लिए सुखद होता है, जब उस कवि की कविताएँ बजबजा रहे समय के मुख़ालिफ़ सीना ताने खड़ी दिखाई देती हैं। अरविन्द श्रीवास्तव समकालीन हिंदी कविता के उन कवियों में…
भावों की एक सच्ची अभिव्यक्ति

मैं भारत हूँ’ युवा पत्रकार और लेखक लोकेन्द्र सिंह की प्रथम काव्यकृति है
गिरिजा कुलश्रेष्ठ। ‘मैं भारत हूँ’ युवा पत्रकार और लेखक लोकेन्द्र सिंह की प्रथम काव्यकृति है।
लोकेन्द्र सिंह मूल रूप से गद्य लेखक हैं। उनके सशक्त समसामयिक आलेख अक्सर हमें पढ़ने मिलते रहते हैं। चूँकि पेशे से पत्रकार हैं इस…
दीनदयाल जी की याद दिलाती एक किताब

लोकेन्द्र सिंह/ भारतीय जनता पार्टी के प्रति समाज में जो कुछ भी आदर का भाव है और अन्य राजनीतिक दलों से भाजपा जिस तरह अलग दिखती है, उसके पीछे महामानव पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तपस्या है। दीनदयालजी के व्यक्तित्व, चिंतन, त्याग और तप का ही प्रतिफल है कि आज भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी …
दलितों के खाद्य जीवन को रेखांकित करता:‘अन्न हे अपूर्णब्रह्म’

एक ऐसा दस्तावेज जो वर्ण,जाति व धार्मिक व्यवस्था की पोल खोलता दिखता है और उनके खान-पान को रेखांकित करता है
पुस्तक समीक्षा / संजय कुमार। महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक शाहू पाटोले अपनी सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘अन्न हे अपूर्णब्रह्म’ से चर्चे में हैं। मराठी में लिखी गयी यह पुस्तक वर्ण व सामाजि…
ऐतिहासिक है नरेंद्र मोदी पर लिखी प्रकाश हिन्दुस्तानी की पुस्तक

समीक्षा/ बी.पी. गौतम /प्रकाश हिन्दुस्तानी, यह नाम स्वयं ही एक ब्रांड है। अपने लेखन के चलते पत्रकारिता जगत में बहुचर्चित प्रकाश हिन्दुस्तानी का नाम व चेहरा हर पाठक पहचानता है, उनके बारे में जितनी अधिक बात की जाये, उतनी कम ही रहेगी, इसलिए पिछले दिनों उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक की ही बात करते हैं। “च…
अभूतपूर्व चुनाव का अहम दस्तावेज 'मोदी लाइव'

पत्रकार संजय द्विवेदी की पुस्तक है 'मोदी लाइव'
लोकेन्द्र सिंह / सोलहवीं लोकसभा का आम चुनाव अपने आप में अनोखा था। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह पहला मामला था जब समस्त राजनीतिक दल सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ न होकर एक विपक्षी पार्टी के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रहे थे। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के …
जिन्दगी के तल्खी को पुकारती आवाज़-ए-ज़मीर

पुस्तक समीक्षा/ एम. अफसर खां सागर/ ‘आवाज़-ए-ज़मीर’ हुकम सिंह ‘ज़मीर’ के 103 गजलों का संग्रह है। ज़मीर साहब पुलिस विभाग में उच्च पद पर रहते हुए भी इंसानी जिन्दगी के हर पहलू पर बड़े ही फलसफाना अंदाज में शेर कहें हैं। पुलिस सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक, संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति मिशन के लिए चार पदक, बो…
कमसारनामाः कमसार व बार का अक्स
एम. अफसर खां सागर /कमसारनामा में सुहैल खां ने गाजीपुर के संक्षिप्त इतिहास के साथ-साथ सकरवार वंश के क्रम में यहां के भूमिहार ब्राहमणों, कमसार के पठानों और राजपूतों की चार सौ अस्सी साल के वंशावली तथा इतिहास को संकलित करने का अनूठा काम किया है। सुहैल खां ने प्रस्तुत पुस्तक में भारत में इस्लाम के प्रसा…
पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाइए
व्यवहारिक पत्रकारिता पर ज्यादा जोर
अखबारी पत्रकारिता पर अनेक किताबें बाजार में हैं। इन्हीं में एक किताब और जुड़ गई है- "पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाइए"। यह बाकी से इस मायने में अलग है कि इसमें सिद्धांत पर कम अख़बारों की व्यावहारिक पत्रकारिता पर ज्यादा जोर दिया गया है। आजकल अख़बारों के दफ्तरों में कि…
ईश्वर से संवाद करती कविताएं
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- राजनीति नहीं, समाज बने शक्ति केंद्र: प्रो. संजय द्विवेदी
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Dhanendera Kumar MishraAugust 17, 2026
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सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
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कैलाश दहियाJuly 3, 2026
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Kailash DahiyaJuly 3, 2026
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Omprakash KashyapJune 30, 2026
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foo barMarch 2, 2025
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
सम्पादक
डॉ. लीना

