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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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दोनों खबरें साथ होती तो पता चलता

अभी भी लेक्चर देने का काम चल रहा है और काम नहीं हो रहा है

रवीश कुमार/ प्रधानमंत्री धीरे धीरे पहले पन्ने की पहली हेडलाइन बनने लगे हैं। धीरे धीरे इसी तरह फिर से सब सामान्य होगा। इस खबर में जो उन्होंने कहा है उसे क़ायदे से सिंगल कॉलम में छापना चाहिए था लेकिन इस दौर में मीडिया प्रधानमंत्री का पायदान बना हुआ है। अगर इसे छापा ही तो ठीक बग़ल में उस खबर को लगा देते जो इसी अख़बार में सातवें पेज पर छापी है। जिसमें बताया गया है कि पीएम केयर फंड से दिए गए 250 वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं।

अख़बार की वफ़ादारी सरकार के प्रति है। अगर दोनों खबरें साथ होती तो पता चलता कि अभी भी लेक्चर देने का काम चल रहा है और काम नहीं हो रहा है। वेंटिलेटर भेज दिया गया होगा, उसे चलाते रहने का बजट नहीं दिया होगा तो धूल फाँकना ही था। एक और ज़रूरी खबर जो पहले पन्ने पर हो सकती थी जिसमें बताया जा रहा है कि दिल्ली एन सी आर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कितनी कमी है। इतने लोग मर गए तब अख़बार मोदी जी के बयानों को ही पहले पन्ने पर छापने को पत्रकारिता समझते हैं।

यही आज का हिन्दुस्तान है और हिन्दुस्तान अख़बार है। दैनिक भास्कर ने प्रधानमंत्री के इसी बयान को भीतर के पन्ने पर छापा ।

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना