प्रेमेंद्र। किसी ने कह दिया कि यूपी के सोनभद्र में सोना मिला है बस यार लोग कैमरा कलम लेकर टूट पड़े । किसी को 3000 टन सोना मिल गया, किसी ने लिखा ट्रेन की बोगी के साइज की सोने की चट्टाने, किसी को वहां जहरीले नाग दिखने लगे, किसी ने कहा कि खजाने की रक्षा करने के लिए यह जहरीले सांप है , किसी को इकोनॉमी में अचानक बूम बूम दिखने लगी ....लेकिन किसी ने पता करने की कोशिश नहीं की की वास्तविकता क्या है ? अब पता चल रहा है कि यहां से अधिकतम 160 किलो सोना मिल सकता है, वह भी संभावना है, कंफर्म नहीं. संबंधित विभाग बोल रहा है कि हमसे तो किसी ने बात ही नहीं की . हमने कभी नहीं कहा कि 3000 टन सोना है. इस बीच किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्रिंट मीडिया या वेब मीडिया ने बिना असलियत जाने तूफान मचा दिया. क्या आपको नहीं लगता कि यह बेहद गैर जिम्मेदार और सतही पत्रकारिता का नमूना है ? अफसोस की बात यह है इस सतही पत्रकारिता में कई बड़े बैनर बड़े नाम भी दिखे जिन्होंने पत्रकारिता में काफी इज्जत कमाई है। यह वाकई मीडिया के लिए अफसोस जनक है । शायद ऐसे ही अति उत्साह में किसी पत्रकार को 2000 के नोटों में इलेक्ट्रॉनिक चिप दिखी थी।
भारतीय मीडिया का मानसिक दिवालियापन
Comment
नवीनतम ---
- आज के अख़बार और उसके शीर्षक
- आईआईएस विकल्प शुक्ला का निधन
- बिना अवलोकन पत्रकारिता नहीं हो सकती
- भारत के डिजिटल जीवन की भाषा बने हिंदी : प्रो. संजय द्विवेदी
- राजनीति नहीं, समाज बने शक्ति केंद्र: प्रो. संजय द्विवेदी
- ये 'मीडियाकारी' कितनी शर्मनाक है!
- अमेरिका में अब ट्रंप टीवी
- तीसरे प्रेस आयोग के गठन की जरूरत
- भविष्य की संभावनाओं पर नजर रखें मीडिया विद्यार्थी : स्नेहाशीष सूर
- चमारों के एक और विभाजन का षड्यंत्र
- एआई के दौर में मौलिक अभिव्यक्ति और भाषाई संवेदना को बचाए रखना जरूरी : प्रो. संजय द्विवेदी
- हिंदी निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर
- हमें ए आई का सकारात्मक प्रयोग करना चाहिए: राणा यशवंत
- न्यूजरूम के यथार्थ से जोड़ती संपादन-कला
- पत्रकारों से कथित मारपीट के मामले पर प्रेस संगठनों की कड़ी निंदा
- आईआईएस शासन और नागरिक आकांक्षाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी: सूचना-प्रसारण सचिव
- डॉ. शोभित सुमन बने पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में सहायक प्राध्यापक
- प्रो. अरुण कुमार भगत बने मीडिया अध्ययन के विभागाध्यक्ष
वर्गवार--
- feature (51)
- General (179)
- twitter (2)
- whatsapp (3)
- अपील (8)
- अभियान (10)
- अख़बारों से (6)
- आयोजन (104)
- इंडिया टुडे (3)
- खबर (1758)
- जानकारी (5)
- टिप्पणी (1)
- टीवी (3)
- नई कलम (1)
- निंदा (4)
- पत्र (2)
- पत्रकारिता : एक नज़र में (2)
- पत्रकारों की हो निम्नतम योग्यता ? (6)
- पत्रिका (45)
- पुस्तक समीक्षा (51)
- पुस्तिका (1)
- फेसबुक से (247)
- बहस (18)
- मई दिवस (2)
- मीडिया पुस्तक समीक्षा (24)
- मुद्दा (528)
- लोग (10)
- विरोधस्वरूप पुरस्कार वापसी (6)
- विविध खबरें (626)
- वेकेंसी (14)
- व्यंग्य (31)
- शिकायत (18)
- शिक्षा (11)
- श्रद्धांजलि (121)
- संगीत (1)
- संस्कृति (1)
- संस्मरण (33)
- सम्मान (17)
- साहित्य (104)
- सिनेमा (16)
- हिन्दी (5)
पुरालेख--
- October 2026 (2)
- September 2026 (15)
- August 2026 (8)
- July 2026 (12)
- June 2026 (11)
- May 2026 (14)
- April 2026 (7)
- March 2026 (4)
- February 2026 (9)
- January 2026 (7)
- December 2025 (8)
- November 2025 (5)
- October 2025 (5)
- September 2025 (8)
- August 2025 (12)
टिप्पणी--
-
Dhanendera Kumar MishraAugust 17, 2026
-
सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
-
कैलाश दहियाJuly 3, 2026
-
Kailash DahiyaJuly 3, 2026
-
Omprakash KashyapJune 30, 2026
-
foo barMarch 2, 2025
-
रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
सम्पादक
डॉ. लीना
