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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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मीडिया राज्य सत्ता का टूल बना हुआ है

लोगो के दिमाग को नियंत्रित कर रहा है

गिरीश मालवीय/ पिछले दो दिनों से किसान आंदोलन के प्रति आम जनता का नजरिया बदलता हुआ देख कर अमरीकी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता मैल्कम एक्स की इस उक्ति पर विश्वास और दृढ़ हो गया है जो उन्होंने मीडिया के बारे में कही थी उन्होंने कहा था कि 'मीडिया आपको उन लोगों से नफरत करना सीखा देगा जो शोषित हैं और उन लोगों से आपको प्यार करना सिखा देगा जो शोषणकारी है दमनकारी है"

मैल्कम एक्स ने एक बार कहा था कि मीडिया धरती की सबसे बड़ी ताकतवर संस्था है क्योंकि वह व्यापक स्तर पर लोगों के दिमाग को नियंत्रित करती है।

26 जनवरी की दोपहर के बाद से जो किसान आंदोलन को देखने का नजरिया अचानक से बदला है उस परिवर्तन को जरा ध्यान से देखिए........ एक एक आदमी जो अब न कभी किसान आंदोलन के फेवर में बोला न विपक्ष में बोला वह भी बोल रहा है कि हम इसके साथ मे नही है

भाई ! ये तो बता,..... तू साथ था कब ?.......

तेरे दिमाग मे यह बात आई कैसे, साफ है कि जो तुझे दिखाया जा रहा है उसी के हिसाब से तू यह कह रहा है ?

फिर से मैल्कम एक्स को कोट कर रहा हूँ 'A man who stands for nothing will fall for anything.' यानी कुछ भी नहीं के लिए खड़ा होने वाला मानव किसी भी चीज के लिए गिर जाएगा।

जिस आंदोलन में 60 आहुतियां हो चुकी है, बातचीत के ग्यारह दौर हो चुके हैं,सड़को पर बैठे बैठे किसानों चार महीने से अधिक का समय बीत चुका है .......26 जनवरी की दोपहर से पहले कोई भी अप्रिय घटना नही घटी ....उसमे प्रायोजित तौर पर हिंसा करवाई जा रही है और तुम यह देखकर भी अनजान बन रहे हो.....तुरन्त खूंटा छोड़कर भाग रहे हो ?

ओर यह वो लोग हैं जिन्हें हम अच्छे खासे समझदार ओर बुध्दिजीवी समझते हैं .....दो दिन में आपका नैरेटिव बदल गया ?,......दो दिन में सरकार सही हो गयी किसान गलत हो गया ?

आंदोलन हो तो गांधीवादी ही हो , ओर दमन हो तो वो कैसा हो ? .........वो वैसा ही हो जैसा अंग्रेज सरकार करती थी ? वाह भाई वाह !.....….यानी आप सरकार से सवाल मत करो सारे सवालों की बौछार का मुंह आप आंदोलनकर्ताओं की ओर मोड़ दो ?.....क्योकि वह रुट से भटक कर दिल्ली में घुस गए ?....

क्या न्यूज़ एंकर्स ने, अखबारों के संपादको ने अपने संपादकीय में कभी यह सवाल उठाया कि जब इतना ही अच्छा बिल है तो लाखों करोड़ो किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?..........उन्होंने अपनी लोकतांत्रिक सरकार के सामने यह सवाल कभी नही उठाया लेकिन जैसे ही जरा सी गड़बड़ हुई ! चूक हुई तो सब लाठी डंडा लेकर भाले बरछी लेकर किसान नेताओं पर चढ़ दौड़े !......

साफ दिख रहा है कि मीडिया आज राज्य सत्ता का टूल बना हुआ है और लोगो के दिमाग को नियंत्रित कर रहा है। 

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना