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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पत्रकारिता जगत के बदलाव को रेखांकित करता पुस्तक

मीडिया: भूमंडलीकरण और समाज

पुस्तक समीक्षा / कीर्ति सिंह । पत्रकारिता जगत में काफी बदलाव आ गया है। हर पहलू में विकास हुआ है। इन्हीं विकासों को राजनीतिक विशेषज्ञ, स्तंभकार और मीडिया विशेषज्ञ संजय द्विवेदी की सद्यः प्रकाशित संपादित पुस्तक ‘‘मीडिया भूमंडलीकरण और समाज ’’ में समेटा गया है।

देश के जाने-माने मीडिया विशेषज्ञों ने अपने अपने आलेख के जरिए 1990 से 2012 यानी 22 सालों के मीडिया जगत की तस्वीर को रेखांकित किया है। मीडिया के उतार-चढ़ाव एवं अच्छे- बुरे की परख की गयी है। पुस्तक के संपादक संजय द्विवेदी ने किताब में जो परिदृश्य मीडिया जगत का समायोजित किया है वह अपने आप में मिसाल है। दुनिया तेजी से बदल रही है और कई परिवर्तन दर्ज किये गये हैं। परिवर्तनों को गति देने में मीडिया की खास भूमिका रही है। देश-दुनिया को गति देने वाले मीडिया को भी समर्थ होते देखा गया है। बाजार के दबाव में दबता सामाजिक दायित्व और मिशन से व्यवसाय बनते मीडिया पर सवाल पर उठना स्वाभाविक है।

इस पुस्तक में प्रिंट मीडिया, मीडिया और पाठक के बदलते रिश्ते, जनांदोलनों से कटती पत्रकारिता, इलेक्ट्रोनिक मीडिया की चुनौती और भूमंडलीकरण के बाद बीस-बाईस सालों में बदलते मीडिया के मिजाज का जायजा लिया गया है। पुस्तक में कई आलेख बड़े महत्व के हैं। मसलन पी.साईनाथ का आलेख मुनाफे की कैद में है मीडिया’, अष्टभूजा शुक्ल का आलेख कटघरे में है शब्द की सत्ता’, डाक्टर नरेन्द्र आर्य का भूमंडलीकरण और भारतीय मीडिया’, आनंद प्रधान का आलेख, ‘पत्रकारों की छंटनी मुद्दा क्यों नहीं’, अनिल चमड़िया का एक राजनीतिक प्रश्न है पेड न्यूज’, संजय कुमार का आलेख कहां से आयेंगे अच्छे पत्रकार’, डाक्टर श्रीकांत सिंह का पत्रकारिता, महानगरों से गांव की ओर’, लीना का आलेख मुहैया करायी गयी खबरों में गुम, रियल स्टोरिज’, संजय द्विवेद्वी का मीडिया में दिख रहा है किस औरत का चेहरा’, आदि आलेख जहां मीडिया के परिदृष्य को रेखांकित करते हैं वहीं, डाक्टर राम गोपाल सिंह, वसंत कुमार तिवारी, प्रोफेसर कमल दीक्षित, डाक्टर सुशील द्विवेद्वी, वर्तिका नंदा, अलका सक्सेना, सी. जयशंकर बाबू, हरीश अरोड़ा, सुभ्रदा राठौर, धीरेन्द्र कुमार राय, दीपा, फिरदौस खान, शिरीष खड़े, अंकुर विजयवर्गीज, हर्षवर्द्धन पांडेय, लोकेन्द्र सिंह, अमलेन्दु त्रिपाठी, अनुपमा कुमारी, रितेश चैधरी, किशोर वासवानी और मीता उज्जेन का आलेख भी मीडिया के बदलते चेहरे को सामने लाने में सफल रहा है। पुस्तक एक बेहतर आलेखों के बेहतर संग्रह के तौर पर देखा जा सकता है।

पुस्तक - मीडिया भूमंडलीकरण और समाज

सम्पादक- संजय द्विवेदी

प्रकाशक - यश पब्लिकेशन, दिल्ली।

संस्करण - 2015

 

मूल्य - 495/-रु.

 

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना