प्रो. संजय द्विवेदी/ हां, सामने मीडिया की पढ़ाई करने की चाह रखने वाले विद्यार्थी ही थे, उम्मीद की जानी चाहिए कि वे कोई अखबार, मैंगजीन या किताबें पढ़कर आए होंगे। लगभग 110 विद्यार्थियों से बात करते हुए यह अहसास हुआ कि अखबार अब उनकी जिंदगी में कोई जगह नहीं रखता। वे जो कुछ भी ग्रहण कर रहे हैं, ऑनलाइन ही…
Blog posts : "मुद्दा "
डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार
स्टूडियो नैरेटिव और ग्राउंड रिपोर्टर के बीच बड़ा गैप है
नरेंद्र नाथ मिश्रा/ जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रहे टीवी के कुछ ग्राउंड रिपोर्टर मित्रों पर हमले हुए! उनके खिलाफ नारे लगे! उनमें कुछ तो बेहतरीन पत्रकार हैं!
गलत हुआ! नहीं होना चाहिए! और आगे ऐसा न हो इसके लिए आयोजक भी अपील कर रहे हैं! जिन्होंने ऐसा किया उनके खिलाफ एक्शन भी हो!
अब इसके बाद टीवी मी…
पत्रकार या 'पत्थरकार'
निर्मल रानी/ पेरिस-आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा वार्षिक रूप से जारी किये जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के अनुसार यदि भारतीय पत्रकारिता की रैंकिंग पर नज़र डालें तो 2026 में यह 180 देशों में 157 वें स्थान पर है। पिछले वर्ष से यह रैंकिंग 62 अंक नीचे गिरी है। य…
मीडिया : हमको आईना दिखाना है, दिखा देते हैं
तनवीर जाफ़री/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों संयुक्त अरब अमीरात,नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली देशों का दौरा किया। इस दौरान नॉर्वे की एक घटना ने एक बार फिर मीडिया उसके कर्तव्य व दायित्व को लेकर बहस छेड़ दी। दरअसल ओस्लो में जब मोदी, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ जैसे ही मंच …
भारतीय मीडिया की बड़ी होती दुनिया!
देश की वैश्विक पहचान बनाने और जड़ों से जोड़ने में मिली है कामयाबी
प्रो.संजय द्विवेदी/ इन दिनों भारत की मीडिया में बंदिशों और लोकतंत्र के सिकुड़ते जाने की कथाएं हवा में तैर रही हैं। लोकतंत्र बचाने में वे सब आगे हैं जिनके शासन की कथाएं उन्हें खुद मुंह चिढ़ा रही हैं। मीडिया को दबाने, नियंत्रित करने…
विकास और सुशासन के मुद्दों पर भी काम करे मीडिया
विकास पत्रकारिता पाठ्यक्रम के साथ मीडिया कर्म का भी हिस्सा हो
प्रो.संजय द्विवेदी/ मीडिया की ताकत आज सर्वव्यापी है और कई मायनों में सर्वग्रासी भी। ऐसे में विकास के सवालों और उसके लोकव्यापीकरण में मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो उठी है। यह एक ऐसा समय है, जबकि विकास और सुशासन के सवालों पर हमारी …
भारतीय पत्रकारिता को कलंकित करता गोदी मीडिया
'दो टूक' के एंकर की अत्यंत घटिया टिप्पणी को सुनकर भला कौन कह सकता कि यह भाषा किसी पत्रकार या टीवी एंकर की भाषा हो सकती है
निर्मल रानी / सत्ता की ग़ुलामी करने में मदहोश देश का गोदी मीडिया तमाम अपमानों, ज़लालत, विरोध व आलोचनाओं के बावजूद अपनी प्रस्तुति, सामग्री व शब्दों के चयन के स्तर को दिन प्रतिदिन…
सबसे 'तेज़' बनने के चक्कर में 'श्रद्धांजलि' का पात्र बना मीडिया
तनवीर जाफ़री /अन्य करोड़ों लोगों की तरह मैं भी फ़िल्म जगत में 'ही मैन' के नाम से प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र का बचपन से ही प्रशंसक हूँ। 1985-87 के मध्य इलाहाबाद में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अवसर मिला। उसी दौर में मुंबई आना जाना रहा। उन दिनों मुझे संजय ख़ान, दारा सिंह, रणजीत, देव कुमार उनकी स…
जो बिका नही वो बचा नही: हत्याओं के बन रहे नए रिकॉर्ड
केरल, मणिपुर और त्रिपुरा में पत्रकारों पर हुए हमलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश
निमिषा सिंह/ पत्रकारिता एक ऐसा पेशा जो अंततः निर्भर करता है इस एक सवाल पर... हम आपके लिए क्या कर सकते हैं ? हम पत्रकार उन लोगों की आवाज़ बनते है जिनके अधिकारों का उल…
प्रधानमंत्री का जन्मदिन इवेंट में तब्दील
गोदी मीडिया मोर्चे पर
मुकेश कुमार/ आख़िर वही हुआ, जिसकी संभावना थी। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को एक इवेंट में तब्दील कर दिया गया। मोदी की छवि को चमकाने और उन्हें विराट रूप देने के लिए तमाम तरह के प्रपंच किए गए, प्रचार के हथकंडे आज़माए गए। एक टूल किट बँटा और क्या, कैसे करना है इसे सुनिश्चित किय…
माखनलाल का समाचारपत्र ‘कर्मवीर’ बना अनूठा शिलालेख
समाचारपत्र का ‘फ्रंट पेज’ है माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का ‘शिलालेख’
लोकेन्द्र सिंह/ स्मारक, भवन, परिसर इत्यादि के भूमिपूजन या उद्घाटन प्रसंग पर पत्थर लगाने (शिलालेख) की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। यह इस बात का दस्तावेज होता है कि वास्तु का भूमिपूजन/ उद्घाटन / लोकार्पण कब और किसके द्वारा सम…
लोकतंत्र की लूट में मीडिया की बेशर्म भूमिका
निर्मल रानी/ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव के दौरान होने वाली व्यापक धांधलियों को लेकर चुनाव आयोग पर ज़ोरदार हमला बोला गया है। उन्होंने इस तरह के अनेक प्रमाण पेश किये जिससे यह साफ़तौर पर साबित होता है कि देश में बड़े स्तर पर वोटों की चोरी की जा रही है। राहुल गांधी द्वारा 7 अगस्त 20…
व्यंग्य की जगह छीजती जा रही है
ओम थानवी / अख़बारों और पत्रिकाओं में व्यंग्य की जगह छीजती जा रही है। व्यंग्यचित्रों की भी। जितनी जगह बची है, वहाँ धार कुंद होती दिखाई देती है।
कोई ज़माना था जब अख़बारों में नियमित व्यंग्य छपते थे। अनेक में रोज़ ही। संपादकीय पन्ने पर। रविवारी परिशिष्टों में भी।
जब मैं स्कूल में पढ़ता था, दैनिक …
घोषणाओं का आईना, हकीकत की धूल
पत्रकार पेंशन योजना
मिथिलेश कुमार/ बिहार सरकार द्वारा पत्रकारों के लिए चलाई जा रही पेंशन योजना को लेकर हाल ही में एक बड़ी घोषणा की गई। अब तक दी जा रही ₹6000 की मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹15000 कर दिया गया है। इसके अलावा, यदि किसी पत्रकार का निधन हो जाए तो उसके आश्रित को ₹10000 प्रति माह दिए जाने की भ…
परियों की कहानी जैसी है पत्रकार सम्मान पेंशन योजना
डॉ अशोक प्रियदर्शी/ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जरिए पत्रकारों की पेंशन राशि बढ़ाए जाने की घोषणा की गई है। वास्तव में पत्रकार सम्मान पेंशन योजना श्रमजीवी पत्रकारों के लिए बड़ी खुशी की खबर है। चूकिं यह योजना पत्रकारों के जीवन के आखिरी पड़ाव में उम्मीद की किरण जैसी है। लेकिन ज्यादातर खासकर मुफलिस…
पत्रकारिता की नाक कटाने पर तुला 'गोदी मीडिया'
निर्मल रानी/ यदि आप गोदी मीडिया से जुड़े भोंपू टी वी चैनल्स पर टी आर पी केंद्रित चोंच लड़ाने व उत्तेजना पैदा करने वाली डिबेट देखें तो शायद ही कोई दिन ऐसा गुज़रता हो जिसदिन गोदी मीडिया के इन टी वी एंकर्स को किसी न किसी डिबेट के सहभागी या दर्शकगण के बीच बैठे किसे जागरूक व्यक्ति के हाथों घोर अपमान न सहना …
संवाद और संचार की दुनिया में बज रहा हिंदी का डंका
हिंदी पत्रकारिता के 200 साल
प्रो.संजय द्विवेदी/ कोलकाता से 200 साल पहले जब पं.युगुलकिशोर शुक्ल ने हिंदी का पहला पत्र 30 मई,1826 को प्रारंभ किया होगा, तो उन्होंने यह सोचा भी न होगा कि हिंदी पत्रकारिता देश की आवाज बन जाएगी। वह इस महान देश के सपनों, आकांक्षाओं, संघर्षों, आंदोलनों,दुखों और आर्तनाद क…
हिंदी पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां और संभावनाएं
खबर को रोचक बनाने के सकारात्मक उपाय आजमाये जाने चाहिए, वैल्यू एडिशन हों
अभिषेक दास/ उदंत मार्तण्ड के साथ शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता के समक्ष वर्तमान समय में अनेक प्रकार की चुनौतियां खड़ी हैं। यह चुनौतियां पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से डिगने के कारण उत्पन्न हुई हैं। स्थापित सिद्धांत और मूल्य को …
मूल्यबोध और राष्ट्रहित बने मीडिया का आधार
कोई भी मीडिया सत्यान्वेषण की अपनी भूख से ही सार्थक बनता है.. हिंदी पत्रकारिता के 200 साल (30 मई हिंदी पत्रकारिता दिवस) पर विशेष
प्रो. संजय द्विवेदी/ हिंदी पत्रकारिता दिवस हम 30 मई को मनाते हैं। इसी दिन 1826 को कोलकाता से पं.युगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी भाषा के पहले पत्र 'उदंत मार्तण्ड' की शुरुआत की…
‘देशहित’ से ही बचेगी पत्रकारिता की साख
हिंदी पत्रकारिता दिवस, 30 मई पर विशेष
लोकेन्द्र सिंह/ ‘हिंदुस्थानियों के हित के हेत’ इस उद्देश्य के साथ 30 मई, 1826 को भारत में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी जाती है। पत्रकारिता के अधिष्ठाता देवर्षि नारद के जयंती प्रसंग (वैशाख कृष्ण पक्ष द्वितीया) पर हिंदी के पहले समाचार-पत्र ‘उदंत मार्तंड’ का प्र…
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- शहला निगार को मिला लिपि यूरोप मीडिया अवार्ड 26
- बीबीसी की पंक्तियां चोरी करके आजतक बनेगा भरोसेमंद चैनल !
- इन्हीं हरकतों से आपसे हम दर्शकों का भरोसा टूटा है
- शब्दों का सामर्थ्य और विचारों की धरोहर है 'संजय उवाच'
- छात्र आंदोलन की आड़ में पत्रकारों पर हमले की डब्ल्यूजेएआई ने की कड़ी निंदा
- डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार
- स्टूडियो नैरेटिव और ग्राउंड रिपोर्टर के बीच बड़ा गैप है
- स्टूडियो तानाशाह हो गया है और पत्रकार निरीह
- पास रद्द किए जाने पर पत्रकारों ने कवरेज का किया बहिष्कार
- डब्ल्यूजेएआई की पश्चिम बंगाल प्रदेश समिति घोषित
- कैमरे में दर्ज एक दौर की जीवंत गाथा
- सदस्यों की समस्याओं के निवारण के लिए नियमित बैठक
- शीघ्र होगा सभी जिला इकाइयों का गठन
- डब्ल्यूजेएआई बिहार अगस्त में आयोजित करेगा राज्यस्तरीय कार्यक्रम
- झारखंड में डब्ल्यूजेएआई की नई टीम गठित
- एमसीयू में तनाव प्रबंधन पर कार्यक्रम
- अमरनाथ झा : पत्रकारिता से नदी-पानी के जनसरोकार तक की अविस्मरणीय यात्रा
- डब्ल्यूजेएआई बिहार प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन
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सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
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कैलाश दहियाJuly 3, 2026
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Kailash DahiyaJuly 3, 2026
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Omprakash KashyapJune 30, 2026
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
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पंकज चौधरीDecember 17, 2024
सम्पादक
डॉ. लीना
