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विवादों में अरविंद केजरीवाल का विज्ञापन

संजय कुमार/ सोशल मीडिया पर दिल्ली सरकार के हाकिम अरविंद केजरीवाल इन दिनों खुद के विज्ञापनों को लेकर खासे चर्चे में हैं। दिल्ली में सम-विषम गाड़ियों के परिचालन को लेकर टी.वी.चैनलों और एफ.एम. रेडियो चैनल पर छाये हुए हैं । अरविंद केजरीवाल ने विज्ञापन में अपनी पहचान बताने के लिए अच्छा तरीका निकाल लिया है। टी.वी.चैनलों पर वे अपनी पीठ दिखाते हुए फोन पर अपील करते हुए दिख रहे है, तो वहीं एफ.एम. रेडियो चैनलों पर अपनी आवाज से सम-विषम गाड़ियों के परिचालन को लेकर अपील कर रहे है।

सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगा है कि जो कार्यक्रम संतोषजनक ढंग से चल रहा है उस पर हर रोज नया विज्ञापन और वो भी अपनी आवाज में दिखाने सुनाने की क्या जरूरत है? केजरीवाल अपने आये दिन के विज्ञापनों को लेकर सवालों के घेरे में हैं। चर्चा आम है कि जिस दिन वो अपनी आवाज या फोटो को सुन-देख न लें उन्हें नींद ही नहीं आती? हर मामले में शोहरत पाने की यह भूख वैसे सब नेताओं में होती है लेकिन कुछ नेता इस हुनर के खलीफा हैं और केजरीवाल का नाम ऐसे लोगों की सूची में बहुत ऊपर है। वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सेतिया ने फेसबुक पर सवाल दागा है कि, कृपया आप दूसरा काम संभाले, यह अभियान गोपाल राय को ही चलाने दें। जब दिल्ली के लोग पूरा साथ दे रहे हैं तो पीठ दिखा कर अपनी बात कहने पर लाखों रुपये बर्बाद करने की क्या आवश्यकता है?

पीठ दिखा कर और आवाज देकर अपनी बात कहने वाले केजरीवाल राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी है। जैसा कि एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि कोई भी सरकारी विज्ञापन पर किसी राजनेता की तस्वीर नहीं होगी। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के फोटो तो लग सकते हैं लेकिन किसी मुख्यमंत्री की तस्वीर नहीं लगेगी। इस व्यवस्था से लागू हो जाने के बाद देश भर में मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचने वाले सरकारी विज्ञापनों पर से मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों के फोटो गायब हो गये।

अपनी पहचान कैसे लोगों तो पहुंचाये इसके लिए केजरीवाल ने अच्छा तरीका निकाल लिया है। कोर्ट के फैसले के मद्देनजर रेडियो चैनल पर आवाज तो दी लेकिन टी.वी.चैनलों पर पीठ दिखा कर अपनी पहचान बता दिया। टी.वी.चैनलों पर उनकी आवाज भी आती है साथ में वे अपनी पहचान मफलर बांधे हुए पीठ दिखाते हैं। आवाज के साथ साथ पीठ दिखाते हुए अपनी पहचान छोड़ जाते हैं। हालांकि यह पहल मौका नहीं है इसके पहले भी केजरीवाल रेडियो चैनल पर अपनी आवाज से अपील करते हुये विज्ञापन में आते रहे हैं। वैसे अन्य राजनेताओं ने भी चुनाव के दौरान रेडियो चैनलों पर अपनी आवाज में विज्ञापन दिया है।

सरकारी विज्ञापनों पर कुछ खास गणमान्य लोगों को छोड़ कर किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री के फोटो नहीं लगाए जाने के कोर्ट के फैसले के बीच केजरीवाल ने जो रास्ता निकाला है उसके लिए उन्हें दाद देनी पड़ेगी। बहरहाल, यह हुई न बात,चेहरा मत दिखाओ, लेकिन पहचान दिखा कर अपनी जड़ मजबूत करते रहो.....जय हो।

(लेखक इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े है)

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना