संदर्भ- विरोधस्वरूप पुरस्कार वापसी का
राजेश कुमार। आजकल असग़र वजाहत जी का फेसबुक पर लगभग रोज ही कोई न कोई एकालाप आता ही रहता है। इसकी चर्चा जब मैंने लखनऊ के साहित्यकारों से की तो सब का यही कहना था, इस पर ज्यादा चर्चा करना ठीक नहीं, दक्षिण पंथियों को खामाँखा बहस का मुद्दा मिल जायेगा । लेकिन जब खुद…





