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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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नहीं रहे मशहूर शायर निदा फाज़ली

मुंबई। "होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है, इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है"  ऐसी न जाने कितनी खूबसूरत पंक्तियों को लिखने वाले और फिल्म गीतकार निदा फाज़ली का आज मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वो 78 साल के थे।

शायरी की दुनिया में निदा जाना-पहचाना नाम थे। उन्‍होंने शायरी और गज़ल के अलावा कई फिल्‍मों के लिए गाने भी लिखे थे। पद्मश्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे सम्मानों से वे नवाजे गए। उन्हें 1998 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में जन्मे निदा फाज़ली को शायरी विरासत में मिली थी। उनके घर में उर्दू और फ़ारसी के दीवान, संग्रह भरे पड़े थे। उनके पिता भी शेरो-शायरी में दिलचस्पी लिया करते थे और उनका अपना काव्य संग्रह भी था, जिसे निदा फाज़ली अक्सर पढ़ा करते थे।

निदा फाज़ली उनके लेखन का नाम था। निदा का मतलब होता है आवाज़ जबकि फाज़ली कश्मीर के उस इलाके का नाम है जहां से उनका परिवार दिल्ली आकर बसा था।

निदा फाज़ली ने सूरदास की एक कविता से प्रभावित होकर शायर बनने का फैसला किया था। यह बात उस समय की है, जब उनका पूरा परिवार बंटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान चला गया था लेकिन निदा फाज़ली ने हिन्दुस्तान में ही रहने का फैसला किया। एक दिन वह एक मंदिर के पास से गुजर रहे थे तभी उन्हें सूरदास की एक कविता सुनाई दी जिसमें राधा और कृष्ण की जुदाई का वर्णन था। निदा फाज़ली इस कविता को सुनकर इतने भावुक हो गए कि उन्होंने उसी क्षण फैसला कर लिया कि वह कवि के रूप में अपनी पहचान बनाएंगे।

मीडिया मोरचा परिवार की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि ।

मीडियामोरचा के लिए ब्यूरो प्रमुख साकिब ज़िया की रिपोर्ट 

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सम्पादक

डॉ. लीना