नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने कहा है कि अर्थव्यवस्था की मंदी को और बढने से रोकने के लिए और
सुधारों की जरूरत है। आज नई दिल्ली में आर्थिक सम्पादकों के सम्मेलन को
संबोधित करते हुए वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने इस बात पर चिंता व्यक्त की
कि देश की अर्थव्यवस्था को राजकोषीय, राजस्व और चालू खाता घाटा बढ़…
Blog posts October 2012
आर्थिक सम्पादकों का सम्मेलन शुरू
आपरेटर ना सुने तो जाएं सीधे ट्राई के पास
साल के अंत तक काम करने लगेगा ट्राई का हेल्पलाइन भी
शरद खरे(साई)/ नई दिल्ली। निजी तौर पर सेवा प्रदाता मोबाईल कंपनियों की दादागिरी अब समाप्त होने को है। सेवा प्रदाता कंपनी अगर आपकी शिकायत ना सुने या हीला हवाला करे तो आप सीधे सीधे ट्राई के दरवाजे खटखटा सकते हैं। अगर किसी मोबाइल कंस्यूमर की शिकायत …
बिहार के कस्बों को शिक्षा का आधुनिक केंद्र बनाना पड़ेगा : सत्यानंद याजी
पंडित
शीलभद्र याजी मेमोरियल व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान, बख्तियारपुर, पटना
बख्तियारपुर । प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी मेमोरियल व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान के दो साल पूरे हो गये। पटना से चालीस किलोमीटर दूर ऐतिहासिक कस्बे बख्तियारपुर में गंगा के किनारे मौजूद इस संस्थान की …
किसान विरोधी समय में ‘उद्भावना’ का प्रकाशन महत्वपूर्ण
मीडिया प्रौपेगैण्डा खबरों पर कोई निजी रिपोर्ट नहीं देता
मीडिया में
आए दिन सनसनी फैलाने में अरविन्द केजरीवाल एंड कंपनी को महारत हासिल है। वह प्रौपेगैण्डा का प्रभावशाली व्यक्तित्व है। रोचक बात यह
है कि मीडिया और खासतौर पर टीवी न्यूज मीडिया इस तरह की खबरों पर
(प्रौपेगैण्डा खबरों) अपना कोई निजी रिपोर्ट या खोजबीन नहीं देता, वे तो सिर्फ
जो कहा गया उसे प्रस…
देवी नागरानी के सिन्धी संग्रह 'ग़ज़ल' का लोकार्पण
अमेरिका का एकमात्र हिन्दी समाचार पत्र "यादें"
अमेरिका से हिन्दी का एकमात्र समाचार पत्र "यादें" हिन्दी में प्रकाशित हो रही है। मुख्य संपादिका डॉ अनिता कपूर ने मीडियामोरचा को बताया कि यह अखबार प्रवासी भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। अमेरिका से एकमात्र हिन्दी समाचार पत्र "यादें" के प्रकाशन से पता चलता है कि विदेश में हिन्दी में काम हो …
मीडिया देती है अहमियत
राज ठाकरे जैसे नेता किसी अहमियत के हकदार नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट
मुंबई/ बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि राज ठाकरे जैसे नेता किसी अहमियत के हकदार नहीं हैं। उसने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए यह संकेत भी दिया है कि मीडिया ऐसे न…
वर्तमान पत्रकारिता को बाजारवाद से बचाना होगा
गांधी जी के
समय की पत्रकारिता सत्य और सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता थी
अविनाश वाचस्पति/ महात्मा गांधी की पत्रकारिता अच्छाई, सच्चाई और अहिंसा की रही है। उसी के जरिए देश को आजाद कराया गया और वो सिर्फ आजाद ही नहीं हुआ, कुछ मामलों में अधिक ही आजाद हो गया परंतु उस स्थिति के दोषी गांधी जी नहीं है…
हिन्दी विकास के लिए व्यवस्थित योजना जरूरी
माखनलाल
चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘गांधी,
हिन्दी
और अफ्रीका’ विषय पर व्याख्यान
भोपाल, 2 अक्टूबर। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला का कहना है कि हिन्दी के विकास के लिए एक व्यवस्थित योजना और लक्ष्य …
सत्य के साथ मेरे प्रयोग
पुस्तक चर्चा । आज गाँधी जयंती है । मोहनदास करमचंद गांधी (2 अक्तूबर 1869 - 30 जनवरी 1948) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह-व्यापकसविनय अवज्ञा के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव संपूर्ण अहिंसा पर रखी …
फाल्गुन विश्व की दीपावली वार्षिकी
"विचार-इंसान की जरूरत या कमजोरी "विषय पर
रचनाएं आमंत्रित वैचारिक-सांस्कृतिक-साहित्यिक साप्ताहिक पत्रिका फाल्गुन विश्व की प्रथम दीपावली वार्षिकी इस वर्ष नवम्बर में प्रकाशित हो रही है. अंक की तैयारी जारी है. प्रथम दीपावली वार्षिकांक का शीर्षक "विचार - इंसान की जरूरत या कमजोरी' रखा गया है. आप …
नवीनतम ---
- कैमरे में दर्ज एक दौर की जीवंत गाथा
- सदस्यों की समस्याओं के निवारण के लिए नियमित बैठक
- शीघ्र होगा सभी जिला इकाइयों का गठन
- डब्ल्यूजेएआई बिहार अगस्त में आयोजित करेगा राज्यस्तरीय कार्यक्रम
- झारखंड में डब्ल्यूजेएआई की नई टीम गठित
- एमसीयू में तनाव प्रबंधन पर कार्यक्रम
- अमरनाथ झा : पत्रकारिता से नदी-पानी के जनसरोकार तक की अविस्मरणीय यात्रा
- डब्ल्यूजेएआई बिहार प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन
- डॉ. अंबेडकर का बौद्ध धर्मांतरण एक प्रयोग था जो फेल हो गया
- आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के विरुद्ध बिहार पुलिस की कार्रवाई
- एक इंजीनियर के आगे हांफती मीडियाकर्मी की भाषा
- कॉस्ट्यूम पत्रकारिता के दौर में साख की चिंता किसे है
- स्मृति कल्प का आयोजन 14 जून को
- अपने समय से संवाद का नाम है ‘संजय उवाच’
- पत्रकार या 'पत्थरकार'
- माना कि अंधेरा घना है, पर एक दीया जलाना कहाँ मना है!
- मिशन, बाजार और साख का संकट
- हिंदी पत्रकारिता निश्चित रूप से और आगे बढ़ेगी
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टिप्पणी--
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सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
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कैलाश दहियाJuly 3, 2026
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Kailash DahiyaJuly 3, 2026
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Omprakash KashyapJune 30, 2026
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foo barMarch 2, 2025
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
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पंकज चौधरीDecember 17, 2024
सम्पादक
डॉ. लीना


