सीटू तिवारी। सुबह वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारीजी को देखा कि वो अपने ही भोजपुरिया ठसक अंदाज़ में अपने पोर्टल 'न्यूज़ हाट' पर अखबारों में छपी खबरों की समीक्षा कर रहे थे।
उनकी समीक्षा को सुनते हुए ये ख्याल आया कि क्या अखबार बिहार के कई अंदरूनी और दुर्गम इलाको के लिये एक "लग्जरी गुड" है?
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