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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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क्या प्रायोजित खबरें हैं?

लीना/ पटना / दैनिक भास्कर पटना ने पहले पन्ने पर लीड स्टोरी बनाई गई है तो हिंदुस्तान, पटना ने भी अंदर के पन्ने पर तीन कालम में ठीक-ठाक खबर दी है. और जगह भी खबर है. खबर है- जुगाड़ से तैयार की गई नाव में सवार सांसद रामकृपाल यादव के गड्ढे में गिरने और फिर डूबने से बचने की. तस्वीरें भी हैं कई भास्कर में. जिसमें उन्हें जुगाड़ वाले नाव पर सवार, पलटते हुए और बचाए जाने के बाद सांसद की तस्वीरें छापी है. फ़ोटो वीडीयो से निकाला गया प्रतीत होता है.

अब जबकि सोशल मीडिया पर वह पूरा वीडियो जिसमें भाजपा सांसद रामकृपाल यादव के गिरने बचने की कहानी है, वायरल हो चुका है.  इससे पता चलता है कि इस जुगाड़ नाव पर सांसद का वीडियो बनाया जा रहा था और उसी क्रम में असंतुलन के कारण वह गिर गये. यह सही है कि इलाके में सांसद बाढ़ पीड़ितों का हालचाल लेने गए थे, लेकिन वीडियो में ना ही बाढ़ पीड़ित वहां दिखाई दे रहे हैं न अन्य बहुत सारे लोग.  वीडियो से जाहिर हो रहा है कि गिरे वह, वीडियो बनाने के चक्कर में ही.

अख़बारों ने जिस प्रमुखता और जिस कोण से खबरें छापी हैं, वह सांसद के बयान और मुहैया कराए गये वीडियो के माध्यम से बनाई गई लगती हैं.  क्योंकि लगता नहीं है कि अख़बार का फोटोग्राफर वहां मौजूद था. सवाल यह है कि इन सबके बावजूद अखबार इतनी बड़ी खबर एक भाजपा सांसद के जुगाड़ पर चढ़ने से, बचने की बनाते हैं तो क्या कहा जाए, कि यह सब कुछ, सत्ता में शामिल भाजपा की छवि बनाने और चुपके चुपके सहयोगी जदयू या सीधे तौर पर कहें कि नीतीश कुमार की छवि बिगाड़ने की मीडिया की कोशिश है ?  या ऐसे ही किसी राजनीतिक प्रयोजन का वे हिस्सा बन रहे हैं?

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना