Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

पीएमओ से संपादकों को फ़ोन करके दिया जाता है निर्देश

दिल्ली/ "अगर आप मीडिया के बड़े हिस्से के सत्ता चारण हो जाने से हैरान हैं तो वजह अब साफ़ हो जानी चाहिए। दरअसल मीडिया की ताक़त समझने वाले प्रधानमंत्री मोदी कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहते हैं। यह पहली बार है कि बिना किसी इमरजेंसी की घोषणा के पीएमओ (प्रधान मंत्री कार्यालय) सीधे संपादकों को फ़ोन करके निर्देश दे रहा है।

यह सनसनीख़ेज़ रहस्योद्घाटन मशहूर टी.वी.ऐंकर पुण्यप्रसून बाजपेयी ने किया है। शनिवार शाम दिल्ली के कान्स्टीट्यूशन क्लब में, पत्रकार आलोक तोमर की स्मृति में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रसून ने कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पत्रकारिता का पूरा परिदृश्य बदल गया है। अब संपादक को पता नहीं होता कि कब कहाँ से फोन आ जाए। संपादकों के पास कभी पीएमओ तो कभी किसी मंत्रालय से सीधे फोन आता है। ये फ़ोन सीधे खबरों को लेकर होते हैं और संपादकों को आदेश दिए जाते हैं।

स्मृति सेमिनार का विषय था ‘सत्यातीत पत्रकारिता :  भारतीय संदर्भ.’

पुण्य प्रसून ने कहा कि मीडिया पर सरकारों का दबाव पहले भी रहा है, लेकिन पहले एडवाइजरी आया करती थी कि इस खबर को न दिखाया जाए, इससे दंगा या तनाव फैल सकता है। अब सीधे फोन आता है कि इस खबर को हटा लीजिए। प्रसून ने कहा कि जब तक संपादक के नाम से चैनलों को लाइसेंस नहीं मिलेंगे,  जब तक पत्रकार को अखबार का मालिक बनाने की अनिवार्यता नहीं होगी, तबतक कॉर्पोरेट दबाव बना रहेगा...."

(साभार)

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;f5d815536b63996797d6b8e383b02fd9aa6e4c70175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;1549d7fbbceaf71116c7510fe348f01b25b8e746175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना