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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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सवालों में पत्रकारिता और पत्रकारिता पर सवाल

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष

मनोज कुमार/ सवाल करती पत्रकारिता इन दिनों स्वयं सवालों के घेरे में है. पत्रकारिता का प्रथम पाठ यही पढ़ाया जाता है कि जिसके पास जितने अधिक सवाल होंगे, जितनी अधिक जिज्ञासा होगी, वह उतना कामयाब पत्रकार होगा. आज भी सवालों को उठाने वाली पत्रकारिता की धमक अलग से दिख जाती है लेकिन ऐसा क्या हुआ कि हम…

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मीडिया में हिंदी का बढ़ता वर्चस्व

30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' पर विशेष 

डॉ. पवन सिंह मलिक/ 30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' देश के लिए एक गौरव का दिन है। आज विश्व में हिंदी के बढ़ते वर्चस्व व सम्मान में हिंदी पत्रकारिता का विशेष योगदान है। हिंदी पत्रकारिता की एक ऐतिहासिक व स्वर्णिम यात्रा रही है जिसमें संघर्ष, कई पड़ाव व सफलताएं भी शामिल है। स्वत…

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कोई अदृश्य ताक़त है जो हर दिन सारे न्यूज़ रूम को ख़बर दे रहा!

पत्रकारिता की चाह रखने वाले पत्रकार अवसाद से घिरते जा रहे

रवीश कुमार। भारत में मीडिया समाप्त हो चुका है। ऐसी बाढ़ आई है कि अब टापू भी नहीं बचे हैं। हम सभी किसी ईंट पर तो किसी पेड़ पर खड़े कर आख़िरी लड़ाई लड़ते नज़र आते हैं। कभी भी ईंट और पेड़ बाढ़ में बह सकता है। मीडिया विहीन इस लोक…

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खबरिया चैनल्स तोड़ रहे मर्यादाएं

झूठी खबरें भी सीना ठोंककर परोसने से बाज नहीं आ रहे

लिमटी खरे/ कहा जाता है कि किसी भी परंपरा में बदलाव अवश्यंभावी हैं, पर उसके मूल सिद्धांतों, मान्य परंपराओं को कभी भी तजना नहीं चाहिए। आज हम बात कर रहे हैं खबरिया चैनल्स की। खबरिया चैनल्स में जिस तरह चीख चीख कर अपनी बात कहने और लगभग दांत पीसते हुए किसी…

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सरकार ने टी वी चैनल्स को दिखाया दर्पण

देर आयद दुरुस्त आयद

निर्मल रानी/ भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गत दिनों टीवी चैनल्स के लिये एक चेतावनी रुपी ऐडवाइज़री जारी की है। मंत्रालय ने इस ऐडवाइज़री के माध्यम से रूस व यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध  तथा पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाक़े में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद देश के मुख्य धारा के निजी टीवी चैनलों के प्रसा…

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पत्रकारों को अर्धनग्न कर फोटो सार्वजनिक करने की इजाजत किसने दी!

सोशल मीडिया मंच, व नए पत्रकारिता स्वरूप के दिशा निर्देश तय करने होंगे केंद्र सरकार को

लिमटी खरे/ इस समय सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पुलिस के द्वारा कुछ पत्रकारों को थाने बुलाकर सिर्फ कच्छे में उनकी फोटो वायरल करने की खबरें जमक…

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अखबारी कागजों की कीमत की आग में झुलसता अखबार उद्योग

लिमटी खरे/ कोरोना कोविड 19 के चलते 2020 के बाद अखबारों पर संकट के बादल छाने आरंभ हुए थे, जो आभी बदस्तूर उतने ही घने और स्याह ही दिखाई दे रहे हैं। कोविड काल में अखबार की प्रोडक्शन कास्ट में जमकर बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। बिजली की दरें, स्याही, मशीन के उपरकरण आदि तो महंगे हुए ही हैं, साथ ही कागज की दरों में जिस तरह से अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है वह अखबारों के लिए संकट से कम नहीं ह…

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पत्रकारों के सवालों से 'लाजवाब' होते यह 'रणछोड़'

निर्मल रानी/ हमारे देश में 'मीडिया' व पत्रकारिता का स्तर इतना गिर चुका है कि 'गोदी मीडिया ', 'दलाल मीडिया' व 'चाटुकार मीडिया' जैसे शब्द प्रचलन में आ गये हैं। दुर्भाग्यवश सत्ता प्रतिष्ठान को 'दंडवत ' करने तथा सत्ता के एजेंडे को प्रसारित करने वाले पत्रकारों को भी दलाल,चाटुकार व बिकाऊ पत्रकारों जैसी उपाधियों से नवाज़ा जा चुका है। कहना ग़लत नहीं होगा कि मुख्य धारा के अधिकांश मीडिया घ…

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भारतीय मीडिया इस अपमान का प्रतिकार भी नहीं कर सकता!

रवीश कुमार। ट्रंप के बाद अब बाइडन के सामने भी गोदी मीडिया को लेकर अपमानित होना पड़ा मोदी को. "मुझे लगता है कि वे प्रेस को यहां लाने जा रहे हैं। भारतीय प्रेस अमरीकी प्रेस की तुलना में कहीं ज़्यादा शालीन है। मैं सोचता हूं, आपकी अनुमति से भी, हमें सवालों के जवाब नहीं देने चाहिए क्योंकि वे बिन्दु पर सवाल नहीं करेंगे"…

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बेनकाब हुआ पश्चिमी मीडिया का दोगला और दोहरापन

पत्रकारिता के नैतिक मापदंडों पर पश्चिमी मीडिया का दागदार चेहरा

डॉ अजय खेमरिया/ भारतीय जनसंचार संस्थान के एक ऑनलाइन सर्वेक्षण एवं शोध के नतीजे बताते है कि भारत में अधिसंख्य चेतन लोग इस बात को समझ रहे है कि यूरोप,अमेरिका और अन्य देशों की मीडिया एजेंसियों ने कोरोना को ल…

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सम्पादक

डॉ. लीना