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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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एनडीटीवी अस्त हो गया

राजेश बादल/ संस्था के नाम पर भले ही एनडीटीवी मौजूद रहे, लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में अनेक सुनहरे अध्याय लिखने वाले इस संस्थान का विलोप हो रहा है । हम प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय की पीड़ा समझ सकते हैं । छोटे से प्रोडक्शन हाउस को जन्म देकर उसे चैनलों की भीड़ में नक्षत्र की तरह चमकाने वाले इस दंपत्ति का नाम यकीनन परदे पर पत्रकारिता की दुनिया में हरदम याद किया जाएगा ।उनके कोई बेटा नह…

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भांड गीरी पर उतारू भारतीय टी वी चैनल्स

निर्मल रानी/ क्रिकेट टी-20 विश्व कप का पिछले दिनों इंग्लैण्ड के 'विश्व विजयी ' होने के साथ समापन हुआ। फ़ाइनल मैच से पूर्व जब भारतीय टीम सेमीफ़ाइनल में पहुंची थी और फ़ाइनल में प्रवेश के लिये इंग्लैंड की ही टीम से संघर्ष कर रही थी उसी समय भारतीय टी वी चैनल्स ने क्रिकेट मैच की भविष्यवाणियों का गोया एक 'वार रूम' सा बना दिया था। बेशक कुछ गंभीर टी वी चैनल इस विषय पर विश्वस्तरीय क्रिकेट …

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संवाद से संवेदना जगाइए

मनोज कुमार/ सोशल मीडिया पर एक पीड़ादायक तस्वीर के साथ एक सूचना शेयर की जा रही है कि एक मजबूर पिता और एक मासूम बच्चा अपने भाई की लाश अपनी गोद में लिये कभी उसे दुलारता है तो कभी खुद रोने लगता है. पिता को बच्चे की लाश घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस की जरूरत है लेकिन व्यवस्था के पास यह सुविधा नहीं है. मजबूर पिता के पास एम्बुलेंस का किराया देने लायक पैसा नहीं. यह पहली बार नहीं हो रहा है.…

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क्या यही है 'विश्वगुरु भारत' की पत्रकारिता का स्तर?

तनवीर जाफ़री/ हमारे देश में चल रही सत्ता और मीडिया की जुगलबंदी, अनैतिकता की सभी हदें पार कर चुकी है। सत्ता की चाटुकारिता करना, झूठ पर झूठ प्रसारित करना और विपक्ष को कटघरे में खड़ा करना गोया इसका पेशा बन चुका है। आज देश में सांप्रदायिक वैमनस्य का जो वातावरण बना है उसके लिये जहां साम्प्रदायिकता को हवा देने वाली राजनैतिक शक्तियां ज़िम्मेदार हैं वहीं उनके नापाक मिशन को राष्ट्रीय स्तर …

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सवालों में पत्रकारिता और पत्रकारिता पर सवाल

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष

मनोज कुमार/ सवाल करती पत्रकारिता इन दिनों स्वयं सवालों के घेरे में है. पत्रकारिता का प्रथम पाठ यही पढ़ाया जाता है कि जिसके पास जितने अधिक सवाल होंगे, जितनी अधिक जिज्ञासा होगी, वह उतना कामयाब पत्रकार होगा. आज भी सवालों को उठाने वाली पत्रकारिता की धमक अलग से दिख जाती है लेकिन ऐसा क्या हुआ कि हम…

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मीडिया में हिंदी का बढ़ता वर्चस्व

30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' पर विशेष 

डॉ. पवन सिंह मलिक/ 30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' देश के लिए एक गौरव का दिन है। आज विश्व में हिंदी के बढ़ते वर्चस्व व सम्मान में हिंदी पत्रकारिता का विशेष योगदान है। हिंदी पत्रकारिता की एक ऐतिहासिक व स्वर्णिम यात्रा रही है जिसमें संघर्ष, कई पड़ाव व सफलताएं भी शामिल है। स्वत…

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कोई अदृश्य ताक़त है जो हर दिन सारे न्यूज़ रूम को ख़बर दे रहा!

पत्रकारिता की चाह रखने वाले पत्रकार अवसाद से घिरते जा रहे

रवीश कुमार। भारत में मीडिया समाप्त हो चुका है। ऐसी बाढ़ आई है कि अब टापू भी नहीं बचे हैं। हम सभी किसी ईंट पर तो किसी पेड़ पर खड़े कर आख़िरी लड़ाई लड़ते नज़र आते हैं। कभी भी ईंट और पेड़ बाढ़ में बह सकता है। मीडिया विहीन इस लोक…

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खबरिया चैनल्स तोड़ रहे मर्यादाएं

झूठी खबरें भी सीना ठोंककर परोसने से बाज नहीं आ रहे

लिमटी खरे/ कहा जाता है कि किसी भी परंपरा में बदलाव अवश्यंभावी हैं, पर उसके मूल सिद्धांतों, मान्य परंपराओं को कभी भी तजना नहीं चाहिए। आज हम बात कर रहे हैं खबरिया चैनल्स की। खबरिया चैनल्स में जिस तरह चीख चीख कर अपनी बात कहने और लगभग दांत पीसते हुए किसी…

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सरकार ने टी वी चैनल्स को दिखाया दर्पण

देर आयद दुरुस्त आयद

निर्मल रानी/ भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गत दिनों टीवी चैनल्स के लिये एक चेतावनी रुपी ऐडवाइज़री जारी की है। मंत्रालय ने इस ऐडवाइज़री के माध्यम से रूस व यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध  तथा पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाक़े में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद देश के मुख्य धारा के निजी टीवी चैनलों के प्रसा…

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पत्रकारों को अर्धनग्न कर फोटो सार्वजनिक करने की इजाजत किसने दी!

सोशल मीडिया मंच, व नए पत्रकारिता स्वरूप के दिशा निर्देश तय करने होंगे केंद्र सरकार को

लिमटी खरे/ इस समय सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पुलिस के द्वारा कुछ पत्रकारों को थाने बुलाकर सिर्फ कच्छे में उनकी फोटो वायरल करने की खबरें जमक…

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सम्पादक

डॉ. लीना