अजीत शाही/ पंद्रह साल पहले की बात है. एक न्यूज़ चैनल के मालिक ने मुझे काम पर रखा ये कह कर कि हम न्यूज़ कम कर पा रहे हैं ऊलजलूल ख़बरें ज़्यादा हैं, तुम ज़रा मदद कर दो सीरियस खबरों में. तीन चार हफ़्ते बाद एक स्ट्रिंगर ने एक रिपोर्ट भेजी: कुत्तों का श्मशान. खबर थी कि किसी शहर में कुत्तों का श्मशान है ज…
Blog posts : "व्यंग्य"
सीरियस खबरें !
व्यापक... व्यापमं....!!

तारकेश कुमार ओझा / व्यापमं....। पहली बार जब यह शब्द सुना तो न मुझे इसका मतलब समझ में आया और न मैने इसकी कोई जरूरत ही समझी। लेकिन मुझे यह अंदाजा बखूबी लग गया कि इसका ताल्लुक जरूर किसी व्यापक दायरे वाली चीज से होगा। मौत पर मौतें होती रही, लेकिन तब भी मैं उदासीन बना रहा। क्योंकि एक तो कुटिल और ज…
इन "ललितों" का तो ऐसा ही है !!

तारकेश कुमार ओझा / उन दिनों किसी अखबार में पत्रकार होना आइएएस – आइपीएस होने से किसी मायने में कम महत्वपूर्ण नहीं था। तब किसी भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी के कार्यालय के सामने मुलाकातियों में शामिल करोड़पति से लेकर अरबपति तक को भले ही अपनी बारी के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़े, लेकिन पत्रकार को झट…
न आलू न गोभी, हम सब हैं यार ‘धोबी’
क्या वर्ल्ड वाइड वेब पोर्टल दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई से ही ऑपरेट करने पर लेखक/रिपोर्टर्स विश्वस्तरीय हो सकते हैं ?
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी / एक कहावत है कि कहने पर ‘धोबी’ गधे पर नहीं बैठता। यह कितनी प्रासंगिक है जिसे मै अब अच्छी तरह महसूस करने लगा हूँ। वर्षों पूर्व एक साप्ताहिक समाचार-…
मौत पर भारी मैच ...

खबरों की दुनिया के लिहाज से हादसों में मौत और सैनिकों पर आतंकवादी हमला सबसे ज्यादा नेगलेक्टेड और ओवरलुक की जाने वाली खबरे हैं
तारकेश कुमार ओझा/ क्रिकेट का एक मैच यानी हजारों सहूलियत का कैच। बाजार के लिए यह खेल बिल्कुल गाय की तरह है। जो हमेशा देती ही देती है। नाम - दाम और पैसा बस इसी खेल में ह…
तौबा करिए ऐसे छपास रोगियों से!
अपने ऊल-जुलूल आलेख एक साथ चार-पाँच सौ लोगों लोगों को ई-मेल करते हैं !
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी / आप लेखक, विचारक पत्रकार रिपोर्टर हैं। आप को छपास रोग है, अपने ऊल-जुलूल आलेख एक साथ चार-पाँच सौ लोगों लोगों को ई-मेल करते हैं। आपका वही मेल मुझे भी मिला है। धन्यवाद कहूँ या फिर अपना सिर पीटूँ। बहरहा…
गदाई ही नहीं देते मेरे एस.एम.एस. की रिप्लाई
बच्चू वेबमैग्जीन इसलिए नहीं आपरेट कर रहा हूँ कि तुम्हारे जैसे लफूझन्ना ब्राण्ड उसके लेखकों की फेहरिश्त में आएँ

डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी/ बेटा मै इतना नासमझ नही कि यह भी न समझ पाऊँ कि तुम ‘हाई प्रोफाइल‘ बौंकड़ी बाज हो। पैंतालिस साल पहले तुम्हारे जैसों की पैदाइश हमारे नखलऊ के गदाई टोले में हुई थी…
कफन के पूर्व शाल ओढ़ने की इच्छा क्या पूरी होगी...?
भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी / मैं भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी, यदि संपादकों से मलाल करूँ कि वह लोग मेरे लेखादि प्रकाशित करने के एवज में कुछ नहीं देते हैं तो शायद कितनों को यह अटपटा लगेगा और कुछेक एडिटर तो लेखों को ‘डस्टविन’ में डाल देंगे। मैं किसी संस्था का मुलाजिम नहीं स्वतंत्र लेखन कार्य करता हूँ। लोगों स…
.क्या आप हमारे ‘मैचलेस’ टी.वी. न्यूज चैनल से जुड़ेंगे?
देवर्षि नारद जी ने कहा कि वत्स एक ऐसा टी.वी. चैनल शुरू करो जो तुम्हारे आर्यावर्त में अद्वितीय हो मसलन तीनों लोकों की अफवाहों, बेसिर-पैर वाली खबरों से ओत-प्रोत हो...
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी / एक दिन सपने में मेरी मुलाकात अब तक के सर्वोपरि मीडिया परसन नारद जी से हो गई। वही नारद जो हिन्दी टी.वी. ध…
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- प्रो. अरुण कुमार भगत बने मीडिया अध्ययन के विभागाध्यक्ष
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Dhanendera Kumar MishraAugust 17, 2026
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सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
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कैलाश दहियाJuly 3, 2026
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Kailash DahiyaJuly 3, 2026
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Omprakash KashyapJune 30, 2026
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
सम्पादक
डॉ. लीना
